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भारत की अठन्‍नी के बराबर रह गया पाकिस्‍तानी रुपया

पाक रुपया 118 के लेवल पर, इसे भारतीय रुपए के हिसाब से देखें को 1 पाकिस्‍तानी रुपया भारत के 50 पैसे के बराबर पहुंच गया है

Pakistani Rupees versus Indian rupees

नई दिल्‍ली। पाकिस्‍तान में जारी आर्थिक संकट अब नासूर बनता जा रहा है। देश की गिरती आर्थिक सेहत के चलते पाकिस्‍तानी रुपया भी नहीं बच पाया है। इसके चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक पाकिस्‍तानी रुपए की कीमत 118.7 केे लेवल पर  पहुंच गई। बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्‍तानी रुपया भारत की अठन्‍नी के बराबर हो गया। 

 

भारत के 50 पैसे के बराबर हुई पाकिस्‍तानी रुपए की कीमत 
दरअसल 118 के लेवल पहुंचने का मतलब यह हुआ कि एक अमेरिकी डॉलर के बदले में अब पाकिस्‍तानियों को अपने देश के 118 रुपए खर्च करने पड़ेंगे। भारत में अब डॉलर 66 रुपए के के आसपास है। यानी भारतीयों को एक डॉलर के बदले 66 रुपए देने होंगे। इस हिसाब से देखें तो एक अमेरिकी डॉलर के लिए भारतीय नागरिकों को पाकिस्‍तानी नागरिकों से करीब आधी रकम खर्च करनी पड़ेगी। मतलब यह हुआ कि डॉलर के सापेक्ष एक पाकिस्‍तानी रुपए की कीमत भारत के 50 पैसे के करीब बराबर हुई। 

 

बैलेंस ऑफ पेमेंट क्राइसिस से जूझ रहा है पाकिस्‍तान 

पाकिस्‍तान की इकोनॉमी के सामने इस समय बैलेंस ऑफ पेमेंट का संकट खड़ा हो गया है। सीधी भाषा में कहें तो पाकिस्‍तान के विदेशी मुद्रा भंडार में इतना पैसा नहीं बचा है कि वह आने वाले दिनों में चैन से अपना इम्‍पोर्ट जारी रख सके। पाकिस्‍तान का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूदा समय में 10.8 बिलियन डॉलर के लेवल पर आ गया है। पिछले साल मई में यह 16.4 अरब डॉलर था। फाइनेंशियल टाइम्‍स की रिपोर्ट की मानें तो पाकिस्‍तान का इम्‍पोर्ट तेजी के साथ बढ़ा है। उसके पास जो भी विदेशी मुद्रा भंडार है, वह अगले 2 महीनों में खत्‍म हो सकता है। 


सेंट्रल बैंक खुद कर चुका है रुपए का अवमूल्‍यन 
बता दें कि बैलेंस ऑफ पेमेंट क्राइसिस से निपटेन के लिए पाकिस्‍तानी सेंट्रल बैंक अपने रुपए का खुद भी अवमूल्‍यन कर चुका है। इससे फायदा यह होता है कि देश को विदेशी एक्‍सपोर्ट पर पहले से ज्‍यादा विदेशी करंसी हासिल होती है। पर लगातार करंसी कमजोर होने से इकोनॉमी दीवालिया होने की कगार पर पहुंच सकती है। साथ ही इन्‍वेस्‍टर्स का सेंटीमेंट भी बिगड़ सकता है। 

 

 

पाकिस्‍तान चीन से लेगा 2 अरब डॉलर तक का कर्ज 
इस संकट से निपटने के लिए चीन ने एक बार फिर से अपने पारंपरिक सहयोगी चीन का दरवाजा खटखटाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्‍तान सरकार खुद को आर्थिक संकट से उबारने के लिए चीन से 1 से 2 अरब डॉलर का लोन के लिए बातचीत कर रही है। सरकार ऐसे समय में यह कर्ज लेने की सोच रही है जब इस साल जून में खत्‍म होने वाले वित्‍त वर्ष तक उसपर चीन और उसके बैंकों का कर्ज बढ़कर 5 अरब डॉलर होने जा रहा है। इसी साल अप्रैल में चीन ने पाकिस्‍तान को करीब 1.2 अरब डॉलर का कर्ज दिया था। 


अमेरिकी मदद रूक गई है

अमेरिका में ट्रम्‍प के सत्‍ता में आने के बाद पाकिस्‍तान को मिलने वाली आर्थिक मदद लगातार कमजोर हुई है। आतंकवाद के खिलाफ पर्याप्‍त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाते हुए अमेरिका ने बड़े पैमाने पर पाकिस्‍तान की मदद रोक दी है। इससे पहले पाकिस्‍तान को आतंकवाद के खिलाफ जंग के लिए अमेरिका को ओर से 33 अरब डॉलर की मदद महैया कराई चा चुकी है। अमेरिका के इस कदम से पाकिस्‍तान को सीधे 1.6 अरब डॉलर सालाना का नुकसान हो रहा है। 


कर्ज बढ़ने का सबसे बड़ा कारण सीपीईसी 
पाकिस्‍तान पर लगातार बढ़ते कर्ज का एक बड़ा कारण बीजिंग समर्थित चाइना पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी सीपीईसी है। करीब 60 अरब डॉलर की इस परियोजना से पाकिस्‍तान को काफी उम्‍मीदें हैं। पाकिस्‍तानी अधिकारी मान रहे हैं कि एक बार पूरी हो जाने के बाद यह परियोजना देश की इकोनॉमी की सूरत बदल देगी। यही कारण है कि देश की सरकार खर्च की परवाह किए बिना पैसा पानी कर तरह बहा रही है। हालांकि देश में ढंग का इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट नहीं होने के चलते उन्‍हें इस परियोजना के लिए ज्‍यादातर मशीनरी चीन से इम्‍पोर्ट करनी पड़ रही है। ऐसे में उनका विदेशी मुद्रा भंडार घट रहा है और कर्ज बढ़ रहा है। 

 

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