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कैबिनेट का बड़ा फैसला, हजारों अवैध कलाॅनियों के निवासियों को मिलेगा मालिकाना हक और स्थानांतरण अधिकार

इस फैसले से अनाधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोग अब अपनी संपत्ति की रजिस्ट्री करा सकेंगे

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नई दिल्ली। मोदी सरकार के आखिरी कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। बैठक में दिल्ली में अनधिकृत काॅलोनियों के निवासियों को संपत्ति के मालिक या स्थानांतरण अधिकार देने के लिए एक समिति गठति करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। दिल्ली की 1639 से अधिक अनधिकृत काॅलोनियों को नियमित करने के लिए एक कमिटी बनाई जाएगी। उपराज्यपाल की अध्यक्षता वाली इस कमिटी से 90 दिन के अंदर यह बताने को कहा गया है कि अनधिकृत काॅलोनियों को रेग्यूलर करने की राह में आ रही बाधाओं को किस तरह दूर किया जा सकता है ताकि उनमें रहने वालों को मालिकाना हक दिया जा सके। दिल्ली की अनाधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की मांग लंबे समय से उठ रही थी, यहां लाखों की संख्या में लोग रहते हैं। इसी वजह से इन्हें एक बड़े वोट बैंक के रूप में देखा जाता है। दिल्ली सरकार भी लगातार इन काॅलोनियों कमें विकास कार्यों पर जोर दे रही है।

 

 

केंद्र के इस फैसले से अनाधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोग अब अपनी संपत्ति की रजिस्ट्री करा सकेंगे और उसे किसी अन्य के नाम भी ट्रांसफर करा सकेंगे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मकान आदि बनाते समय लोग बैंक से लोन भी हासिल कर सकेंगे

यह कमेटी विचार करेगी की जहां लोगों की रिहायश हो गई है वहां लोगों को जमीन का मालिकाना कैसे दिया जाए

 

दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियां के निवासियों को मालिकाना हक कैसे दिया जाए, इस बात का अध्ययन करने के लिए उप राज्यपाल की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई है। यह कमेटी विचार करेगी की जहां लोगों की रिहायश हो गई है वहां लोगों को जमीन का मालिकाना कैसे दिया जाए।

1639 अनाधिकृत कॉलोनी


बता दें कि दिल्ली में 1639 से अधिक अनाधिकृत कॉलोनी हैं। दिल्ली का 40 फीसदी आबादी इन कॉलोनियों में रहती है। जानकार बताते हैं कि 1982 में दिल्ली में एशियन खेलों के दौरान बड़ी मात्रा में निर्माण कार्य हुए थे। इन कामों के लिए बड़ी संख्या में अन्य प्रदेशों के लोग दिल्ली आए और फिर ये लोग यहीं बस कर रह गए। तभी से दिल्ली में अनाधिकृत कॉलोनी बनने का प्रचलन शुरू हुआ था। 2008 में शीला दीक्षित सरकार ने इन कालोनियों को नियमित करने का प्रोविजनल सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया था लेकिन उन पर लगने वाले डैमेज चार्ज, लैंड फीस व अन्य मामला फंस गया था।

 

 

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