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ब्रि‍टेन की संसद ने कर दि‍ए 'तलाक' पर दस्‍तखत, भारत को फि‍र करने होंगे पैक्‍ट

ब्रिटेन के उच्च सदन ने बुधवार को यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग होने संबंधी विधेयक - Brexit को पारित कर दिया है।

UK's upper house of parliament approves government's Brexit law

लंदन। ब्रिटेन के उच्च सदन ने बुधवार को यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग होने संबंधी विधेयक - Brexit को पारित कर दिया है। इसके साथ ही इस विधेयक पर महीनों से हो रही संसदीय चर्चा पर भी विराम लग गया है। इस विधेयक के कानून बनने पर ब्रिटेन की यूरोपीय संघ की सदस्यता औपचारिक रूप से खत्म हो जाएगी। 


ब्रिटेन के उच्च सदन हाउस ऑफ लॉर्ड्स ने सरकार के पेश किये गये इस विधेयक को मतदान के बिना ही अपना अनुमोदन दे दिया। इससे पहले सदन के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स में इस विधेयक का विरोध करने वालों को हार का सामना करना पड़ा था।  


अब शाही मंजूरी का इंतजार 
यूरोपीय संघ से अलग होने संबंधी विधेयक अब रायल असेन्ट यानी शाही स्वीकृति मिलने के बाद कानून बन जाएगा। शाही स्वीकृति महज एक औपचारिक प्रक्रिया है जिसमें किसी तरह की चर्चा या वाद-विवाद शामिल नहीं होता। 


क्‍या है यूरोपीय संघ 
यूरोपीय संघ 28 देशों का ऐसा संघ है, जो हर संकट में एक दूसरे के साथ खड़े हैं। बात विकास की हो या आर्थिक हितों की या फिर इंटरनेशनल स्तर पर अपनी बात रखने की, यह सभी मुल्क एक सुर में बोलते हैं। लेकिन यूरोपीय देश कई अहम मुद्दों पर फैसला लेते हुए अपने हाथ बंधे हुए पाते हैं। उनके ये फैसले ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के मुख्यालय में होते हैं और इस बात को लेकर इन देशों में बेचैनी महसूस हो रही है।  


जून 2016 में हुई वोटिंग 
ब्रिटेन में भी ऐसी आवाजें उठ रही थीं कि‍ इस संघ में रहने की वजह से ब्रि‍टेन के हि‍त प्रभावि‍त हो रहे हैं। इसी धारणा का समर्थन करने वाले लोगों ने बेग्‍जि‍ट अभि‍यान शुरू कर दि‍या। जून 2016 में ब्रि‍टेन ने देश में कराई गई वोटिंग के जरि‍ए यूरोपीय यूनि‍यन से अलग होने का फैसला कि‍या। यह ऐसा पहला देश है जो यूरोपीय यूनि‍यन से अलग हो रहा है। यह साथ 40 साल से ज्‍यादा तक का रहा। इसे ब्रि‍टेन का एग्‍जि‍ट - ब्रेग्‍जि‍ट यानी ब्रि‍टेन का बाहर होना नाम दि‍या गया। 


भारत पर क्या होगा असर
ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन से बाहर निकलने पर डॉलर में मजबूती मुमकिन है और इससे रुपया टूटेगा। भारत के कुल एक्सपोर्ट का 15 फीसदी हिस्सा ब्रिटेन जाता है और भारत में कुल एफडीआई का 8 फीसदी ब्रिटेन से आता है। ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन से बाहर निकलने पर भारत में कारोबार पर असर पड़ने की आशंका नहीं है, लेकिन आगे चलकर भारत को ब्रिटेन के साथ अलग से व्यापारिक समझौते करने होंगे।

 

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