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मोदी और जिनपिंग के बीच 2 घंटे तक चली मुलाकात, पीएम ने कहा - शुक्रिया

वुहान/नई दि‍ल्‍ली... चीन दौरे के पहले यहां नरेंद मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच तीन बार मुलाकात हुई। पहली मुलाकात हुबई म्यूजियम में हुई। यहां जिनपिंग प्रोटोकॉल तोड़कर पहली बार किसी देश के नेता से मिले। दोनों नेताओं ने करीब 30 सेकंड तक गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया। बाद में करीब एक घंटा म्यूजियम में बिताया। इसके बाद डेलिगेशन स्तर की बातचीत भी हुई। एजेंसी के मुताबिक, यह बातचीत 30 मिनट तय की गई थी, लेकिन

करीब 2 घंटे तक चली। बाद में मोदी ने कहा- मैं पहला पहला भारतीय पीएम हूं, जिसके स्वागत के लिए जिनपिंग दो बार राजधानी से बाहर आए। बता दें कि मोदी का चार साल में यह चौथा चीन दौरा है। दोनों नेताओं के बीच 6 मुलाकातें होनी है।

 

मोदी ने जताया जिनपिंग का शुक्रिया
- मोदी ने कहा कि भारत के लोग वास्तव में बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं कि मैं पहला ऐसा भारतीय प्रधानमंत्री हूं, जिसकी अगवानी के लिए आप (शी जिनपिंग) दो बार राजधानी से बाहर आए।
- "मुझे खुशी है कि इस समिट को आपने काफी महत्व दिया। ये इन्फॉर्मल समिट हमारी रेग्युलर व्यवस्था को विकसित करे। मुझे खुशी होगी कि 2019 में ऐसी ही एक अनौपचारिक समिट करने का हमें मौका मिले।"
- "विश्व की 40 फीसदी जनसंख्या के लिए काम करना चीन और भारत की जिम्मेदारी है। इसका मतलब है कि हम विश्व की बहुत सारी समस्याओं से छुटकारा पा लेंगे। हम साथ मिलकर हमारे लिए बड़ी संभावनाओं के लिए काम करेंगे।"
- "इस अनौपचारिक समिट के जरिए बेहद सकारात्मक माहौल बनाया गया और आपने (जिनपिंग) ने व्यक्तिगत तौर पर इस में बड़ा और अहम योगदान दिया। भारत और चीन पिछले 2000 साल में से 1600 साल से वैश्विक आर्थिक विकास के दो इंजिन की तरह काम कर रहे हैं।"

 

 

पीएम मोदी से प्रोटोकॉल तोड़कर मिले जिनपिंग

 

चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग ने प्रोटोकॉल तोड़कर पीएम मोदी का स्‍वागत किया। उन्‍होंने मोदी से कहा कि वसंत में हो रही यह मुलाकात बेहद खास है क्‍योंकि वसंत को पवित्र माना जाता है। 

 

वहीं पीएम मोदी ने जिनपिंग से कहा, 'गर्मजोशी के साथ मेरा स्‍वागत करने के लिए शुक्रिया। चीन के काम ने मुझे बेहद प्रभावित किया है। बिजली के क्षेत्र में चीन का काम अनोखा है। मैं वुहान पहली बार आया हूं लेकिन ऐसा मौका पहले भी मिला है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि चीन और भारत की सभ्‍यता नदी किनारे विकसित हुई है।' 

 

ये सिर्फ अनौपचारिक बातचीत नहीं बल्कि ऐति‍हासिक पल

अनौपचारिक शिखर वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने सबसे पहले चीन को शानदार स्‍वागत के लिए धन्‍यवाद दिया। उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रपति जिनपिंग ने राजधानी के बाहर दो बार मेरा स्‍वागत किया। इसके लिए शुक्रिया। ये सिर्फ अनौपचारिक बातचीत नहीं बल्कि ऐति‍हासिक पल है। अनौपचारिक बातचीत के लिए जिनपिंग ने अच्‍छा माहौल बनाया। मैं और जिनपिंग दुनिया की 40 फीसदी आबादी के चेहरे हैं। 40 फीसदी आबादी का भला मतलब दुनिया को संकट से निकालना। 

 

दोनों देशों के 5 तत्‍व दुनिया को बनाएंगे बेहतर 

हमारे बीच का विश्‍वास दुनिया के लिए नई शक्ति बनेगा। दोनों देशों का विश्‍वास धीरे-धीरे लोगों के बीच बढ़ेगा। दोनों देशों के 5 तत्‍व संपर्क, सोच, सहयोग, संकल्‍प और सपने ये दुनिया को बेहतर बनाएंगे।इसके साथ ही मोदी ने जिनपिंग को अनौपचारिक बातचीत के लिए भारत आने का न्‍यौता भी दिया। 

 

तनाव दूर होगा 
मोदी और जि‍नपिंग की मुलाकात के दौरान दोनों ओर का प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहेगा। दोनों नेता शनिवार को ईस्ट लेक जाएंगे और नौका की सवारी करेंगे। इस दौरान ईस्ट लेक गेस्ट हाउस में चर्चा भी होगी। भारत और चीन द्विपक्षीय संबंधों में आए तनाव को दूर करने की भरसक कोशिश करेंगे। एशिया के दो दिग्गज देशों के बीच आपसी अविश्वास का इतिहास रहा है। दोनों देशों के बीच 2017 में डोकलाम विवाद को लेकर स्थिति और तनावग्रस्त हो गई थी। लेकिन मोदी और शी जिनपिंग की यह बैठक आपसी संबंधों को नए सिरे से शुरू करने की एक कोशिश है।


दोनों मुल्‍कों को है एक-दूसरे की जरूरत 
चीन मामलों के जानकार और जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर संजय भारद्वाज के मुताबिक, ऐसा नहीं हो सकता है कि भारत चीन के साथ और चीन भारत के साथ लंबे समय तक मुंह मोड़ ले या आपने संबंधों को खत्‍म कर ले। इकोनॉमी, कॉमर्स, डिप्‍लोमेसी समेत मौजूदा समय में ऐसे बहुत से मसले हैं, जहां भारत को चीन की और चीन को भारत की जरूरत है। 


कई आर्थिक मंचों पर दोनों देश साथ काम कर रहे हैं। ऐसे में विरोध के समय दोनों देश अपनी अपनी चालें चलेंगे, लेकिन इसके बाद भी साथ-साथ काम करना पड़ेगा। भारद्वाज के मुताबिक, दोनों की अपनी आर्थिक जरूरत और जियो पॉलिटिकल मजबूरियां हैं। आइए इसी की पड़ताल करते हैं। 

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