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SCO को व्‍यापारि‍क सहयोग बढ़ाने का मंच बनाएंगे मोदी, चीन से होगी तरक्‍की की बात

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनि‍‍‍‍‍वार को चीन पहुंच गए।

Modi in china: will focus on Trade and investment

नई दि‍ल्‍ली। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनि‍‍‍‍‍वार को चीन पहुंच गए। शंघाई सहयोग संगठन की बैठक चीन के क्विंगदाओ (Qingdao) शहर में आयोजि‍त होनी है। बीते कुछ दि‍नों में मोदी की यह दूसरी चीन यात्रा है। इससे पहले वह 27-28 अप्रैल को चीन के वुहान शहर गए थे। जहां उन्होंने चीनी राष्‍ट्रपति‍ जिनपिंग से अनौपचारिक मुलाकात की थी। 


ट्रेड और इनवेस्‍टमेंट होगा मोदी का फोकस


आधि‍कारि‍क सूत्रों का कहना है कि‍ अन्‍य मुद्दों के साथ भारत का फोकस स्‍थानीय कनेक्‍टि‍वि‍टी, व्‍यापार वि‍कास और नि‍वेश पर होगा ताकि‍ एसएसीओ मुल्‍कों के बीच व्‍यापार संबंध और मजबूत हों। भारत मध्‍य एशि‍याई देशों तक पहुंच बनाने के लि‍ए चाहबार और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरि‍डोर के वि‍कास पर जोर दे रहा है। उम्‍मीद है कि‍ मोदी अन्‍य एससीओ देशों के नेताओं से करीब 6 अलग अलग मुलाकात करेंगे। हालांकि‍ अभी तक इसकी पुष्‍टि‍ नहीं हो पाई है कि‍ क्या वह पाकि‍स्‍तान के राष्‍ट्रपति‍ हुसैन से भी मि‍लेंगे। 


दूरियां कम करने की कोशिश 


चीन में भारत के राजदूत गौतम बम्बावाले ने बुधवार को चीन की सरकारी मीडिया संस्था सीसीटीवी न्यूज को इंटरव्यू दिया था। इसमें उन्‍होंने कहा था कि‍ मोदी-जिनपिंग इस मीटिंग के जरिए दोनों देशों के रिश्तों में दूरियां कम करने की कोशिश करेंगे। ताकि दोनों देश साथ-साथ अपनी तरक्की और खुशहाली के लिए काम कर सकें। बता दें कि‍ भारत एससीओ में पिछले साल ही स्थाई सदस्य के रूप में शामिल हुआ है।


 परमाणु समझौता बचाने की कोशिश हो सकती है 


 एससीओ में इस साल पर्यवेक्षक देश (ऑब्जर्वर स्टेट) के तौर पर ईरान भी हिस्सा लेगा। अमेरिका की तरफ से परमा‌णु समझौता रद्द किए जाने के बाद ईरान पहली बार किसी समिट में हिस्सा ले रहा है। इसमें ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी पहुंचेंगे। माना जा रहा है कि ईरान के साथ रूस और चीन परमाणु समझौते को बचाने की कोशिश में जुटेंगे।

 

भारत भी ईरान का एक बड़ा सहयोगी रहा है। ऐसे में इस समिट की अहमियत और बढ़ गई है। चीनी अखबार रूस, चीन और भारत की जुगलबंदी को एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए लगातार अहम बताते रहे हैं।


8 देश हैं सदस्‍य 


सीएसओ का गठन 2001 में शंघाई में रूस, चीन, किरगि‍स रि‍पब्‍लि‍क, कजाकि‍स्‍तान, तजाकि‍स्‍तान और उजबेकि‍स्‍तान ने की थी। बीते वर्ष ही भारत और पाकि‍स्‍तान इसके सदस्‍य बने। एससीओ में इस समय 8 सदस्‍य देश हैं जो दुनि‍या की करीब 42 फीसदी आबादी का नेतृत्‍व करते हैं और दुनि‍या की कुल जीडीपी में इनका शेयर 20 फीसदी है। 

 

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