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सिगरेट पर पाबंदी, लेकिन तंबाकू उगाने वालों को मिलती है सरकारी मदद, फुटबॉल वर्ल्‍डकप फाइनल में पहुंचने वाले क्रोएशिया के अननोन फैक्‍ट

क्रोएशिया के लोग रिकॉड मछलियां पकड़ते हैं, लेकिन उसे बेच देते हैं। इस देश की आबादी भारत के सूरत शहर से कम है...

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नई दिल्‍ली। इंग्‍लैंड को 2-1 से हराकर क्रोएशिया ने फीफा विश्‍वकप फुटबॉल के फाइनल में जगह बना ली है। यहां उनका मुकाबले फ्रांस जैसी बड़ी टीम से होगा। बॉल्टिक सागर के किनारे बसे मात्र 40 लाख की आबादी वाले देश क्रोएशिया के बारे में दुनिया को बेहद कम जानकारी है। खूनी संघर्ष के बाद युगोस्‍लाविया से अलग होकर 1995 में स्‍वतंत्र देश के तौर पर पहचान बनाने वाला यह देश यूरोपीय यूनियन (EU) का हिस्‍सा है।

 

कम आबादी और इकोनॉमी के चलते दुनिया के ज्‍यादातर देशों में इसकी चर्चा कम ही होती है। हालांकि यह देश विरोधाभासों से भरा है। यहां के लोग मछलिया पकड़ने में तो अव्‍वल हैं पर खाने में नहीं। लोग अपने देश से बेहद प्‍यार करते हैं, पर टैक्‍स नहीं देते हैं। नौकरियां होने के बाद भी यहां बेरोजगारी है। अपनी खास डेमोग्राफिक संरचना, एग्रीकल्‍चरल और सर्विस बेस्‍ड इकोनॉमी के चलते यह दुनिया में अपनी एक अलग पहचान रखता है। आइए जानते हैं कोएशिया की इकोनॉमी, कल्‍चर और हिस्‍ट्री से जुड़े कुछ ऐसे ही फैक्‍ट्स के बारे में... 

 

कभी युगोस्‍लाविया का हिस्‍सा था क्रोएशिया 
आज का क्रोएशिया कभी युगोस्‍लाविया का हिस्‍सा हुआ करता था। हालांकि 1991 में यहां गृहयुद्ध छिड़ गया। इसके चलते पूरा यूगोस्‍लाविया 7 टुकड़ों में बंट गया। आधुनिक क्रोएशिया का जन्‍म यहीं से हुआ। 

 

सूरत शहर से भी कम आबादी 
क्रोएशिया अगर भारत का एक शहर होता तो आबादी के मामले में यह देश में 9वें नंबर पर आता। मुंबई, दिल्‍ली, बेंगलूरू, हैदराबाद, अहमदाबाद, चेन्‍नई, कोलकाता, सूरत के बाद इसका नंबर आता। 2011 की जनगणना के मुताबिक, सूरत की आबादी 44 लाख थी। वहीं क्रोएिशिया की कुल आबादी मात्र 40 लाख है।  


GDP में टूरिज्‍म का हिस्‍सा 20 फीसदी
खूबसूरत समुद्र बीच और दर्जनों आइसलैंड होने के चलते क्रो‍एशिया को दुनिया भर से आने वाले टूरिस्‍ट्स से अच्‍छी कमाई होती है। आंकड़ों की मुताबिक, यहां की टोटल GDP में 20 फीसदी हिस्‍सा टूरिज्‍म इंडस्‍ट्री का है। 

 

मछलियां पकड़ने में अव्‍वल पर खाते में नहीं 
क्रोएशिया अपने पारंपरिक फिशिंग कल्‍चर के लिए फेमस है। पर यहां के समुद्र में पकड़ी जाने वाली 90 फीसदी मछलियां खाई नहीं बल्कि ईटली समेत यूरोप के अन्‍य देशों में बेच दी जाती हैं। अन्‍य पड़ोसी देशों के 50 से 60 किलो के मुकाबले क्रोएशिया के लोगों की औसत सालाना सी-फूड खपत मात्र 8.5 किलो है।    


सिगरेट पीने पर बैन, पर तंबाकू उगाने पर मिलती है सब्सिडी 
क्रोएशिया दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां धूम्रपान करना प्रतिबंधित है। यह एक स्‍मोकिंग फ्री कंट्री है। इसके बाद भी यहां की सरकार तंबाकू पैदा करने वाले किसानों को प्रोत्‍साहित करने के लिए हर साल 70 लाख यूरो (करीब 500 करोड़ भारतीय रुपए) सब्सिडी के रूप में दे देती है। 

 

जनता देशभक्‍त पर टैक्‍स देने से बचती है 
2 दशक पहले आजादी मिलने के चलते क्रोएशिया की जनता में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी है। पर टैक्‍स देने के मामले में यह भावना नहीं दिखती। आंकड़ों के मुताबिक, मात्र 40 लाख की आबादी वाले इस देश में करीब 1.5 अरब यूरो (12 हजार करोड़ भारतीय रुपए) टैक्‍स अनपेड है। हालांकि क्रोएशिया ऐसा देश है, नार्वे के बाद जहां के लोगों से सबसे ज्‍यादा टैक्‍स वसूला जाता है। 

 

हवा, धूप और पानी पर्याप्‍त, पर एनर्जी के लिए कोयले और न्‍यूक्लियर पर भरोसा
देश के पास करीब 3600 किमी लंबी नदियां है। साल में करीब 2600 घंटे सूरज चमकता है। यहां के समुद्री किनारों पर हवा की गति यूरोप में सबसे ज्‍यादा रहती है। इसके बाद भी बिजली के लिए कोयला और परमाणु आधारित संयंत्रों का ही यूज किया जाता है।     

 

नौकरियांं  होने के बाद भी बेरोजगारी 
क्रोएशिया में करीब 3 लाख लोग अब भी बेरोजगार हैं। इसके बाद भी यहां नौकारियों से जुड़े विज्ञापनों की आपको भरमार मिलेगी। दरसअल क्रोएशिया का एजुकेश सिस्‍टम पारंपरिक स्‍पेशलाइजेशन बेस्‍ड है। इसके चलते पेशवर कामगारों की संख्‍या बेहद ज्‍यादा हो गई है। यहां इकोनॉमिस्‍ट खाना बनाते हुए, लॉ ग्रेजुएट कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर में काम करते हुए या फिर एक फिलॉसफर आपको आईटी मैनेजर के रूप में काम करना दिखाई पड़ जाएगा। 

 

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