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पाकि‍स्‍तान ने दि‍खाया चीन को ठेंगा, खोदा 93 हजार करोड़ का गड्ढा

भारत के साथ रिश्‍तों को ताक पर रखकर पाकि‍स्‍तान से हाथ मि‍लाने का खामि‍याजा आखि‍रकार चीन को अब भुगतना पड़ रहा है।

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नई दिल्‍ली। भारत के साथ रिश्‍तों को ताक पर रखकर पाकि‍स्‍तान से हाथ मि‍लाने का खामि‍याजा आखि‍रकार चीन को अब भुगतना पड़ रहा है। पाक ने चीन को न्‍यौता देकर उसकी वापसी के रास्‍ते में 93 हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा का गहरा गड्ढा खोद दि‍या है। पूरे एशि‍या और यूरोप को जोड़ने के लि‍ए रेलवे, पोर्ट और अन्‍य संसाधनों के जरि‍ए जो सिल्‍क रोड बनाने का सपना चीन ने देखा था उसके रास्‍ते में सबसे बड़ी अड़चन खुद उसके 'दोस्‍त' पाकिस्‍तान ने खड़ी कर दी है। 

दरअसल पहले तो पाकि‍स्‍तान ने हर तरह से चीन का साथ देने की हामी भरी मगर अब उसने एक बड़े प्रोजेक्‍ट पर चीन को साफ शब्‍दों में ना कह दी है। दोनों मुल्‍क करीब 60 अरब डॉलर की लागत से कई परि‍योजनाओं पर काम कर रहे हैं, इनमें ज्‍यादातर पैसा चीन का लग रहा है। परि‍योजनाओं में पावर प्‍लांट, रेलवे लिंक, सड़कें और हिंद महासागर में ग्‍वादर पोर्ट का निर्माण शामि‍ल है।  आगे पढ़ें कैसे लगा चीन को झटका 

कर दि‍या साफ इनकार 
इनमें दो से महत्‍वपूर्ण प्रोजेक्‍ट पाकि‍स्‍तान ने अटका दि‍ए हैं। एक पर तो साफ इनकार कर दि‍या है और दूसरे पर हामी नहीं भर रहा। कराची के दक्षि‍ण में रेलवे प्रोजेक्‍ट पर काम शुरू करने को लेकर बीते नवंबर चीन के असिस्‍टेंट फॉरेन मिनि‍स्‍टर पाकि‍स्‍तान गए थे मगर वहां कोई समझौता नहीं हो पाया। यह परि‍योजना 10 अरब डॉलर की है। इससे भी बड़ा झटका पाकि‍स्‍तान ने दि‍यामेर-भाषा बांध पर चीन को दि‍या है। पाक के जल और ऊर्जा वि‍कास प्राधि‍करण ने तो इस बांध को संयुक्‍त प्रोजेक्‍ट से बाहर ही कर दि‍या है। यह परि‍योजना 14 अरब डॉलर यानी करीब 93 हजार करोड़ रुपए की है।  आगे पढ़ें - कि‍सने कहा चीन की जेब में पड़ा है पाकि‍स्‍तान 

 

चीन में जेब में है पाक
पाकि‍स्‍तान के अखबारों में  छपे अथॉरि‍टी के अधि‍कारी मुज्‍जमिल हुसैन के बयान के मुताबि‍क, दि‍यामेर-भाषा बांधा को लेकर चीन ने जो शर्तें लगाई हैं वो हमारे हि‍तों के खि‍लाफ हैं। 
रि‍सर्च फर्म इकोनॉमि‍स्‍ट कॉरपोरेट नेटवर्क के एनालि‍स्‍ट रॉबर्ट कोएप कहते हैं कि पाकिस्‍तान उन देशों में से है जो चीन की जेब में पड़े हैं। अगर ऐसे में भी पाकि‍स्‍तान खड़ा होकर ये कह देता है कि मैं ये काम तुम्‍हारे साथ मि‍लकर नहीं करूंगा तो इससे साबि‍त होता है कि चीन के लि‍ए सबकुछ इतना आसान नहीं है, जि‍नता वो कह रहा है। 

 

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