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दोस्‍त ट्रम्‍प ने ये क्‍या किया? खता ईरान की और भुगतेगा भारत

अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रम्‍प के एक फसले ने मोदी सरकार को चिंता में डाल दिया है....

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नई दिल्‍ली। अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रम्‍प के एक फैसले ने मोदी सरकार को चिंता में डाल दिया है। दरअसल शर्तों का पालन नहीं करने के आरोप में ट्रम्‍प ने ईरान के साथ हुई परमाणु संधि को तोड़ने का फैसला कर लिया है। संधि टूटने के बाद ईरान पर एक बार फिर से 2015 से पहले के प्रतिबंध लग जाएंगे। इन प्रतिबंधों के चलते भारत की ओर से ईरान मेंं किए गए अरबों रुपए के निवेश पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल अमेरिका की ओर से प्रतिबंध लगने के बाद ईरान दुनिया के ज्‍यादातर देशों को आसानी के साथ क्रूड नहीं बेच पाएगा। एक तरफ जहां उसका पेमेंट सिस्‍टम ठप पढ़ जाएगा वहीं दूसरी ओर उसे अपने प्रोडक्‍ट की शिपिंग और इन्‍श्‍योरेंस में भी दिक्‍कत आएगी। 

भारत के लिए दोहरा संकट 

ट्रम्‍प की ओर से ईरान पर प्रतिबंध लगाने के बाद भारत के ऊपर दोहरा संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां ईरान के सस्‍ते क्रूड से हाथ धोना पड़ेगा, वहीं दूसरी ओर चाहबहार पोर्ट परियोजना के लिए मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि अफगानिस्‍तान, रूस और अन्‍य मध्‍य एशियाई देशों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए भारत चाबहरा पोर्ट को अपना बेस बना रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते इस पूरी परियोजना पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। 

 

 

भारत ने किया है भारी निवेश 

भारत चाबहार के माध्‍यम से भारत ने ईरान ने काफी निवेश कर रखा है। चाबहार पोर्ट के पहले चरण का काम पूरा हो चुका है। दूसरे चरण के लिए 12.2 करोड़ डॉलर यानी 78 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेगा।  इसके अलावा 8.5 करोड़ डॉलर पोर्ट के उपकरण पर  खर्च किए जाएंगे। भारत चाबहार पोर्ट के निर्माण के लिए ईरान को 15 करोड़ डॉलर का लोन भी देने वाला है । भारत 6 करोड़ डॉलर की राशि रिलीज भी कर चुका है। एनर्जी एक्‍सपर्ट नरेंद्र तनेजा के मुताबिक,  यह देखना जरूरी होगा कि प्रतिबंधों के बाद भारत अमेरिका को इस परियोजना के लिए कैसे राजी करता है।


 

भारत के लिए क्‍यों अहम है चाबहार 
जिस तरह चीन के ग्‍वादर से आर्थिक और जियोपॉलिटिकल हित जुड़े हैं, ठीक उसी तरह चाबहार से भारत के भी जुड़े हैं। दरअसल पाकिस्‍तान भारत को अफगानिस्‍तान जाने का रास्‍ता नहीं दे रहा है। इसके चलते भारत को अफगानिस्‍तान और मध्‍य एशिया तक पहुंचने का कोई रास्‍ता नहीं मिल पा रहा है। भारत चाबहार पर पोर्ट बनाएगा और फिर वहां से अफगानिस्‍तान तक सड़क और रेल मार्ग बिछाएगा। इससे वह ईरान के जरिए अफगानिस्‍तान तक जुड़ जाएगा।  इसके अलावा यूरोप तक पहुंच बढ़ाने में भी भारत को मदद मिलेगी। चाबहार पोर्ट पाकिस्तान के बलूचिस्तान के निकट ईरान के दक्षिण में स्थित है। 


 

भारत का बड़ा है प्‍लान

चाहबार को लेकर भारत सरकार का बड़ा प्‍लान है। पोर्ट, रेल लाइन और सड़क के अलावा  कई भारतीय कंपनियां यहां अपने प्‍लांट भी लगाने की योजना बना रही हैं। नाल्‍को यहां एल्‍यूमिनियम प्‍लांट लगाना चाहती है।  कई प्राइवेट और कोऑपरेटिव संस्‍थाएं यहां उर्वरक के प्‍लांट लगाने की तैयारी में हैं। ONGC  ने यहां फरजाद इलाके में गैल फील्‍ड की खोज की है। इस गैस फील्‍ड को डेवलप करने के लिए ONGC  की ईरान सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही है। इस परियोजना की लागत करीब 11 अरब डॉलर है। माना जा रहा है कि अमेरिका के कदम के बाद ONGC  को पीछे कदम खींचने पड़ सकते हैं। 

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