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विदेशी करंसी पर ट्रंप को भाई मोदी सरकार की नीति, शक के दायरे से बाहर होगा भारत

अमेरिका ने कहा-भारत में स्पष्ट दिख रहा है बदलाव

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नई दिल्ली. डॉलर के मुकाबले रुपए में होने वाले उतार-चढ़ाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों की अमेरिका ने सराहना की है। भारत को इसका फायदा यह होगा कि अमेरिका भारत को विदेशी विनिमय निगरानी सूची से हटा सकता है। अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने कहा कि भारत में ऐसी कुछ प्रगति हुई है और सरकार ने कुछ ऐसे कदम उठाए हैं जिनसे उनकी कुछ बड़ी चिंताएं दूर हुई हैं।

 

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने की तारीफ 

खबरों के मुताबिक अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने भारत के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप नहीं करने की प्रशंसा की है। हाल में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा था कि रुपए की विनिमय दर में गिरावट बाजार-आधारित है और अनुचित उतार-चढ़ाव की स्थिति में ही हस्तक्षेप किया जायेगा।

 

 

किन-किन देशों पर अमेरिका करता है शक
अमेरिका उन देशों को निगरानी सूची में रखता है, जिनकी विनिमय दर नीतियों पर उसे शक है। अप्रैल में अमेरिका ने भारत के साथ चीन, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड को इस सूची में डाला था। फिलहाल अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भारत को इस सूची में बनाए रखा है। हालांकि उसने कहा कि भारत पिछले छह महीने में जिस दिशा में बढ़ा है, वैसे आगे भी चलता रहा तो अगले दो साल के लिए जारी होने वाली रिपोर्ट में भारत का नाम सूची से हटाया जा सकता है। अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की वृहत आर्थिक एवं मुद्रा विनिमय नीतियों पर जारी छमाही रिपोर्ट में इन बातों का उल्लेख किया है। 

 

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अमेरिका ने कहा-भारत में बदलाव
मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत की परिस्थितयों में स्पष्ट बदलाव आया है। साथ ही 2017 की तुलना में तुलना में भारत की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। उस दौरान पहली तीन तिमाहियों (सितंबर तक) में उसकी विदेशी मुद्रा की शुद्ध खरीद जीडीपी के दो प्रतिशत से अधिक थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल के पहले छह महीने के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय पूंजी बाजार से निकासी की। पहले छह महीने में रुपया डॉलर के मुकाबले करीब सात प्रतिशत और वास्तविक आधार पर चार प्रतिशत से अधिक गिर गया है।

 

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निगरानी सूची में नहीं रहेगा भारत 

अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने कहा है कि यदि अगली रिपोर्ट तक भारत का यह रुख बरकरार रहता है तो उसे निगरानी सूची से हटा दिया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का चालू खाते का घाटा लगातार बढ़ रहा है, जिसकी वजह सोना और पेट्रोलियम पदार्थों का ज्यादा आयात शामिल है।

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