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Tulip garden के लिए यूरोप नहीं भारत की इस जगह की सैर कीजिए, यह है एशिया का सबसे बड़ा गार्डन

कश्मीर वैली में फूलों की खशबू के साथ खुशनुमा मौसम के बीच समर वेकेशन को बना सकते हैं यादगार

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नई दिल्ली. यदि आप गर्मियों की छुट्‌टियों (Summer Vacation)की प्लानिंग कर रहे हैं तो जरा इस जन्नत पर भी नजर दौड़ाइए। हिमालय की बयारों में घुली ट्यलिप फूलों की खुशबू आपको जन्नत में होने का अहसास कराएंगे। आज से कश्मीर वैली में एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन को आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। जानिए कैसे यहां तक पहुंच सकते हैं....

इस बार ट्यूलिप की नई किस्में भी देखने को मिलेंगी...

श्री नगरी की विश्व प्रसिद्ध डल झील के किनारे जबरवान पहाड़ी की तलहटी में आबाद इस ट्यूलिप गार्डन में फूल खिलना शुरू हो गए हैं। 12 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले गार्डन में लोग इस वर्ष साठ से अधिक प्रजातियों के 15 लाख ट्यूलिप का दीदार करेंगे। गार्डन को एक नया लुक भी देने के प्रयास किए गए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक इस गार्डन की तरफ आकर्षित हो सकें।  बागवानी विभाग के निदेशक ने कहा कि इस बार मौसम में बदलाव के कारण ट्यूलिप के पूरे फूल खिलना शुरू हो चुके हैं। कुछ किस्में पूरी तरह से खिल चुकी हैं, जबकि कुछ अगले एक दो दिन तक खिल जाएंगी। तापमान भी बिलकुल अनुकूल है। इस बार फूलों की कुछ और नई किस्में उगाई हैं जिनमें स्टरांग गोल्ड, टूरिजमा, पर्पल फ्लेग आदि है। बीते साल गार्डन में केवल चार टेरिस गार्डन थे, लेकिन इस साल हमने दो और टेरिस गार्डन तैयार किए हैं। गौरतलब है कि बीते दो वर्षों में करीब 10 लाख पर्यटकों ने गार्डन की सैर की थी। 

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महज दस साल पुराना है ट्यूलिप गार्डन 


 
डल झील का इतिहास तो सदियों पुराना है, पर ट्यूलिप गार्डन का मात्र 10  साल पुराना।  इतने कम वक्त में यह उद्यान अपनी पहचान को कश्मीर के साथ यूं जोड़ लेगा कोई सोच भी नहीं सकता था। डल झील के सामने के इलाके में सिराजबाग में बने ट्यूलिप गार्डन में ट्यूलिप की 60 से अधिक किस्में आने-जाने वालों को अपनी ओर आकर्षित किए बिना नहीं रहती हैं। यह आकर्षण ही तो है कि लोग बाग की सैर को रखी गई फीस देने में भी आनाकानी नहीं करते।  सिराजबाग हरवान-शालीमार और निशात चश्माशाही के बीच की जमीन पर करीब 700 कनाल एरिया में फैला हुआ है। यह तीन चरणों का प्रोजेक्ट है जिसके तहत अगले चरण में इसे 1360 और 460 कनाल भूमि और साथ में जोड़ी जानी है। शुरू-शुरू में इसे शिराजी बाग के नाम से पुकारा जाता था। असल में महाराजा के समय उद्यान विभाग के मुखिया के नाम पर ही इसका नामकरण कर दिया गया था, पर अब यह शिराज बाग के स्थान पर ट्यूलिप गार्डन के नाम से अधिक जाना जाने लगा है।

 

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नीदरलैंड से मुकाबला करते हैं यहां के फूल

 

जब्रवान पहाड़ियों की तलहटी में स्थित ट्यूलिप गार्डन में खिलने वाले सफेद, पीले, नीले, लाल और गुलाबी रंग के ट्यूलिप के फूल आज नीदरलैंड में खिलने वाले फूलों का मुकाबला कर रहे हैं। फूल प्रेमियों के लिए ये नीदरलैंड का ही माहौल कश्मीर में इसलिए पैदा करते हैं क्योंकि भारतभर में सिर्फ कश्मीर ही एकमात्र ऐसा स्थान है जहां पर ये अपनी छटा बिखेरते हैं। 

 

 

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कब जाएं? 


इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन हर साल एक महीने (अप्रैल) के लिये खोला जाता है जिसकी तारीख कश्मीर टूरिजम की वेबसाइट से चेक करके ही अपनी ट्रिप प्लान करें। 

 

कैसे पहुंचे? 


श्रीनगर हवाई और सड़क मार्ग से सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। अगर आप रेल से यात्रा करना चाहते हैं तो जम्मू तक रेल सुविधा है, उसके आगे सड़क मार्ग से जाना पड़ेगा। 

 

ट्रैवल टिप्स


हालांकि अप्रैल माह में पूरे देश में काफ़ी गर्मी होने लगती है लेकिन कश्मीर में मौसम सुहावना होता है। बहुत बार बारिश की सम्भावना भी बन जाती है। इसके चलते तापमान बहुत नीचे चला जाता है इसलिए सर्दी के इंतज़ाम से जाएं। और जाने से पहले मौसम का हाल चेक करके ही प्लान बनाएं। 

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