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मोदी ने बताया अरब देशों की दादागीरी कम करने का फॉर्मूला, भारत के बचेंगे 12 हजार करोड़

अगले 3 साल में एथेनॉल प्रोडक्‍शन बढ़ाकर भारत अपने 12000 करोड़ रुपए बचाएगा...

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नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi पेट्रोलियम के क्षेत्र में अरब देशों की दादागीरी कम करने और तेल के लिए भारत की उन पर निर्भता घटाने का खास फॉर्मूला बताया है। मोदी ने बायोफ्यूल यानी एथेनॉल के प्रोडक्‍शन पर जोर दिया है। मोदी ने एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (ethanol blending programme) को गंभीरता से नहीं लेने के लिए पुरानी सरकारों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अब अगले चार साल मे इसका प्रोडक्शन तीन गुना बढ़कर 450 करोड़ लीटर हो जाएगा। इससे इम्पोर्ट में खर्च होने वाले 12,000 करोड़ रुपए की बचत होगी। पीएम मोदी ने वर्ल्ड बायोफ्यूल डे (World Biofuel Day) के मौके पर हुए एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

 

पेट्रोलियम इम्‍पोर्ट में है अरब देशों पर डिपेंड है भारत 
भारत के पेट्रोलियम इम्‍पोर्ट में टॉप 3 पर रहने वाले देशों में अरब देशों का ही दबदबा है। भारत पारंपरिक तौर पर सऊदी अरब, इराक और ईरान से सबसे ज्‍यादा पेट्रोलियम इम्‍पोर्ट करता है। इसके अलावा यूएई भी भारत को पेट्रोलियम बेचने वाले प्रमुख अरब देशों में शामिल है। नाइजीरिया और वेनेजुएला मात्र 2 ऐसे गैर अरब देश हैं, जिनसे भारत बड़े पैमाने पर पेट्रोलियम इम्‍पोर्ट करता है। वित्‍त वर्ष 2017-18 के आंकड़ों के मुताबिक, 4.57 करोड़ टन के साथ भारत को पेट्रोलियम एक्‍सपोर्ट करने के मामले में सऊदी अरब पहले नंबर पर था। 3.61 करोड़ टन के साथ इराक दूसरे और 2.25 करोड़ टन के साथ ईरान तीसरे नंबर पर था। इसके बाद वेनेजुएला और नाइजीरिया का नंबर आता है। इन दोनों देशों से भारत ने क्रमश: 1.83 और 1.81 करोड़ टन पेट्रोलियम का इम्‍पोर्ट किया। 

 

 

पिछली सरकारों ने गंभीरता से नहीं लिया एथेनॉल प्रोग्राम

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वाजपेयी सरकार के दौरान एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम की शुरुआत की गई थी। लेकिन पिछली सरकारों ने इस प्रोग्राम को गंभीरता से नहीं लिया था। अब हम अगले साल में 450 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन करेंगे। नतीजतन इंपोर्ट के मद में देश के 12,000 करोड़ रुपए की बचत होगी।’ भारत अपनी 80 फीसदी तेल की जरूरतों को इंपोर्ट के माध्यम से पूरा करता है।

 

 

प्रोग्राम ने जोर पकड़ा बचेंगे 1.85 लाख करोड़ रुपए 
पेट्रोलियम पदार्थों में भारत में फिलहाल 5 फीसदी एथेनॉल मिलाया जाता है। सरकार ने आने वाले कुछ समय में इसे बढ़ाकर 10 फीसदी और बाद में 20 फीसदी के लेवल पर ले जाने का लक्ष्‍य तय किया है। दूसरे देशों की बात करें तो अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों में पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट में 30 फीसदी तक एथेनॉल मिलाया जाता है। अगर भारत भी प्रोडक्‍शन को बढ़ाकर पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट में एथेनॉल की मात्रा 30 फीसदी तक ले जाता है तो सीधे तौर पर उसके ऑयल इम्‍पोर्ट बिल में 30 फीसदी की कमी आएगी। पिछले साल भारत का कुल पेट्रोलियम बिल करीब 90 अरब डॉलर (6.19 लाख करोड़ रुपए) रहा था। इस हिसाब से अगर भारत इस बिल में एथेनॉल प्रोडक्‍शन के जरिए 30 फीसदी की कमी लाता है तो सरकारी खजाने के करीब 1.85 लाख करोड़ लाख करोड़ रुपए बच सकते हैं। 

 

 

 

12 बायोफ्यूल रिफाइनरियों की स्थापना पर 10,000 करोड़ का होगा निवेश
भारत क्रूड इंपोर्ट बिल को घटाने के लिए रिन्युएबल स्रोतों के साथ ही बिजली के इस्तेमाल के अलावा बायोफ्यूल्स को प्रोत्साहन देने पर काम कर रहा है। मोदी ने कहा कि देश में 10,000 करोड़ रुपए के निवेश से 12 बायोफ्यूल रिफाइनरियों की स्थापना की योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा कि सरकार 2022 तक पेट्रोल में 10 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग के स्तर को हासिल कर लेगी और 2030 तक इसे दोगुना करने का लक्ष्य है।

175 बायो-सीएनजी प्लांट्स की हुई स्थापना
मोदी ने कहा कि एक रिफाइनरी से 1,000-1,500 लोगों के लिए नए रोजगार पैदा होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि बायोफ्यूल्स का इस्तेमाल बढ़ने से किसानों की इनकम बढ़ेगी और देश में नए रोजगार पैदा होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि देश में 175 बायो-सीएनजी प्लांट्स की स्थापना भी की गई है और उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही लोग एनर्जी के इस सोर्स से वाहन चलाते नजर आएंगे।

 

 

न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने पर सरकार की तारीफ
उन्होंने किसानों की इनकम बढ़ाने के लिए 14 खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य कॉस्ट की तुलना में डेढ़ गुना करने की दिशा में सरकार के प्रयासों की तारीफ की। इस अवसर पर उन्होंने प्रोजेट्क्स के लिए ली जाने वाली एन्वायर्नमेंट क्लीयरैंस में तेजी के लिए एक वेब पोर्टल ‘परिवेश’ भी लॉन्च किया और नेशनल बायोफ्यूल पॉलिसी, 2018 का अनावरण भी किया।

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