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बस एक धक्‍का और, चर्रम चूं हो जाएगी पाकि‍स्‍तान की कमर

पाकि‍स्‍तान की इकोनॉमी एक बड़े गड्ढे के मुहाने पर खड़ी है।

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नई दि‍ल्‍ली। पाकि‍स्‍तान की इकोनॉमी एक बड़े गड्ढे के मुहाने पर खड़ी है। अगर एक धक्‍का और लग गया तो ये बुरी तरह से चरमरा जाएगी। आतंकि‍यों को पनाह और उन्‍हें फंड मुहैया कराने की उसकी दोगली नीति‍ उसे यहां तक लेकर आई है। आज की स्‍थि‍ति‍ ये है कि‍ पाकि‍स्‍तान का नाम लि‍ख दि‍या गया है, दुनि‍या के बड़े देशों के हाथ में पैन है, बस एक दस्‍तखत के बाद पाकि‍स्‍तान को बुरी आर्थि‍क मार पड़ने लगेगी। उसे आखिरी मौके के तौर पर 90 दि‍नों की मोहलत दी गई है। अगर पाकि‍स्‍तान यह साबि‍त कर पाया कि‍ वह आतंकवादि‍यों के खि‍लाफ वाजि‍ब र्कारवाई कर रहा है और उन्‍हें फंड मुहैया नहीं करा रहा है तो वो बच सकता है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो पाकि‍स्‍तान को बहुत कुछ झेलना होगा। आतंकवादी संगठनों को फंडिंग करने के लिए पाकिस्तान को ग्रे सूची (आतंक-वित्तपोषण निगरानी सूची) में रखने का फैसला किया है। एफएटीएफ पेरिस में स्थित है। इसकी स्थापना 1989 में हुई थी।  आगे पढ़ें कैसे पड़ेगी पाकि‍स्‍तान को चोट 

 

क्‍या होगा आगे 


पाकिस्तान को फाइनेंशि‍यल टास्‍क फोर्स (FATF) की ग्रे सूची में रखने का प्रस्ताव अमेरिका की तरफ से पेश किया गया था, जिसका समर्थन ब्रिटेन, फ्रांस और भारत जैसे देशों ने किया। पाकिस्तान का 'सदाबहार' मित्र चीन भी उसका बचाव नहीं कर पाया और बाकी देशों के दबाव के चलते उसने ग्रे सूची में रखने के खिलाफ अपनी आपत्ति वापस ले ली।  अगर पाक का नाम इस सूची में पड़ गया तो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं एवं बैकों को पाकिस्तान में कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा। इसके साथ ही पाकिस्तानी कारोबारियों को भी विदेशो में व्यापार करना आसान नहीं रह जाएगा। पाकि‍स्‍तान के बड़े अखबार डॉन के मुताबि‍क, इस सूची में पाकि‍स्‍तान को डालने का फैसला इस्‍लमाबाद के लि‍ए एक बड़ा धक्‍का होगा।  आगे पढ़ें एक साथ इतनी जगहों से मि‍लेगा झटका

 

पैसों के लि‍ए तरस जाएगा 


ऐसा होने के बाद इंटरनेशनल मोनेटरी फंड, वर्ल्‍ड बैंक, एशि‍यन डेवलपमेंट बैंक सहि‍त मूडी, एसएंडपी और फि‍च पाकि‍स्‍तान की रेटिंग घटा सकते हैं। ये दुनि‍या के बड़ी एजेंसी हैं, जि‍नकी रेटिंग बहुत मायने रखती है, खासकर कारोबार के मामले में। इससे पाकि‍स्‍तान का स्‍टॉक मार्केट नीचे आ सकता है। यही नहीं कमजोर पाक चीन के कर्ज के जाल में और बुरी तरह उलझ जाएगा। वि‍देशी कंपनि‍यों पाकि‍स्‍तान आने से कतराएंगी। इसकी वजह से नि‍वेश और रोजगार दोनों कम होंगे। पाकि‍स्‍तान के लि‍ए बड़ी परि‍योजनाओं के लि‍ए धन जुटाना कठि‍न हो जाएगा। दुनि‍या में पाकि‍स्‍तान की वि‍श्‍वसनीयता और खराब हो जाएगी। 

 

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