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अमेरिका ने फिर रोकी H-1B वीजा की प्रीमियम प्रोसेसिंग, सीधा नुकसान IT पेशेवरों को

स्‍टील और एल्‍युमिनियम इम्‍पोर्ट पर ड्यूटी लगाने के बाद ट्रम्‍प प्रशासन ने भारत को एक और झटका दिया है...

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नई दिल्‍ली। स्‍टील और एल्‍युमिनियम इम्‍पोर्ट पर ड्यूटी लगाने के बाद ट्रम्‍प प्रशासन ने भारत को एक और झटका दिया है। हालांकि इसकी उम्‍मीद पहले ही की जा रही थी। दरअसल अमेरिकी अधिकारी जल्‍द ही H-1B वीजा का फास्‍ट प्रोसेसिंग सर्विस रोक देंगे। अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस के अधिकारियों ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। यह रोक 10 सितंबर तक लागू रहेगी। अमेरिकी अधिकारियों ने पिछले साल भी यह सर्विस रोकी थी। 

भारतीय आईटी पेशेवरों पर सीधा असर 
इस तरह की वीजा सुविधा का लाभ सबसे ज्‍यादा भारतीय आईटी पेशेवरों को मिलता था। आईटी कंपनियां इस सर्विस के तहत सामान्‍य से थोड़ा ज्‍यादा फीस चुकाकर किसी भारतीय आईटी पेशेवर के लिए आसानी से यह वीजा जारी करवा लेती थीं।  पिछले साल भी H-1B वीजा की प्रोसेसिंग रोक दी गई थी। इसका  असर अमेरिकी आईटी सेक्‍टर पर देखा गया था। इसके चलते इंजीनियरों का इंतजाम होने तक कई कपंनियों को अपने प्रोजेक्‍ट या वेंयर को रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा था। 

 

आईटी कंपनियों को ही नुकसान 
अमेरिकी अधिकारियों की नई घोषणा से साफ है कि वीजा जारी करने वाली एजेंसी अब प्रीमियम प्रोसेसिंग से जुड़ा H-1B वीजा अप्‍लीकेशन स्‍वीकार नहीं करेगी। इस सर्विस के तहत किसी विदेशी कामगार को मात्र 15 दिन के भीतर वीजा जारी कर दिया जाता है। यह नियम लाभ कमाने के लिए काम करने वाली कंपनियों पर लागू होगा। हर साल अमेरिकी सरकार ऐसी कंपनियों के लिए 85 हजार वीजा जारी करती है। जानकारों के मुताबिक, ज्‍यादातर आईटी कंपनियां इसी के दायरे में आती हैं। ऐसे में नुकसान भारतीय पेशेवरों को ही सबसे ज्‍यादा होगा।  

एनजीओ और रिसर्च इंस्‍ट्रीट्यूट को छूट 
ऐसी कं‍पनियों जो इस कैटेगरी में नहीं आती हैं, उनकी ओर से जमा किए गए अप्‍लीकेशन फॉर्म को एजेंसी स्‍वीकार करती रहेगी। इस कैटेगरी में ज्‍यादातर  एनजीओ और रिसर्च इंस्‍टीट्यूट आते हैं। आने वाले कुछ हफ्तों बाद ही अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस वर्ष 2019 के लिए H-1B वीजा अप्‍लीकेशन स्‍वीकार करना शुरू कर देंगे। एजेंसी का दावा है कि नए कदम से सामान्‍य H-1B वीजा जारी करने के समय की बचत होगी। अभी तक सामान्‍य वीजा करने में महीनों का वक्‍त लग जाता है, क्‍योंकि अधिकारी प्रीमियम प्रोसेसिंग में व्‍यस्‍था में लगे रहते हैं।  

 

 

चीन पर असर नहीं 

अमेरिकी सरकार ने इससे पहले जब एल्‍यूमिनियम और स्‍टील के इम्‍पोर्ट पर ड्यूटी लागने का फैसला किया था, तो उसका असर भारत से ज्‍यादा चीन पर हुआ था, उसका सबसे बड़ा कारण भारत के कुल एल्‍यूमिनियम और स्‍टील एक्‍सपोर्ट में भारत का हिस्‍सा महज 2 फीसदी है। भारत के आईटी एक्‍सपोर्ट में सबसे बड़ा हिस्‍सेदार अमेरिका ही है। जबकि चीनी कंपनियों की इसमें हिस्‍सेदारी न के बराबर है। ऐसे में सीधा असर भारतीय आईटी सेक्‍टर पर पड़ना तय है। 

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