मोदी सरकार इन सामानों से चीन के बाजार पर करेगी कब्जा, सौंपी लिस्ट

चीन की आतंकी मसूद अजहर को बचाने की कोशिशों पर अब भारत ने भी हिसाब चुकता करने की तैयारी कर ली है।  भारत ने कूटनीति के दम पर चीन को भारत के साथ व्यापार घाटा कम करने के दबाव में ला दिया है। भारत ने अपने यहां बनने वाले 380 उत्पादों की ऐसी सूची सौंपी है जिन्हें चीन खरीदने की लिए राजी हो गया है।

money bhaskar

Apr 07,2019 07:19:00 PM IST

नई दिल्ली. चीन की आतंकी मसूद अजहर को बचाने की कोशिशों पर अब भारत ने भी हिसाब चुकता करने की तैयारी कर ली है। भारत ने कूटनीति के दम पर चीन को भारत के साथ व्यापार घाटा कम करने के दबाव में ला दिया है। भारत ने अपने यहां बनने वाले 380 उत्पादों की ऐसी सूची सौंपी है जिन्हें चीन खरीदने की लिए राजी हो गया है। भारत ने बागवानी, टेक्सटाइल्स, केमिकल्स और फार्मास्युटिकल्स सहित 380 प्रोडक्ट्स की पहचान कर चीन के साथ इन प्रोडक्ट्स की लिस्ट शेयर की है।


व्यापार घाटा कम हुआ

भारत का मानना है कि इन प्रोडक्ट्स की चीन में निर्यात की बड़ी संभावनाएं हैं। इन प्रोडक्ट्स का निर्यात बढ़ने से भारत को चीन के साथ अपना व्यापार घाटा (Trade Deficit) कम करने में मदद मिलेगी। अप्रैल-फरवरी 2018-19 के दौरान चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 5012 करोड़ डॉलर पर था। इस दौरान चीन को भारत का निर्यात 28.61 फीसदी बढ़कर 1500 करोड़ डॉलर रहा जबकि चीन से भारत का आयात 6.29 फीसदी गिरकर करीब 6500 करोड़ डॉलर रहा। बीते वित्त वर्ष में चीन के साथ व्यापार घाटा भी 53 अरब डालर से कम होकर 46 अरब डालर तक आ गया है। अधिकारियों ने कहा कि हाल के महीनों में भारत से मरिन प्रोडक्ट्स, कॉटन, ऑर्गेनिक केमिकल्स, अंगूर और प्लास्टिक के निर्यात में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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फिर भी यह बाधाएं बरकरार

भारतीय निर्यातकों को चीन के बाजारों में कुछ नॉन-टैरिफ बाधाओं का सामना करना पड़ता है। यह चीन में निर्यात को रोकता है। वाणिज्य मंत्रालय ने चीन को निर्यात बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा के लिए 4 अप्रैल को हितधारकों समेत निर्यात संवर्धन परिषदों और अन्य सरकारी विभागों की बैठक बुलाई थी।

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गैर बासमती चावल के निर्यात में कामयाबी


भारत निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रहा है। हाल ही में, वह चीन को गैर-बासमती चावल जैसे कृषि सामानों का निर्यात करने में कामयाब रहा है। भारत विभिन्न कृषि उत्पादों, पशु चारा, तिलहन, दूध और दूध से बने उत्पादों, औषधि के लिए अधिक से अधिक बाजार पहुंच की मांग कर रहा है क्योंकि इन उत्पादों/सेवाओं की चीन के बाजार में निर्यात की संभावनाएं हैं।

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