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चीन के साथ ट्रेड डेफिसिट से अमेरिका में गईं 20 लाख नौकरियां: व्‍हाइट हाउस

वाशिंगटन. चीन के साथ अमेरिका के भारी-भरकम ट्रेड डेफिसिट के चलते यूएस में करीब 20 लाख नौकरियां चली गईं। व्‍हाइट हाउस ने चीन के खिलाफ राष्‍ट्रपति डोनॉल्‍ड ट्रम्‍प की कार्रवाई का बचाव करते हुए यह बात कही है। ट्रम्‍प ने चीनी वस्‍तुओं के आयात पर 60 अरब डॉलर का शुल्‍क लगा दिया है। यह कदम अमेरिकी बौद्धिक संपदा (इंटेलेक्‍चुअल प्रॉपर्टी) की अनुचित तरीके से जब्‍त करने के खिलाफ उठाया गया है। इस कदम से दुनिया की दोनों बड़ी अर्थव्‍यवस्‍थाओं में पहले चल रही खींचतान और बढ़ सकती है। उधर, चीन ने धमकी दी है कि वह इंपोर्ट के खि‍लाफ उठाए गए डोनाल्ड ट्रंप के कदम के बदले 3 अरब डॉलर की लागत वाले अमेरि‍की गुड्स पर टैरि‍फ लगाएगा। 

 
 
1 अरब डॉलर के ट्रेड डेफिसिट से 6000 जॉब लॉस 
एक सीनियर एडमिनिस्‍ट्रेशन ऑफिशिनल ने बताया कि कुछ कैलकुलेशन के आधार पर प्रत्‍येक एक अरब डॉलर के ट्रेड डेफिसिट से करीब 6000 नौकरियां चली जाती हैं। एक आकलन के आधार पर बहुत सामान्‍य कैलकुलेशन  यह बताता है कि ट्रेड डेफिसिट से चीन में करीब 20 लाख नौकरियां बढ़ीं और अमेरिका में इतनी ही घटीं। यह अमेरिका के लिए एक गंभीर समस्‍या है। चीन के 'अनफेयर' ट्रेड तरीकों के चलते अमेरिका से ट्रेड डेफिसिट 370 अरब डॉलर हो गया है। ट्रम्‍प प्रशासन का कहना है कि अब यह चीन को फैसला करना है कि वह क्‍या कदम उठाता है। 
 
7 महीने की जांच के बाद ट्रम्‍प ने लिया एक्‍शन 
इंटेलेक्‍चुअल प्रॉपर्टी की चोरी के मामले की बीते सात महीने की जांच के बाद ट्रम्‍प ने यूएस ट्रेड रिप्रजेंटेटिव को चीन से आयात पर 60 अरब डॉलर का टैरिफ लागू करने को कहा है। ट्रम्‍प ने कहा कि हमें इंटेलेक्‍चुअल प्रॉपर्टी की चोरी की बहुत बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यह हमें अधिक मजबूत और अधिक संपन्न देश बनाएगा। दूसरी तरफ, चीन ने भी अमेरिका के इस कदम का कड़ा जवाब देने की बात कही है। ट्रम्‍प के फैसले के जवाब में चीन अमेरिका के पोर्क, एल्मुनियम समेत अन्य सामानों पर टैरिफ बढ़ा सकता है। बता दें, इससे पहले भी ट्रम्‍प प्रशासन ने स्टील-एल्यूमीनियम समेत कई अन्य सामानों पर आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला लिया था। 
 
ट्रेड रिलेशन का चीन को ज्‍यादा फायदा 
ट्रम्‍प एडमिनिस्‍ट्रेशन के एक अन्‍य अफसर ने कहा कि अमेरिका-चीन ट्रेड संबंधों का चीन को अधिक फायदा हुआ है। 2001 में चीन वर्ल्‍ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (डब्‍लूटीओ) से जुड़ा, उस वक्‍त से उसकी जीडीपी 1 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर 12 लाख करोड़ डॉलर तक हो चुकी है। करीब 800 फीसदी की ग्रोथ उसकी इकोनॉमी में आई है। दूसरी तरफ, इसी अवधि में अमेरिकी इकोनॉमी में गिरावट रही। 1947 से 2000 के बीच अमेरिकी इकोनॉमी की सालाना ग्रोथ रेट करीब 3.5 फीसदी थी, जो घटकर करीब  2 फीसदी रह गई। इस पर हर कोई यह जानना चाहता है कि अमेरिका के लिए क्‍या है सामान्‍य है।  
 
चीन ने अमेरिकी इंडस्‍ट्री को बर्बाद किया 
सीनेट फाइनेंस  कमिटी के रैंकिंग मेम्‍बर रॉन वायडेन ने ट्रम्‍प प्रशासन के इस फैसले का स्‍वागत किया है। वायडेन का कहना है कि चीन ने धोखा दिया, चोरी की और अमेरिकी इंडस्‍ट्री को बर्बाद किया। वह दशकों से ऐसा कर रहा है। इसके चलते अमेरिका में वर्कर्स, कंपनियों और कम्‍युनिटीज के लिए बड़ा आर्थिक संकट पैदा हुआ। हमारे देश को चीन के ट्रेड ब्‍लैकमेल के खिलाफ निश्चित तौर पर खड़ा होना चाहिए। वायडेन ने कहा, इसलिए मैं अमेरिकी टेक्‍नोलॉजीज को संरक्षित करने के ट्रम्‍प प्रशासन के फैसले का समर्थन करता हूं। चीन सार्वजनिक तौर पर अमेरिकी टेक्‍नोलॉजी को टारगेट करता रहा है। 
 
भारत को भी चेता चुका है अमेरिका 
ट्रम्‍प इस बारे में पहले ही भारत और चीन जैसे देशों को चेता चुके थे। उन्होंने पहले कहा था कि अगर अमेरिकी सामानों पर टैक्स कम नहीं किया गया तो वे भी उतना ही टैक्स लगाएंगे। ट्रम्‍प ने कहा कि अमेरिका दूसरे देशों से आयातित सामानों पर बहुत कम टैक्स लगाता है, लेकिन दूसरे देश हमारे सामानों पर ज्यादा टैक्स लगाते हैं। ट्रम्‍प ने चेतावनी देते हुए कहा था कि दूसरे देश टैक्स कम नहीं करेंगे तो हम भी जवाबी टैक्स लगाएंगे। भारत के साथ हार्ले डेविडसन के मसले पर ट्रम्‍प ने खुलकर विरोध जताया था। 
 

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