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अंबानी को भाई की मदद मिली पर इस कारोबारी ने दिवालिया होने की दहलीज से वापसी कर कमाए करोड़ों रुपए 

फैजल ने दिवालिया कंपनी को बना दिया ब्रांड, पुरुषों के कपड़े बेचती है

Faisal makes a bankrupt company, sells men's clothing

नीरव मोदी या विजय माल्या। दिवालिया होने की कगार पर पहुंचे यह उद्योगपति अब भगोड़े हैं। अनिल अंबानी अपने भाई रिलायंस चेयरमेन मुकेश अंबानी की मदद के बूते जेल जाने से बचे। लेकिन एक कहानी मदुरै के फैजल अहमद की भी है। जरा हटके।  कारोबार शुरू किया तो कुछ ही वक्त बाद दिवालिया होने की कगार पर आ गए।  अपनी इस नाकामयाबी से सीख लेकर उन्होंने महज दो सालों में ही कंपनी को 1.3 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपए तक पहुंचा दिया। आज जानिए उन्हीं की ऐसी कहानी जो विपरीत परिस्थितियों से जूझने का हौसला देती है। 


 

नई दिल्ली. नीरव मोदी या विजय माल्या। दिवालिया होने की कगार पर पहुंचे यह उद्योगपति अब भगोड़े हैं। अनिल अंबानी अपने भाई रिलायंस चेयरमेन मुकेश अंबानी की मदद के बूते जेल जाने से बचे। लेकिन एक कहानी मदुरै के फैजल अहमद की भी है। जरा हटके।  कारोबार शुरू किया तो कुछ ही वक्त बाद दिवालिया होने की कगार पर आ गए।  अपनी इस नाकामयाबी से सीख लेकर उन्होंने महज दो सालों में ही कंपनी को 1.3 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपए तक पहुंचा दिया। आज जानिए उन्हीं की ऐसी कहानी जो विपरीत परिस्थितियों से जूझने का हौसला देती है। 

दूसरे का बिजनेस मॉडल छोड़ अपना मॉडल बनाया तो 5 साल में 35 गुना बढ़ा बिजनेस 

 सक्सस (Suxus) ब्रांड तमिलनाडु में काफी जाना-पहचाना है। यह पुरुषों के कपड़े बेचती है। लेकिन 8 साल पहले फैजल दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गए थे। दरअसल, जब बिजनेस शुरू किया तब उनकी कोई खास स्ट्रैटजी नहीं थी। इसलिए 2011 में दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गए थे। इसी विफलता से उन्हें सीख मिली। लगा कि दूसरे लोगों के सक्सेस मॉडल के आधार पर अपना बिजनेस खड़ा नहीं कर सकते हैं। सफल होने के लिए अपना मॉडल बनाना पड़ेगा। इसका नतीजा भी मिला। 2013 में सक्सस का रेवेन्यू सिर्फ 1.35 करोड़ रुपए था, जो अब 50 करोड़ तक पहुंच गया है। 

'सक्सस' ऐसे सफल हुआ 

पहले बड़ी कंपनियों की तर्ज पर अपने स्टोर खोले। लेकिन बिक्री बहुत कम हुई और कंपनी घाटे में आ गई।  स्टॉक निकालने के लिए 1,000 रुपए में 7 शर्ट बेचने का थोक जैसा ऑफर दिया। यह लोगों को पसंद आया।  आगे बिक्री का यही मॉडल रखा। अपैरल इंडस्ट्री में रिटेल मार्जिन 40-50% होता है। फैजल ने इसे 5-10% रखा। 

पहले सफल हो जाते तो नहीं मिलती इतनी बड़ी कामयाबी

फैजल बताते हैं कि उनके पिता पर काफी कर्ज था। कर्ज उतारने के लिए ही 2006 में 5 लाख रुपए से मेंस अपैरल बिजनेस शुरू करने की सोची। सात सिलाई मशीन लेकर कपड़े बनाने का काम शुरू किया। वे खुद रिटेल दुकानों में कपड़े सप्लाई करता था। कई साल तक बिजनेस 20% की रफ्तार से बढ़ता रहा। लगा कि ग्रोथ बहुत धीमी है। इसलिए 2011 में अपने शोरूम खोलने का फैसला किया। मदुरै, इरोड, सलेम, त्रिची और डिंडीगुल में सक्सस के स्टोर खोले। फैजल का मानना था कि उनसे कपड़े लेकर दुकानदार मुनाफा कमा रहे हैं। क्यों न वे खुद उसी दाम पर ग्राहकों को बेचे जिस दाम पर दुकानदारों को कपड़े देते हैं।  लेकिन यह आइडिया फ्लॉप हो गया। कपड़े बिक नहीं रहे थे। वे एक करोड़ रुपए घाटे में आ गए। सक्सस के 5 स्टोर में से 3 फ्रेंचाइजी थे।  2013 में यह स्टोर बंद करने का फैसला किया। इरोड से मदुरै स्टॉक मंगवाने के बजाय सोचा कि क्यों ना सस्ते दाम पर वहीं बेच दिया जाए।  कपड़ों की सेल लगाई। लेकिन पहले दिन सिर्फ 1,500 रुपए की बिक्री हुई। स्टोर में करीब 6,000 पीस कपड़े थे। तब 1,000 रुपए में 7 शर्ट बेचने का ऑफर दिया। स्टोर मैनेजर से कहा कि व्हाट्सएप पर जो भी कस्टमर डेटाबेस है, सबको इस ऑफर का मैसेज भेजें। अगले ही दिन 3.5 लाख की बिक्री हुई। दूसरे दिन 3 लाख और तीसरे दिन 2 लाख का माल बेचा। बढ़ती डिमांड को देखकर स्टोर मैनेजर ने सप्लाई बढ़ाने के लिए कहा। तब लगा कि क्यों ना पूरे साल बिक्री का यही मॉडल अपनाया जाए।  इरोड में एक शर्ट औसतन 146 रुपए में बेची थी, जबकि खर्च 250 रुपए आया था। आगे नुकसान से बचने के लिए किसी प्लान की जरूरत थी। इसलिए प्रोडक्शन में खर्चे घटाने तरीके निकाले। अपैरल रिटेल इंडस्ट्री में औसत प्रॉफिट मार्जिन 40 से 50% होता है। लेकिन सक्सस में इसे 5-10% रखा। 

यू-ट्यूब पर विज्ञापन में कपड़े बनाने का वास्तविक खर्च बताते हैं 

फैजल बिलबोर्ड या टीवी पर विज्ञापन देने के बजाय यूट्यूब पर वीडियो के जरिए कंपनी का विज्ञापन करते हैं। इसमें भी वह बताते हैं कि कपड़े बनाने पर वास्तव में कितना खर्च आया है। उन्होंने मार्केटिंग का एक और तरीका अपनाया है। यूट्यूब पर ही ग्राहकों के सवालों के जवाब देते हैं। उन्होंने करीब 2 लाख ग्राहकों का डेटाबेस तैयार किया है।  

कोई कर्ज नहीं, 10 साल में 400 से ज्यादा स्टोर खोलने का लक्ष्य 

सक्सेस पर किसी तरह का कर्ज नहीं है। कंपनी का रेवेन्यू 50 करोड़ तक पहुंच गया है। फैजल ने 10 साल में तमिलनाडु और केरल में 400 से ज्यादा स्टोर खोलने का लक्ष्य रखा है। स्थानीय बाजार में उनका ब्रांड इतना मशहूर हो गया है कि कई बार तो भीड़ नियंत्रित करने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी। 

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