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एक ऐसा देश जो दे रहा है लोगों को ई-रेसिडेंसी, नए उद्यमियों के लिए खुल रही राहें

किसी भी देश में रहते हुए बन सकते हैं यहां के ई-नागिरक, खोल सकते हैं अपनी कंपनी

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नई दिल्ली : यूरोप के उत्तर में बसा एक देश डिजिटल प्लेटफॉर्म का ऐसा इस्तेमाल कर रहा है कि आप जानकर हैरान रह जाएंगे। रिपब्लिक आॅफ एस्टोनिया दुनिया का पहला ऐसा देश है जिसने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी भौगोलिक सीमाओं को तोड़ दिया है। यह देश लोगों को ई-रेसिडेंसी देता है। यह सरकार द्वारा जारी किया गया ऐसा कार्ड है जो दुनिया के किसी भी कोने में बैठे नए उद्यमियों को इस देश में बिजनेस सेट-अप करने और उसे चलाने की सहूलियत देता है। एक अरब से अधिक टर्नओवर वाली चार बड़ी डिजिटल स्टार्ट अप्स कंपनी, स्काइप, ट्रांसफरवाइज, टैक्सीफाई और प्लेटेक इसी ई-रेजीडेंसी प्रोग्राम के तहत स्थापित हुई हैं। इस प्रोग्राम के तहत भारतीय भी खुद को रजिस्टर कर रहे हैं और यहीं बैठ कर यूरोप की कंपनी चला रहे हैं। 

 

ये है असली डिजिटल नेशन

न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित लेख के मुताबिक एस्टोनिया के आइडेंटीफिकेशन सिस्टम के तहत हर नागरिक और प्रवासी खुद को सुरक्षित तरीके से ऑनलाइन रजिस्टर कर सकता है और कानूनी तौर पर मान्य डिजिटल सिग्नेचर प्रदान कर सकता है। अब एस्टोनिया के सभी निवासी वोटिंग से लेकर सभी सरकारी और निजी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए अपनी डिजिटल आईडी का इस्तेमाल करते हैं। सिर्फ शादी, डिवोर्स और प्रॉपर्टी के ट्रांसफर के लिए ही लोगों का पर्सनली मौजूद होना जरूरी रह गया है।

 

आगे पढ़ें, क्या है ई-रेजीडेंसी और इसके फायदे? 

 

 

 

क्या है ई-रेसिडेंसी? कैसे करती है काम?

ई-रेसीडेंसी मिलने का मतलब है कि आप एस्टोनिया की सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त ई-नागरिक बन गए हैं। इसके जरिए कोई भी व्यक्ति दुनिया में कहीं भी बैठकर यूरोपीय कंपनी खोल सकता है। वहीं से अपने बिजनेस का संचालन कर सकता है और बिना कंपनी को रिलोकेट किए किसी भी देश में शिफ्ट हो सकता है। खास बात यह है कि ई-रेसिडेंसी के लिए कोई भी अप्लाई कर सकता है। अप्लाई करने के बाद एस्टोनिया की पुलिस और बॉर्डर गार्ड बोर्ड अापका बैकग्राउंड चेक करते हैं। एप्लीकेशन स्वीकार होने के बाद आपको ई-रेजीडेंसी स्टार्टर किट भेजी जाती है, जिसमें ऑनलाइन ऑथेंटिकेशन और डिजिट साइन करने के लिए डिजिटल आइडी कार्ड और पिन कोड होता है।

 

आगे पढ़ें, ई-रेजीडेंसी के फायदे

क्या हैं फायदे?

दूर बैठकर भी अाप अपने बिजनेस को पूरी तरह अपने मुताबिक चला सकते हैं। सारे डॉक्यूमेंट्स पर आप डिजिटल साइन करके पूरी सुरक्षा के साथ उन्हें भेज सकते हैं। डिजिटल रूप से ही यूरोप के सभी बाजारों और यहां की मुद्रा काे एक्सेस कर सकते हैं।

 

 

बढ़ रही एस्टोनिया की इकोनॉमी

डिजिटल आईडी का इस्तेमाल एस्टोनिया में 2002 हो रहा है। हालांकि ई-रेजीडेंसी का कॉन्सेप्ट अभी नया ही है। डिलॉइट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक ई-रेजीडेंसी प्रोग्राम ने शुरू होने के तीन साल में ही एस्टोनिया की अर्थव्यवस्था में 1.44 करोड़ यूरो का इजाफा किया। उम्मीद की जा रही है कि 2025 तक यह प्रोग्राम अतिरिक्त 1.8 अरब यूरो का योगदान करेगा।

 

आगे पढ़ें, भारतीयों में भी बढ़ रही ई-रेजीडेंसी को लेकर रुचि

 

भारतीय भी मांग रहे ई-रेजीडेंसी

अब तक 157 देशों के 48,000 से ज्यादा लोगों ने ई-रेजीडेंसी के लिए अप्लाई किया है। इसमें एशिया से भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और तुर्की शामिल हैं। नई दिल्ली के रहने वाले दीपक सोलंकी ने ई-रेजीडेंसी के तहत वेलमेन्नी नाम से स्टार्ट अप कंपनी शुरू की है। यह कंपनी लाइट के जरिए वायरलेस डाटा ट्रांसमिशन की सुविधा देती है। उनका कहना है कि, "मैं भारत में बैठकर अपने रेसीडेंसी कार्ड की मदद से एक यूरोपीय कंपनी चला रहा हूं। यह बेहद सरल और सुविधाजनक है।"

 
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