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पैसे के लिए दुनिया के चक्कर काट रहा था सऊदी का प्रिंस, पिता ने ही बिगाड़ दिया प्लान

सऊदी अरब का चेहरा बदलना चाहता था बेटा, पर पिता को था भेद खुलने का डर

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रियाद। सऊदी अरब के शाही परिवार की ओर से अपनी कंपनी ऑयल अरामको का IPO एकाएक रोकने के पीछे के सऊदी अरब के किंग सलमान का हाथ है। सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन-सलमान इस प्रोजेक्ट के जरिए देश की इकोनॉमी का चेहरा बदलना चाहते थे, लेकिन पिता के फैसले के आगे उन्हें मजबूर होना पड़ा है। सऊदी अरब का क्राउन प्रिंस बनने के बाद 32 वर्षीय  मोहम्मद बिन-सलमान को अपने पिता की ओर से सार्वजिनक तौर पर मिला यह पहला झटका माना जा रहा है। सऊदी अरब सरकार ने अपनी कंपनी अरामको के लिए दुनिया का सबसे बड़ा  IP लाने का ऐलान किया था, जिसके माध्यम से उसकी लगभग 100 अरब डॉलर यानी लगभग 7 लाख करोड़ रुपए जुटाने की योजना थी। 

दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ माना जा रहा था 

क्राउन प्रिंस चाहते हैं कि सऊदी निजी निवेश आधारित अर्थव्यवस्था बने। यही कारण है कि उन्होंने अरामको के 5 फीसदी आइपीओ लाने का फैसला किया था। इस आईपीओ को दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ माना जा रहा था। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कहा जा रहा है कि अरमाको का आईपीओ नहीं आना क्राउन प्रिंस की प्रतिष्ठा पर गहरी चोट है।

 

दुनिया भर में काट रहे थे चक्कर
क्राउन प्रिंस मोहम्म्द अपने आई प्लान को सफल बनाना चाहते थे। रामको का आईपीओ उनका ड्रीम प्रोजेक्ट था। सऊदी सरकार अपने इस प्लान को लेकर इतनी उत्साहित थी कि उसके सुल्तान, क्राउन प्रिंस और कई मिनिस्टर चीन सहित दुनिया भर के कई देशों की विजिट कर चुके थे। इसके पीछे उनकी दुनिया भर के बड़े इन्वेस्टर्स से फंड जुटाने की योजना थी, लेकिन उनकी यह योजना धरी की धरी रह गई।  दुनिया भर के मीडिया में ये बात कही जा रही है कि किंग सलमान का यह फैसला थोपने जैसा था। 

 

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दुनिया नहीं जान पाए कमाई का राज
अब राजटर्स की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी राजपरिवार नहीं चाहता है कि अरामको की वित्तीय स्थिति की जानकारी दुनिया को पता चले। दरअसल इस आईपीओ के लिए सऊदी अरब के किंग सलमान ने अरामको के पूर्व प्रमुख के साथ शाही परिवार के अन्य प्रमुख सदस्यों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में अरामको से जुड़े कुछ पूर्व अधिकारियों ने किंग को बताया कि आईपीओ लाने के लिए अरामको के पूरी फाइनेंशियल डीटेल को दुनिया के सामने रखना होगा। शाही परिवार इसके लिए तैयार नहीं था। इसी के बाद किंग सलमान ने आईपीओ वापस लेने का फैसला लिया।  रायटर्स ने 3 सूत्रों से बातचीत के आधार पर यह रिपोर्ट प्रकाशित की है।  

 

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 9/11 का भी भेद खुलने का डर 
बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि पब्लिक लिस्टिंग के लिए निगरानी और कई चीजें सार्वजनिक करने की जरूरत पड़ेगी। इसके साथ ही 9/11 के आतंकवादी हमले में सऊदी से फंडिंग के आरोप का मामला भी आईपीओ को लेकर तूल पकड़ सकता है। सऊदी अरामको शाही परिवार के लिए एक तेल कंपनी से ज्यादा मायने रखती रही है।  इस कंपनी की भूमिका शिक्षा, स्वास्थ्य और कंस्ट्रक्शन में बढ़-चढ़कर रही है. अरामको को पूरी दुनिया सऊदी अरब की बहुमूल्य ऊर्जा कंपनी के रूप में जानती है। 

 

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कितनी बड़ी कंपनी है अरामको 

सऊदी अरामको सऊदी अरब की सरकारी पेट्रोलिमय और नैचुरल गैस कंपनी है। रेवेन्यू के लिहाज से दुनिया के टॉप कंपनियों में शुमार है। इसे द़ुनिया के सबसे ज्यादा प्रॉफिट कमाने वाली कंपनी के रूप में भी शुमार किया जाता है। सऊदी अरामको के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ऑयल रिजर्व है। साथ ही डेली प्रोडक्शन के मामले में भी यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ऑयल कंपनी है। 

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ऑयल से कमाई घटाने की थी योजना
सऊदी अरामको का आईपीओ सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान देश में शुरू की गई रिफॉर्म की मुहिम का हिस्सा है। इसके माध्यम से सरकार की इकोनॉमी की रीस्ट्रक्चरिंग और ऑयल से होने वाली कमाई पर निर्भरता घटाने की योजना है।

 

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5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का था प्लान
वर्ष 2016 में प्रिंस ने लोकल और इंटरनेशनल लिस्टिंग के माध्यम से अरामको की 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना का ऐलान किया था। सऊदी सरकार कंपनी की वैल्यू 2 लाख करोड़ डॉलर या उससे ज्यादा निकलने की उम्मीद कर रही थी। वहीं इस आईपीओ के लगभग 6.7 लाख करोड़ रुपए (या 10 हजार करोड़ डॉलर) का फंड जुटने की उम्मीद थी। हालांकि इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स इस वैल्युएशन पर सवाल खड़े कर रहे थे।

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