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भारतीय कंपनियों ने घटाए H-1B वीजा आवेदन, विदेशियों में अमेरिकी कंपनी में नौकरी की घटी रुचि

भारतीय आईटी कंपनियों ने H-1B वीजा के लिए पिटीशन फाइलिंग को कम कर दिया है।

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वाशिंगटन. भारतीय आईटी कंपनियों ने H-1B वीजा के लिए पिटीशन फाइलिंग को कम कर दिया है। वहीं बाहरी देशों के नागरिक भी किसी अमेरिकी कंपनी में जाने से बच रहे हैं। इसकी वजह एंटी-इमीग्रेशन को लेकर ट्रंप प्रशासन का कड़ा रुख है। यह बात सिलिकॉन वैली के एक न्‍यूजपेपर सैन फ्रांसिस्‍को क्रोनिकल में कही गई है। बता दें कि H-1B वीजा के लिए पिटीशन की फाइलिंग 2 अप्रैल से शुरू हुई है। 
 
अखबार के एडिटोरियल बोर्ड का कहना है कि H-1B वीजा के लिए सख्‍त हुए नियमों के चलते एप्‍लीकेंट्स और उन्‍हें रखने वाली कंपनियों दोनों प्रभावित हुई हैं। इस वीजा प्रोग्राम का गलत फायदा उठाने  और एप्‍लीकेंट्स की बड़ी तादाद के लिए जिम्‍मेदार होने का इल्‍जाम झेल रही भारतीय कन्‍सल्टिंग कंपनियों ने पिटीशन फाइलिंग घटा दी है। वहीं बाहर के नागरिक भी अमेरिकी कंपनियों में जाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। एक और अमेरिकी अखबार वॉल स्‍ट्रीट जनरल ने भी क्रोनिकल के दावे से सहमति जताई है। उसके मुताबिक, ऐसा प्रदर्शित हो रहा है कि H-1B वीजा के लिए मार्केट डिमांड गिर रही है। 
 

जन्‍म के बजाय स्किल के दम पर नौकरी देने से बढ़ता है कॉम्पिटीशन 

इसके साथ अखबार में यह भी दावा किया गया है कि स्‍टडीज दर्शाती हैं कि विदेशी वर्कर्स अमेरिकी इकोनॉमी और अमेरिकी वर्कर्स दोनों के लिए अच्‍छे हैं। क्रोनिकल में यह भी कहा गया कि जब कंपनियां बिना ये परवाह किए कि वर्कर कहां के हैं, उन्‍हें उनके बेहतर स्किल के दम पर नौकरी देती हैं तो प्रतिस्‍पर्धा बढ़ती है और इसके चलते पूरी इंडस्‍ट्री को बूस्‍ट मिलता है। अखबार का कहना है कि टेक्‍नोलॉजी ओरिएंटेड इमीग्रेशन सर्विसेज प्रोवाइडर इन्‍वॉय ग्‍लोबल के मुताबिक, उसके सर्वे किए गए इंप्‍लॉयर में से 26 फीसदी को अमेरिकी इमीग्रेशन सिस्‍टम में अनिश्चितता के चलते अपने प्रोजेक्‍ट्स डिले करने पड़े और 22 फीसदी को अन्‍य जगहों पर काम रिलोकेट करना पड़ा। 
 

2017 व 2018 में गिरी H-1B के लिए जॉब सर्च 

इनडीड हायरिंग लैब में इकोनॉमिस्‍ट डेनियल कल्‍बर्टसन का कहना है कि इंनडीड डॉट कॉम पर H-1B वीजा से जुड़ी सर्च में 2017 और 2018 के दौरान लगातार गिरावट आई है। फरवरी 2018 में यह सर्च 2017 के मुकाबले 9 फीसदी कम रही। साल दर साल लगातार 13वें महीने गिरावट दर्ज की गई है।  
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