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माल्या को देना होगा धोखाधड़ी के आरोपों का जवाब, भारत के वकील ने रखीं दलीलें

विजय माल्या के प्रत्यर्पण के मामले में भारत ने लंदन की कोर्ट में अपना पक्ष रखा।

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लंदन. विजय माल्या के प्रत्यर्पण के मामले में भारत ने लंदन की कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनके खिलाफ 'फ्रॉड का मामला' बनता है, जिसका उन्हें जवाब देना होगा। वहीं सुनवाई से पहले माल्या ने एक बार फिर अपने ऊपर लगे आरोपों को आधारहीन और गलत ठहराया। बता दें कि बैंकों के 9 हजार करोड़ के कर्ज माल्या को भारत में भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। इस मामले में सुनवाई 14 दिसंबर तक 8 दिन सुनवाई चलेगी। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान जांच एजेंसी के अफसरों की टीम भी मौजूद रही, जिसकी अगुआई स्पेशल सीबीआई डायरेक्टर राकेश अस्थाना कर रहे हैं।

 

 

आईडीबीआई के 2 हजार करोड़ के लोन पर रहा जोर

सुनवाई के दौरान भारत सरकार की पैरवी कर रही क्राउन प्रोसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) का जोर कुल 2 हजार करोड़ रुपए के लोन पर था, जो माल्या की कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस ने भारतीय बैंकों के कंसोर्टियम से लिए था।

सीपीएस ने माना कि इन लोन्स को मंजूरी देने में बैंकों के इंटरनल प्रोसेस में खामियां हो सकती हैं, लेकिन इस पर भारत में बाद के चरणों में गौर किया जाएगा।

 

 

माल्या ने किया बैंकों को गुमराहः भारत

सीपीएस बैरिस्टर मार्क समर्स ने कहा, 'हमारे केस का मुख्य जोर माल्या का व्यवहार पर रहेगा और कैसे उन्होंने बैंकों को गुमराह किया व प्रक्रिया का दुरुपयोग किया।' उसके बाद उन्होंने घटनाक्रमों के बारे में बताया, जिसमें उनका मुख्य जोर किंगफिशर एयरलाइंस द्वारा आईडीबीआई बैंक से नवंबर, 2009 में लिया गया लोन रहा।

शुरुआत में किंगफिशर ने 950 करोड़ रुपए का लोन लिया था, लेकिन यूको बैंक से 200 करोड़ रुपए मिलने के बाद यह घटकर 750 करोड़ रुपए रह गया।

इस बीच माल्या ने आईडीबीआई से 150 करोड़ रुपए का और लोन आईडीबीआई से मंजूर करा लिया।

 

एक जैसे वादों से माल्या ने लिए कई लोन

सीपीएस ने कहा कि सभी लोन 'घाटे में चल रही' किंगफिशर को सिक्युरिटी गिरवी रखने जैसे कुछ समान तरह के वादों पर दिए गए, जिनमें यूबी ग्रुप की रेप्युटेशन, किंगफिशर की अपनी 'ब्रांड वैल्यू', इक्विटी लगाने के वादे और एयरलाइन के फरवरी 2011 तक प्रॉफिट में लौटने का अनुमान शामिल है।

 

 

 

माल्या ने क्या कहा?

माल्या ने कोर्ट में पेश होने से पहले कहा, 'मैं डिसीजन मेकर नहीं हूं। मैं कोर्ट की सभी प्रोसीडिंग्स को फॉलो करूंगा। मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है।' उन्होंने पिछली बातों को दोहराते हुए कहा कि उन पर लगे आरोप गलत, मनगढ़ंत और आधारहीन हैं।

इस केस में ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) भारतीय अफसरों का पक्ष रख रही है। माल्या आखिरी बार 21 नवंबर को कोर्ट में पेश हुए थे। बता दें कि माल्या पर 17 बैंकों के 9,432 करोड़ रुपए बकाया हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह पिछले साल 2 मार्च को देश छोड़कर भाग गए थे। भारत ने ब्रिटेन से उसके प्रत्यर्पण की रिक्वेस्ट की थी।

 

 

लंदन कोर्ट में कब-कब सुनवाई होगी?

इस मामले में अब 5, 6, 7, 11, 12, 13 और 14 दिसंबर को इस मामले की सुनवाई करेगा। उधर, डिफेंस टाइम टेबल के मुताबिक, 24 दिसंबर को फैसला सुनाया जाएगा।

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, लिखित में क्लोजिंग आर्ग्यूमेंट सबमिट करने के दोनों पक्षों के बिजी शेडयूल पर जज ने सलाह दी कि नए साल में ओरल क्लोजिंग सबमिशन को खत्म करने के बजाय जनवरी में आधे दिन की सुनवाई रखी जा सकती है।

 

अब तक दो बार अरेस्ट हुए माल्या

लंदन एडमिनिस्ट्रेशन ने माल्या को रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर पहली बार 18 अप्रैल को अरेस्ट किया था, लेकिन 3 घंटे में जमानत मिल गई थी। फिर 3 अक्टूबर को मनी लॉन्ड्रिंग के दूसरे केस में माल्या को अरेस्ट किया गया था। इस बार भी आधे घंटे में ही बेल मिल गई।

 

बता दें कि भारत ने इस साल 8 फरवरी को ब्रिटेन से उसके एक्स्ट्राडीशन (प्रत्यर्पण) की रिक्वेस्ट की थी। इसके बाद मार्च में ब्रिटिश पीएम थेरेसा मे ने लंदन में अरुण जेटली से प्रोटोकॉल तोड़कर मुलाकात की थी। इस मुलाकात में माल्या को भारत को सौंपने पर चर्चा हुई थी।

 

 

माल्या पर है इतना कर्ज

31 जनवरी 2014 तक किंगफिशर एयरलाइन्स पर बैंकों का 6,963 करोड़ रुपए बकाया था। इस कर्ज पर इंटरेस्ट के बाद माल्या की टोटल लायबिलिटी 9,432 करोड़ रुपए हो चुकी है।

सीबीआई ने 1000 से भी ज्‍यादा पेज की चार्जशीट में कहा कि किंगफिशर एयरलाइन्स ने IDBI की तरफ से मिले 900 करोड़ रुपए के लोन में से 254 करोड़ रुपए का निजी इस्‍तेमाल किया।

किंगफिशर एयरलाइन्स अक्टूबर 2012 में बंद हो गई थी। दिसंबर 2014 में इसका फ्लाइंग परमिट भी कैंसल कर दिया गया।

डेट रिकवरी ट्रिब्‍यूनल ने माल्या और उनकी कंपनियों UBHL, किंगफिशर फिनवेस्ट और किंगफिशर एयरलाइन्स से 11.5% प्रति साल की ब्याज दर से वसूली की प्रॉसेस शुरू करने की इजाजत दी थी।

 

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