Home » Economy » InternationalUS elevates Indias trade status to NATO-level ally, move to boost access to defence tech

भारत-रूस की दोस्ती तोड़ने के लिए अमेरिका ने चला दांव, मोदी भी नहीं कर पाएंगे इनकार, ट्रम्प ने दिया खास STA-1 दर्जा

इस स्‍टेटस के बाद अमेरिका भारत को किसी भी तरह के घातक हथियार बेच सकेगा..

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नई दिल्‍ली. डिफेंस और स्‍ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में रूस को पीछे छोड़ते हुए भारत का नजदीकी साझेेदार बनने के लिए अमेरिका ने अपना कानून बदल दिया है। ट्रम्‍प प्रशासन ने भारत को बेचेे जाने वाले हाई टेक्‍नोलॉजी प्रोडक्‍ट के एक्‍सपोर्ट को कंट्रोल करने वाले नियमों में ढील दे दी है। इसके बाद वह किसी भी तरह के हथियार और टेक्‍नोलॉजी भारत को बेच सकेगा। अमेरिका के कॉमर्स मिनिस्‍टर विल्‍बर रोस ने बताया कि उनकी सरकार ने भारत को स्‍ट्रैटेजिक ट्रेड अथॉराइजेशन-1 यानी STA-1 का दर्ज दिया है। रोस के मुताबिक, भारत के साथ बढ़ती रक्षा साझीदारी को देखते हुए ऐसा किया गया है।    

 

STA-1 का क्‍या है मतलब 
STA-1 अमेरिका से एक्‍सपोर्ट के लिए लाइसेंस की बाध्‍यताओं को खत्‍म करता है। इसके तहत किसी ट्रांजैक्‍शन स्‍पैसिफिक लाइसेंस के बिना ही किसी एक्‍सपोर्ट को निश्चित समयावधि में परिभाषित नियमों के तहत एक्‍सपोर्ट करने की इजाजत होती है। भारत को यह दर्जा देने के बाद अमेरिका हाईटेक डिफेंस और नॉन डिफेंस टेक्‍नोलॉजी से लैस प्रोडक्‍ट को तेजी के साथ भारत को भेजने में सक्षम होगा। ऐसी चीजों के एक्‍सपोर्ट पर अभी तक कड़े लाइसेंस नियम हैं। इस कदम का मतलब है कि भारत अमेरिका की नई डिफेंस टेक्‍नोलॉजी तक आसानी से पहुंच हासिल कर सकता है। इसके लिए उसे अमेरिका से कई तरह के अलग-अलग लाइसेंस हासिल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

 

 

भारत भी पहुंचा खास क्‍लब में 
अमेरिका ने भारत को अब वही दर्जा दिया है, जो उसने अपने नाटो सहयोगियों ऑस्‍ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया को दे रखा है। STA-1 का दर्जा मिलने के बाद अमेरिका, भारत को क्रिटिकल टेक्‍नोलॉजी से लैस डिफेंस और अन्‍य हाईटेक प्रोडक्‍ट आसानी से बेच सकेगा। अमेरिका का दावा है कि STA-1 दर्जा नहीं होने के चलते पिछले 7 साल के दौरान 9.7 अरब डॉलर की भारतीय खरीद प्रभावित हुई है। 

 

 

तो अमेरिका रूस को छोड़ सकता है पीछे 

रूस मामलों के जानकार और रसियन स्‍टडी सेंटर में प्रोफेसर राजन कुमार के मुताबिक, अमेरिका का यह कदम डिफेंस के क्षेत्र में रूस-भारत की पार्टनरशिप को कम कर देगा। दरअसल रूस अब भी भारत का बड़ा डिफेंस पार्टनर है। ईरान, सीरिया जैसे मसलों पर ट्रम्‍प प्रशासन जिस तरह से रूस को अंतरराष्‍ट्रीय फोरम्‍स पर घेरने की कोशिश कर रहा है, यह स्‍टेटस अमेरिका की इस मुहिम में मददगार साबित होगा। राजन के मुताबिक, इस कदम से भारत और रूस के डिफेंस दोस्‍ती निश्चित तौर पर प्रभावित होगी।  


आगे पढ़ें- इस स्‍टेप से भारत को क्‍या हासिल होगा.. 

