Home » Economy » InternationalFrance fuel protests on the rise, protesters vandalized national monuments

महंगाई के कारण दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था फ्रांस में तबाही का मंजर

देश में बन रहे हैं गृह युद्ध जैसे हालात

1 of

नई दिल्ली.

दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था फ्रांस में तबाही का मंजर थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां पर पेट्रोल और डीजल की कीमत पर टैक्स लगने से जो महंगाई बढ़ी है, उसके विरोध प्रदर्शन में जनता सड़कों पर उतर आई है। पिछले कई दिनों से वहां जो हिंसक विरोध प्रदर्शन चल रहा है वह एक दशक का सबसे भयावह प्रदर्शन है। इस प्रदर्शन में पुलिस आैर उपद्रवियों के बीच हुई झड़प में अब तक 133 लोग घायल हुए हैं। इसमें पुलिस के 23 जवान भी शामिल हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों रविवार को अर्जेंटीना में चल रही G20 समिट से लौटे। वहां से आने के बाद उन्होंने पेरिस में उपद्रव का जायजा लिया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।

 

पेरिस की सड़कों पर फैली तबाही

महंगाई बढ़ने से गुस्साए लोगों ने फ्रांस की राजधानी पेरिस की सड़कों पर उतरकर कारों में आग लगा दी, स्टाेर्स की खिड़कियां तोड़कर उन्हें लूट लिया। वहां 17 नवंबर से पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच ऐसी झड़प चल रही है। इस झड़प में 8000 से ज्यादा प्रद्रर्शनकारी और 5000 पुलिसवाले आपस में भिड़ चुके हैं। अब तक पुलिस ने 400 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। इन प्रदर्शनकारियों ने अपने समूह को Yellow Vest नाम दिया है।

 

क्यों गुस्साए हैं लोग

फ्रांस में कार्बन उत्सर्जन घटाने और लोगों को environment friendly वाहनों का इस्तेमाल करने को प्रेरित करने के लिए पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी वृद्धि की गई है। ईंधनों पर लगे इस टैक्स काे 2017 में स्वीकृति दी गई थी। टैक्स बढ़ने से डीजल के प्रति लीटर दाम में 7.6 फीसदी और पेट्रोल के प्रति लीटर दाम में 3.9 फीसद वृद्धि हुई। इसके बाद अक्टूबर में तेल के दाम बढ़ने से पेट्रोल और डीजल के दामों में और इजाफा हो गया। लोगाें का मानना है कि मैक्रों अमीर परिवार से आते हैं आैर उन्हें आम जनता की तकलीफों से कोई हमदर्दी नहीं है।

 

आगे पढ़ें- लोगों ने खाक कर दी कई इमारतें

 

 

नहीं बख्शी फ्रांस की ऐतिहासिक धरोहरें

प्रदर्शनकारियों ने पेरिस में सड़कों पर गाड़ियों और सार्वजनिक संपत्ति को तो नुकसान पहुंचाया ही हैकई इमारतों में आगे भी लगा दी। छह इमारतें तो जलकर खाक हो गईं। इसके साथ ही लोगों ने देश की ऐतिहासिक धरोहरों को भी नहीं बख्शा। पेरिस स्थित शहीद स्मारक आर्क डि ट्रिंफ (Arc de Triomphe) में बने स्टैच्यू ऑफ मैरिएन को भी ध्वस्त कर दिया। मैरिएन को फ्रांस में काफी ऊंचा दर्जा दिया जाता है। इस स्टैच्यू का चित्र यहां स्टैम्प्स पर भी देखा जा सकता है। लोगों ने इस स्टैच्यू के आसपास दीवारों पर लोगों ने लिखा कि मैक्रों इस्तीफा दो।

 

आगे पढ़ें- सख्त रवैया अपनाने को तैयार हैं मैक्रों

 

 

झुकने को तैयार नहीं हैं फ्रांसीसी राष्ट्रपति

इमैनुअल मैक्रों ने कहा है कि वे पेट्रोल-डीजल के बढ़े हुए दामों को वापस नहीं लेंगे। साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारियों के सामने झुकने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए ये कदम उठाए जाने जरूरी थे। फिलहाल इमैनुअल मैक्रों अपने मंत्रिमंडल से चर्चा कर रहे हैं कि इस हिंसक प्रदर्शन को कैसे रोका जाए। इसके लिए वे लोगों के साथ सख्ती से पेश आने को भी तैयार हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट