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मोदी के सामने मुंह नहीं खोला, मुल्‍क पहुंचते ही भारत को दी भारी चोट

इस बैठक में यूएई, सऊदी सहि‍त अन्‍य कई ओपेक देशों के प्रतिनिधी मौजूद थे।

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नई दि‍ल्‍ली। महज दस दि‍नों पहले दि‍ल्‍ली में हुई एक बैठक में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेल उत्‍पादन करने वाले देशों (OPEC) को समझाया था कि‍ वह तेल की कीमतें जानबूझकर बढ़ाने के खेल से बाज आएं। इस बैठक में यूएई, सऊदी सहि‍त अन्‍य कई ओपेक देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इस बैठक में तो सभी ने मोदी की हां में हां मि‍लाई मगर वापस अपने मुल्‍क पहुंचते ही ऐसी चाल चली कि‍ पूरी वर्ल्‍ड इकोनॉमी को झटका लग गया। भारत में इन दि‍नों तेल की कीमतें रि‍कॉर्ड लेवल पर पहुंच गई हैं। यह कीमतें जानबूझ कर बढ़ाई गई हैं।  आगे पढ़ें - कि‍या बड़ा खेल 

 

बंद कमरे में की बैठक 
इसके बाद दुनि‍या में दूसरे नंबर पर सबसे ज्‍यादा तेल का उत्‍पादन करने वाले देश सऊदी अरब ने जेद्दा में एक बैठक बुलाई। बंद कमरे में हुई इस बैठक में तेल का उत्‍पादन करने वाले अन्‍य देशों के साथ रूस ने भी शि‍रकत की। बैठक में तेल का उत्‍पादन घटाने का फैसला लि‍या गया। बस इसके बाद मार्केट में कच्‍चे तेल की कीमतों में तेजी आनी शुरू हो गई। कच्‍चे तेल की कीमतें इस वक्‍त इस समय 73 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर आ गई हैं जो 2016 में 29 डॉलर के आसपास पहुंच गई थीं। कमाई घटता देख ओपेक देश में तेल के प्रोडक्शन में कमी कर देते हैं, जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ जाती है।

 

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें हाई लेवल पर

 

इसी का असर इस समय भारतीय बाजार पर पड़ रहा है। जिसकी वजह से पेट्रोल व डीजल की कीमतें रि‍कॉर्ड हाई पर आ गईं।इस समय पेट्रोल की कीमत कुछ शहरों में 83 रुपए से ज्यादा हो गई है। जबकि पहली बार डीजल 70 रुपए को भी पार कर गया है। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि ओपेक देशों ने कमाई बढ़ाने के लि‍ए भारत सहि‍त दुनि‍या के अन्‍य मुल्‍कों पर बोड डाल दिया है।  आगे पढ़ें-नहीं मानी मोदी की बात 

 

नहीं मानी मोदी की बात 
जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि‍ तेल उत्‍पादक देशों को उन अर्थव्‍यवस्‍थाओं का भी ध्‍यान रखना चाहि‍ए जो उनसे तेल खरीद रही हैं। वहीं सऊदी के ऊर्जा मंत्री खालि‍द अल फालेह ने कहा कि विश्‍व बाजार में तेल की बढ़ी कीमतों को झेलने की ताकत है। उन्होंने कहा कि  प्रमुख देश 80-100 डॉलर तक कीमतें झेलने की क्षमता रखते हैं। ओपेक ने इसी वजह से प्रोडक्शन में कमी करने का ऐलान कर दिया है। जिसका रिएक्शन भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ट्वीट पर दिखा। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है  'लगता है ओपेक ने फि‍र वही कि‍या।'  ट्रंप ने कहा हर ओर तेल मौजूद है। समुद्र में खड़े जहाजों में भी तेल लदा हुआ है। तेल की कीमतें कृत्रि‍म तरीके से बहुत ऊंची की गई हैं। यह अच्‍छा नहीं है और इसे स्‍वीकार नहीं कि‍या जाएगा। 

आगे पढ़ें - मोदी ने कहा था दो टूक 

क्‍या कहा था मोदी ने 
दि‍ल्‍ली में इसी माह आयोजि‍त 16वें अंतरराष्‍ट्रीय ऊर्जा मंच की मंत्री स्‍तरीय बैठक में मोदी ने कहा था कि दुनि‍या लंबे अर्से से तेल की कीमतों को रोलर कोस्‍टर पर देख रही है। हमें उत्‍पादक और उपभोक्‍ता दोनों के हि‍तों को देखते हुए इसकी कीमतों को लेकर समझदारी भरा फैसला लेना चाहि‍ए। दुनि‍या को तेल और गैस के लचीले और ट्रांसपेरेंट बाजार की ओर रुख करने की जरूरत है। 
प्रधानमंत्री ने कहा था कि यह तेल उत्‍पादक देशों के हि‍त में है कि अन्‍य अर्थव्‍यवस्‍थाएं भी स्‍थि‍रता के साथ तरक्‍की करती रहें। उन्‍होंने कहा कि क्‍यों न हम इस प्‍लेटफॉर्म का इस्‍तेमाल वि‍श्‍व सहमति बनाने के  लि‍ए करें, जि‍समें  तेल और गैस की वाजि‍ब कीमतें तय की जाएं। दरअसल मोदी का कहना ये था कि तेल उत्‍पादन करने वाले देश इसकी कीमतें बढ़ाने के लि‍ए लगातार दबाव बनाते रहते हैं जोकि सही नहीं है। 

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