 

 

भारत की जरूरतों के अनुरूप है यह स्‍टेटस 
डिफेंस को लेकर मोदी सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव किया है। सरकार अब मेक इन इंडिया के तहत पार्टनरशिप के जरिए देश में डिफेंस इंडस्‍ट्री खड़ी करना चाहती है। सरकार चाहती है कि दूसरे देश अपने डिफेंस प्रोडक्‍ट के साथ भारत को टेक्‍नोलॉजी का भी ट्रांसफर करें। अमेरिका के नए स्‍टेटस के चलते अब अमेरिकी डिफेंस कंपनियां फाइटर प्‍लेन समेत दूसरे अन्‍य डिफेंस प्रोडक्‍ट भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर भारत में ही बना सकेंगी और उनको टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर में भी किसी तरह की दिक्‍कत नहीं आएगी। भारत को अपनी डेफेंस जरूरतों के लिए ऐसी क्रिटिकल टेक्‍नोलॉजी की जरूरत भी है। ऐसे अगर अमेरिका भविष्‍य में ऐसी किसी क्रिटिकल टेक्‍नोलॉजी के ट्रांसफर का ऑफर करता है तो भारत इसे जरूर स्‍वीकार सकता है।   

 

आगे पढ़ें- भारत-रूस के बीच टूटी थी 5th जनरेशन फाइटर प्‍लेन की डील 

 

भारत-रूस के बीच टूटी थी 5th जनरेशन फाइटर प्‍लेन की डील 
रूस भारत को इस तरह की क्रिटिकल टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर करने को अब भी तैयार नहीं दिख रहा है। इसी के चलते भारत और रूस का संयुक्त रूप से (फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट) FGFA का प्रस्ताव ठन्डे बस्ते में चला गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस भारत के साथ फाइटर प्‍लेन विकसित तो करना चाहता था, लेकिन इसकी टेक्‍नोलॉजी भारत को ट्रांसफर करने को तैयार नहीं था। इसके चलते भारत ने इस परियोजना पर अकेले ही आगे बढ़ने का फैसला किया है। 
 
आगे पढ़ें-अब क्‍या क्‍या भारत को बेच सकेगा अमेरिका

 

भारत-रूस के बीच टूटी थी 5th जनरेशन फाइटर प्‍लेन की डील 
रूस भारत को इस तरह की क्रिटिकल टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर करने को अब भी तैयार नहीं दिख रहा है। इसी के चलते भारत और रूस का संयुक्त रूप से (फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट) FGFA का प्रस्ताव ठन्डे बस्ते में चला गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस भारत के साथ फाइटर प्‍लेन विकसित तो करना चाहता था, लेकिन इसकी टेक्‍नोलॉजी भारत को ट्रांसफर करने को तैयार नहीं था। इसके चलते भारत ने इस परियोजना पर अकेले ही आगे बढ़ने का फैसला किया है। 
 
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अब क्‍या क्‍या भारत को बेच सकेगा अमेरिका 
अमेरिकी कॉमर्स मिनिस्‍ट्री के मुताबिक, अमेरिकी सरकार ने जिन देशों को STA-1 का दर्जा दिया है, उन्‍हें वह नेशनल सिक्‍यूरिटी, कैमिकल या बायोलॉजिकल हाथियार, परमाणु अप्रसार, रीजनल स्‍टैबिलिटी और क्राइ‍म कंट्रोल के नियंत्रण से जुड़े आयटम्‍स भी बेच सकता है। इस कैटेगरी में इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, लेजर एंड सेंसर, इन्‍फॉर्मेशन सिक्‍यूरिटी, कम्‍प्‍यूटर्स और इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, नेविगेशन, टेलिकम्‍यूनिकेशन और एयरोस्‍पेस से जुड़े आयटम्‍स भी आते हैं। 

 

 

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