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200 गाय देकर रवांडा में कितने कामयाब होंगे मोदी, भेदनी पड़ेगी चीन की दीवार

200 गाय देकर मोदी अभी रवांडा से रिश्‍ते शुरू कर रहेे हैं। जबकि चीन यहां 12 साल में 40,000 करोड़ डॉलर निवेश कर चुका है

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नई दिल्‍ली. 3 अफ्रीकी देशों के दौरे के पहले पड़ाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रवांडा पहुंच चुके हैं। भारतीय मीडिया में सबसे ज्‍यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से रवांडा सरकार को उपहार में दी जाने वाली 200 गायों की हो रही है। मोदी इसके अलावा रवांडा (Rwanda) सरकार को 20 करोड़ डॉलर की अतिरिक्‍त मदद भी देंगे। भारत यहां अपना उच्‍चायोग भी खोलने जा रहा है, ताकि दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्‍तों की शुरुआत हो सके। 

हालांकि मोदी की इस "गाय डिप्‍लोमेसी" का एक दूसरा पहलू भी है। दरअसल रवांडा अब भारत और चीन की होड़ का नया ठिकाना बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के साथ चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग भी रवांडा का दौरा कर रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि दोनों नेताओं का यह पहला रवांडा दौरा होगा। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्‍या 200 गायें उपहार में देकर मोदी रवांडा में चीन को चैलेंज दे पाएंगे। 

 

मोदी और जिनपिंग दोनों पहुंचेंगे रवांडा 
रवांडा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग की भी मेजबानी कर रहा है। स्‍थानीय समय के मुताबिक, जिपिंग मोदी से एक दिन पहले रवांडा पहुंच रहे हैं। जिनपिंग जहां 23 जुलाई को रवांडा से रवाना होंगे, वहीं मोदी 23 को ही रवांडा पहुंच रहे हैं। मोदी और जिनपिंग दोनों की यह पहली रवांडा यात्रा है। दोनों की टाइमिंग एक ही है। ऐसे में माना जा रहा है कि अन्‍य अफ्रीकी देशों की तरह रवांडा में भी भारत और चीन कारोबारी और सामरिक हितों के लिए आपसी होड़ करते दिखाई पड़ेंगे। 

 

भारत से पहले रवांडा में मौजूद है चीन 

भारत भले ही यहां अपना हाई कमीशन खोलने जा रहा हो, लेकिन चीन की रवांडा में पहले से मौजूदगी है। दोनों देशों के बीच 1971 से डिप्‍लोमैटिक रिलेशन हैं। चीन इस समय रवांडा का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। देश में 70 फीसदी सड़कें बनाने का ठेका चीनी कंप‍नियों के पास है। बीते 12 साल के दौरान ज्‍वाइंट वेंचर के तहत चीन रवांडा में 40,000 करोड़ डॉलर का निवेश कर चुका है। रवांडा में चीनी राजदूत का कहना है कि उनके राष्‍ट्रपति का दौरा दोनों देशों के आपसी संबंधों को और गहरा करेगा।   

 

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क्‍या मोदी दे पाएंगे चीन को टक्‍कर 
अंतराष्‍ट्रीय मामलों के जानकार और दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय में असिस्‍टेंट प्रोफेसर प्रशांत त्रिवेदी के मुताबिक, दरअसल रवांडा में चीन पहले से मौजूद है। उसके बाद भी जिनपिंग इस देश का दौरा करने वाले पहले नेता हैं। वह भी उनका दौरा तब हो रहा है, जब पीएम मोदी वहां का दौरा कर रहे हैं। खबर यह भी है कि मोदी जिनपिंग दोनों को एक साथ ब्रिक्‍स की बैठक में हिस्‍सा लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका जाना है। ऐसे में दोनों नेता आपसास के अन्‍य देशों का दौरा करके संबंधों को नया आयाम देना चाह रहे हैं। पर लिस्‍ट में रवांडा एक मात्र कॉमन देश है, जहां दोनों नेता‍ विजिट कर रहे हैं। मोदी यहां से युगांडा जा रहे हैं, वहीं जिनपिंग मॉरिशस। ऐसे में दोनों का रवांडा जाना एक सवाल तो खड़ा की करता है। माना जा सकता है कि चीन को कहीं न कहीं रवांडा में अपनी बढ़त गंवाने का डर है। मोदी और भारत के लिए रवांडा से उम्‍मीद करना जल्‍दबाजी होगी। भारत रवांडा के साथ डिफेंस, डेरी कोऑपरेशन, लेदर, एग्रीकल्‍चर जैसे क्षेत्रों में आने वाले दौर में सहयोग बढ़ाना चाहता है। ऐसे में निश्चित तौर पर भारत के पहुंचने से वहां होड़ तो होगी। 

 

 

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पीएम मोदी ने 200 गाय तोहफे में दी 

मोदी ने रवांडा के राष्‍ट्रपति पॉल कागामे को 200 गाय तोहफे के रूप में दी हैं। प्रधानमंत्री ने रवेरू मॉडल गांव का दौरा किया और यहां रवांडा की ‘गिरिंका’ योजना के लिए इन गायों का दान किया। 'गिरिंका' गरीबी उन्मूलन का रवांडा सरकार का एक अहम कार्यक्रम है। इसका मतलब 'एक गरीब परिवार को एक गाय' है। इसके तहत सरकार हर गरीब परिवार को एक गाय देकर उन्‍हें सामर्थ्‍यवान बनाना चाहती है। रवांडा में यह परंपरा सदियों से है। इसके तहत गाय पाने वाले परिवार को गाय से पैदा होने वाली पहली बछिया को गाय विहीन पड़ोसी को दान देनी पड़ती है। रवांडा की सरकार ने 2006 में इसे राष्‍ट्रीय कार्यक्रम के रूप में अपना लिया। वहां की सरकार का दावा है कि इस योजना के तहत करीब 3.5 लाख परिवारों को फायदा पहुंचाया गया है। इस योजना का मकसद हर परिवार में दूध की कमी दूर करना और बच्चों को कुपोषण से बचाना है। 

 

आगे पढ़ें- भारत देगा 20 करोड़ डॉलर की मदद 

 

 

 

भारत ने दी 20 करोड़ डॉलर की मदद 
 रवांडा को भारत ने औद्योगिक पार्क और कृषि व सिंचाई के लिए  20 करोड़ डॉलर की कुल राशि के 2 लाइन ऑफ क्रेडिट भी दिए। इनमें से 10 करोड़ डॉलर इंडस्ट्रियल पार्क और स्‍पेशल इकोनॉमिक जोन के डेवलपमेंट के लिए होंगे। वहीं बाकी के 10 करोड़ डॉलर खेती और सिंचाई से जुड़ी परियोजाओं के लिए होंगे। सरकार रवांडा के साथ डिफेंस, डेरी कोऑपरेशन, लेदर, एग्रीकल्‍चर और कल्‍चर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहती है। पिछले साल भारत ने रवांडा के साथ स्‍ट्रैटेजिक पैक्‍ट भी किया था। 

 

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लगातार सात फीसदी पर है विकास दर
अपनी विकास दर के चलते रवांडा अफ्रीका में अलग अहमियत रखता है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि इस देश ने पिछले डेढ़ दशक में जितनी प्रगति की है, वैसा उदाहरण अफ्रीका में मिलना मुश्किल है। इसकी आर्थिक विकास दर लगातार 7 फीसदी से ज्यादा रही है। समाज में अपराध और भ्रष्टाचार को कम करने में इसकी सफलता को अब दूसरे देश अपनाने लगे हैं।   

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