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जिनपिंग से मुलाकात कर भारत लौटे पीएम मोदी, उठाया ट्रेड बैलेंस का मुद्दा

नई दिल्‍ली। चीन के वुहान शहर में अनौपचारिक बैठक के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर भारत वापस लौट गए हैं। इससे पहल मुलाकात में मोदी ने जिनपिंग के सामने ट्रेड बैलेंस का मुद्दा उठाया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच 4 दौर की बातचीत हुई। दोनों नेताओं के बीच वार्ता की शुरुआत ईस्ट लेक के किनारे वॉक के साथ हुई। इस दौरान दोनों नेताओं में कुछ गुफ्तगू भी हुई है। इसके बाद दोनों नेताओं ने नौका विहार भी किया। इसके बाद हुई बातचीत में आपसी सहयोग के मुद्दों समेत ग्‍लोबल रीजनल  और द्विपक्षीय संबंधों पर बात हुई। बता दें कि इससे पहले वार्ता के पहले दिन मोदी और जिनपिंग के बीच 3 दौर की वार्ता हुई थी।   

 

 

आज  हुई वार्ता के बाद विदेश मंत्रालय यानी MEA ने बताया कि मोदी-जिनपिंग मुलाकात में अंतरराष्ट्रीय महत्व के द्विपक्षीय संबंधों पर किसी तरह का समझौता नहीं हुआ है, पर चर्चा जरूर हुई है। इसके अलावा आतंकवाद पर दोनों देश एक सुर में बोले हैं और इसकी आलोचना की गई है। दोनों देश पीपुल-टू-पीपुल संबंधों को मजबूत बनाने की कोशिश करेंगे। बातचीत के दौरान ट्रेड का मुद्दा भी उठा। MEA के मुताबिक, ट्रेड बैलेंस को लेकर दोनों देशों में बातचीत हुई है। बता दें कि दोनों देशों का कारोबार पिछले साल 84 अरब डॉलर पहुंचा था। हालांकि इसमें भारत का करोबारी घाटा करीब 51 अरब डॉलर रहा है। 

 

बॉर्डर पर शांति को लेकर भी बात 
इसके साथ ही दोनों देशों के बीच बॉर्डर पर शांति बनाए रखने पर बातचीत भी हुई है। विदेश सचिव विजय गोखले के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सीमावर्ती इलाकों में शांति बनाए रखने को लेकर भी बात हुई। मोदी जिनपिंग के बीच बीच कारोबार, पर्यटन, संस्कृति, ग्लोबल वॉर्मिंग, द्विपक्षीय संबंधों, रणनीतिक और दीर्घकालिक साझेदारी को लेकर चर्चा हुई। भारतीय विदेश सचिव ने बताया कि दोनों देशों के नेताओं के बीच चार दौर की बातचीत हुई भारतीय विदेश सचिव ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं की बातचीत से इनके रिश्तों में मजबूती आएगी। 

 

मोदी ने कहा- पंचशील के नए सिद्वांत से विश्व में शांति आएगी
शुक्रवार को डेलिगेशन बातचीत के दौरान मोदी ने चीन के सामने 21वीं सदी के पंचशील की नई व्याख्या पेश की। उन्होंने कहा- "अगर हम समान विजन, मजबूत रिश्ते, साझा संकल्प, बेहतर संवाद और समान सोच के पांच सिद्धांतों वाले पंचशील के इस रास्ते पर चलें तो इससे विश्वशांति, स्थिरता और समृद्धि आयेगी। इस पर शी जिनपिंग ने कहा कि उनका देश मोदी के बताए पंचशील के इन नए सिद्धांतों से प्रेरणा लेकर भारत के साथ सहयोग एवं काम करने को तैयार है।

- बता दें कि इससे पहले चीन और भारत के बीच पंचशील समझौते को लेकर 31 दिसंबर 1953 और 29 अप्रैल 1954 को बैठकें हुई थीं, जिसके बाद बीजिंग में इस पर हस्ताक्षर हुए थे। ये सिद्वांत हैं: 1. एक दूसरे की अखंडता और संप्रभुता का सम्मान, 2. परस्पर आक्रमकता से बचना , 3. एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना, 4. समान और परस्पर लाभकारी संबंध, 5. शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व

 

मोदी ने जताया जिनपिंग का शुक्रिया
- मोदी ने कहा कि भारत के लोग वास्तव में बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं कि मैं पहला ऐसा भारतीय प्रधानमंत्री हूं, जिसकी अगवानी के लिए आप (शी जिनपिंग) दो बार राजधानी से बाहर आए।
- "मुझे खुशी है कि इस समिट को आपने काफी महत्व दिया। ये इन्फॉर्मल समिट हमारी रेग्युलर व्यवस्था को विकसित करे। मुझे खुशी होगी कि 2019 में ऐसी ही एक अनौपचारिक समिट करने का हमें मौका मिले।"

 

मुख्यमंत्री रहने के दौरान बांधों के बारे में सुना था
- शी जिनपिंग ने भारतीय प्रधानमंत्री से अनौपचारिक बातचीत के लिए पहली बार प्रोटोकॉल तोड़ा। मोदी ने कहा- "जब मैं गुजरात का सीएम था, तब इन बांधों के बारे में सुना था। आपने जिस पैमाने पर और जिस तेजी के साथ इन्हें बनाया है, इसने मुझे प्रभावित किया। यही वजह है कि मैं स्टडी टूर पर आया हूं और एक दिन डैम पर बिताने का फैसला लिया।
- "भारत और चीन दोनों की संस्कृतियों का संबंध नदियों से हैं। यदि हम हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की प्राचीन सभ्यता की बात करें तो ये नदियों के किनारे पर ही बसी थीं।"

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