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मालदीव ने वीजा बंद किया-भारत ने राशन कम किया, रिश्तों पर नया संकट

दोनों देशों के मीडि‍या ने इन दोनों खबरों और इनके असर को प्रमुखता से प्रकाशि‍त कि‍या।

Tension between Maldives and India escalates

नई दिल्‍ली। चंद दि‍नों पहले खबर आई कि‍ मालदीव भारतीयों को वर्क वीजा नहीं दे रहा है। अब ये खबर है भारत ने मालदीव को आलू-प्‍याज और अंडे जैसी चीजों के निर्यात कोटे में कटौती कर दी है। दोनों देशों के मीडि‍या ने इन दोनों खबरों और इनके असर को प्रमुखता से प्रकाशि‍त कि‍या मगर दोनों ही देशों की सरकारें इससे इनकार कर रही हैं। भलें ही दोनों सरकारों ने ऑफिशियली इन बातों का खंडन किया हैं, लेकिन यह बात क्लीयर हैं दोनों देशों के रिश्तों में नया संकट खड़ा हो रहा है।


खबर नंबर 1 - मालदीव सरकार ने भारतीय कामगारों को बिजनेस वीजा और वर्क परमिट जारी करना बंद कर दिया। मालदीव टाइम्‍स ने एक स्‍थानीय टीवी चैनल के हवाले से यह जानकारी दी है। इसके मुताबिक, पिछले दिनों कुछ भारतीय कामगार छुट्टी पर भारत आए थे, ये लोग अब वापस काम पर नहीं लौट पा रहे हैं। कंपनी के कर्मचारी के मुता‍बिक, वो लोग भारतीय कर्मचारियों का वीजा रीन्‍यू नहीं करवा पा रहे हैं।  


मालदीव की कंपनियों ने अपने विज्ञापन में भी लिखा कि भारतीयों को आवेदन करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उन्हें वहां काम करने का परमिट नहीं मिलेगा। 
भारतीयों के लिए जो बिजनेस वीजा 3 दिन के भीतर जारी हो जाता था, वह अब वह 2 हफ्ते में भी जारी नहीं हो पा रहा है। 2 अन्‍य कंपनियों ने भी बताया कि बिजनेस प्रोजेक्‍ट के लिए जरूरी होने के बाद भी वो अनुभवी भारतीयों पेशेवरों को वीजा प्रोवाइड नहीं करा पा रही हैं। 


मालदीव सरकार का इनकार 
हालांकि मालदीव सरकार के अधिकारियों ने भारतीयों का वीजा रोके जाने की खबरों से इनकार कर दिया है। देश के इमिग्रेशन कंट्रोलर मोहम्‍मद अनवर ने  भारतीयों का बिजनेस वीजा रोके जाने की खबरों को गलत बताया।

 

वीजा पॉलिसी में किसी तरह के बदलाव की बाबत पूछे जाने पर उन्‍होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। मालदीव के विदेश मंत्रालय ने भी भारतीयों का वीजा रोके जाने से इनकार किया। हालांकि मिनिस्‍ट्री की ओर से इस बाबत जो ट्वीट किया गया, उसमें विजनेस वीजा की जगह ट्रैवेल वीजा का जिक्र किया गया। 


खबर नंबर 2 - सरकार ने मालदीव को एक्‍सपोर्ट होने वाले आलू, प्‍याज और अंडे के एक्‍सपोर्ट कोटे में कटौती कर दी है। यह एक नई कैलकुलेशन के आधार पर कि‍या गया है, जि‍समें मालदीव के वास्‍तवि‍क उपभोग का औसत नि‍काला गया है। उदाहरण के तौर पर आलू की एक्‍सपोर्ट लीमि‍ट को 2018-19 में 5308.7 मि‍लि‍यन टन कर दि‍या गया है जबकि‍ 2017-18 में मालदीव को 5,589.78 मि‍लि‍यन टन आलू का एक्‍सपोर्ट हुआ था।

 

इसी तरह से प्‍याज की एक्‍सपोर्ट लिमि‍ट 9,892.03 मि‍लि‍यन टन कर दी गई है, जबकि 2017-18 में मालदीव को 10,259.59 मि‍लि‍यन टन प्‍याज भेजा गया था। वहीं अंडे की एक्‍सपोर्ट लीमि‍ट को करीब आधा कर दि‍या गया है। 
मालदीव टाइम्‍स की रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, इस खबर के बाद वहां के होलसेल कारोबारी दाम बढ़ने को लेकर चिंता में आ गए हैं। हालांकि‍ स्‍टेट ट्रेड ऑर्गनाइजेशन के मैनेजिंग डायरेक्‍टर अहमत शहीर ने कहा कि‍ भारत अकेला देश नहीं है जहां से मालदीव जरूरी चीजें हासि‍ल कर सकता है।

 
मोदी सरकार ने क्‍या कहा
सरकार का कहना है कि मालदीव को जरूरी सामान की आपूर्ति में कटौती कर दी गई यह कहना भ्रामक है। मालदीव की जरूरतों का आकलन अब उसके वास्‍तवि‍क उपभोग के आधार पर कि‍या जा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने रवीश कुमार ने कहा कि भारत यह सुनि‍श्चि‍त करेगा कि वहां के लोगों को कि‍सी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। 


द हिंदू में छपी एक रि‍पोर्ट में विदेश मंत्रालय के एक अधि‍कारी के हवाले से कहा गया है कि पहले मालदीव की ओर से जितनी भी मांग की जाती थी, भारत भरोसा करते हुए उतनी मंजूरी दे देता था। अब उसकी वास्‍ति‍वक खपत के आधार पर कोटा तय कि‍या गया है। संभवत: ये एक राजनीति‍क संदेश है। 


रि‍श्‍तों में आ चुकी है कड़वाहट 
मालदीव में जारी राजनीतिक गतिरोध के चलते हाल के दिनों में भारत और मालदीव के रिश्‍ते पहले जैसे नहीं रहे हैं। मालदीव टाइम्‍स के मुताबिक, भारत सरकार चाहती थी कि मालदीव सरकार 1 फरवरी को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का पालन करे, जिसमें उसने 9 राजनीतिक कैदियों को रिहा करने के साथ साथ  12 विपक्षी सांसदों की बहाली का आदेश दिया था। बता दें‍ कि इस्‍लाम मालदीव का प्रमुख धर्म है। यहां की ज्‍यादातर आबादी मुस्लिम है। राजधानी माले में बनी जुमा मस्जिद दुनिया भर में काफी फेमस है। 

 

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