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Home » Economy » InternationalPak said on 5000 year old temple- not positive environment yet

पाक का छल: शारदा मंदिर कॉरिडोर खोलने पर मारी पलटी

5 हजार साल पुराने मंदिर पर पाक ने कहा- अभी सकारात्मक माहौल नहीं 

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नई दिल्ली. पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित हिंदुओं के बड़े तीर्थ स्थल शारदा मंदिर कॉरिडोर पर पाकिस्तान पर फिर पलटी मारी है।  पाकिस्तान का कहना है कि उसके कब्जे वाले कश्मीर (POK) में भारत के हिंदू श्रद्धालुओं के लिए शारदा मंदिर कॉरिडोर खोलने पर अभी कोई फैसला नहीं किया गया है। उसने कहा है कि ऐसे कदम उठाने के लिए ''सकारात्मक माहौल'' होना चाहिए। शारदा मंदिर पर्यटन के लिहाज से भी अहम है और इससे दोनों देशों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलता। यह भी तब जबकि पाकिस्तान करतारपुर कारिडोर खोल रहा है। 


पहले कहा था, करतापुर की तरह कॉरिडोर बनाएंगे

इसी हफ्ते पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर में कहा गया था कि पाकिस्तानी सरकार ने एक कॉरिडोर बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे भारत के हिंदू श्रद्धालुओं को प्राचीन हिंदू मंदिर और सांस्कृतिक स्थल तक जाने का मौका मिलेगा। लेकिन गुरुवार को एक संवाददाता सम्मेलन में विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने इस खबर को खारिज करते हुए कहा कि उनकी मेरी जानकारी के मुताबिक अभी शारदा मंदिर कॉरिडोर खोलने पर कोई फैसला नहीं लिया गया.''

असेंबली के हिंदु सदस्य ने की थी पैरवी 

एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपनी खबर में पाकिस्तान तहरीक के इंसाफ के, नेशनल असेंबली सदस्य रमेश कुमार के हवाले से कहा था कि पाकिस्तान ने शारदा मंदिर खोलने का फैसला किया है। मौजूदा वर्ष से परियोजनाओं पर काम शुरू हो जाएगा जिसके बाद पाकिस्तान में हिंदू भी इस स्थल का दौरा कर सकेंगे। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कश्मीरी पंडितों की शारदा पीठ का दौरा करने की मांग पर विचार करने के लिए कहा था।

सम्राट अशोक के वक्त बना था पीठ 

गौरतलब है कि  237 ईसा पूर्व, सम्राट अशोक के शासनकाल के दौरान स्थापित शारदा पीठ करीब 5,000 साल पुराना मंदिर है। यह मंदिर कश्मीरी पंडितों के तीन प्रसिद्ध पवित्र स्थलों में से एक है। उनके दो अन्य पवित्र स्थल अमरनाथ मंदिर और अनंतनाग स्थित मार्तंड सूर्य मंदिर हैं। कश्मीर पंडितों के संगठन बरसों से शारदा पीठ कॉरिडोर खोले जाने की मांग कर रहे हैं।

 

कश्मीरी पंडित मानते हैं अपनी कुलदेवी

 

मां शारदा को कश्मीरी पंडित अपनी कुलदेवी मानते हैं। उन्हें कश्मीर पुरावासिनी (कश्मीर में बसने वाली) भी कहा जाता है। शारदा पीठ कभी वैदिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा था और इसकी तुलना नालंदा-तक्षशिला जैसे शिक्षा केंद्रों से की जाती थी। 1947 में भारत के विभाजन के बाद से यह मंदिर निर्जन इलाके में तब्दील हो गया। श्रद्धालुओं की कमी के बावजूद शारदा मंदिर आज भी वैसे ही खड़ा है।

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