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अब पाकिस्तान पर महंगे दूध की मार, 180 रुपए प्रति लीटर तक पहुंची कीमत

चारे की कीमतों में बढ़ोतरी के दूध विक्रेताओं ने अचानक बढ़ाए दाम

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नई दिल्ली। महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सब्जियों, पेट्रोल, डीजल आदि की ऊंची कीमतों के बाद अब जनता पर महंगे दूध की मार पड़ रही है। चारा और अन्य पशु आहारों की कीमतें बढ़ने के बाद दूध विक्रेताओं ने अचानक दूध की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। इससे खुदरा बाजार में दूध की कीमतें 180 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं।

कराची डेयरी फार्मर्स एसोसिएशन ने बढ़ाए दाम
पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, दूध की कीमतों में बढ़ोतरी की शुरुआत कराची डेयरी फार्मर्स एसोसिएशन ने की है। महंगाई के कारण चारा समेत अन्य पशु आहारों की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद कराची डेयरी फार्मर्स एसोसिएशन ने दूध की कीमतों में अचानक 23 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ा दी हैं। इससे खुदरा बाजार में दूध की कीमत 120 से 180 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, फार्मर्स एसोसिएशन ने कई बार सरकार से दूध की कीमतें बढ़ाने का आग्रह किया था। लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने पर उसे खुद यह निर्णय लेना पड़ा है। एसोसिएशन का कहना है कि चारा और ईंधन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। इसलिए उसे यह कदम उठाना पड़ा है। 

प्रशासन ने कही कार्रवाई की बात


उधर, एसोसिएशन की ओर से कीमतें बढ़ाने को कराची के स्थानीय प्रशासन ने गलत बताते हुए महंगा दूध बेचने वाले खुदरा विक्रेताओं पर कार्रवाई की बात कही है। प्रशासन की ओर से दूध की कीमत 94 रुपए प्रति लीटर तय की गई है। इसके बाद भी यहां 100 से 180 रुपए प्रति लीटर दूध बेचा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थानीय प्रशासन ने सभी डिप्टी कमिश्नर्स से महंगा दूध बेचने वालों पर सख्त एक्शन लेने को कहा है। महंगा दूध बेचने के मामले में एक खुदरा विक्रेता को गिरफ्तार भी किया गया है।

9.41 प्रतिशत पर पहुंची महंगाई


पाकिस्तान में मार्च 2019 के दौरान महंगाई की दर पांच वर्ष के उच्चतम स्तर 9.41 प्रतिशत पर पहुंच गई है। पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, महंगाई बढ़ने से गरीबी रेखा में रहने वालों की संख्या में 40 लाख का और इजाफा हो जाएगा, जबकि इस साल दस लाख लोग और बेरोजगार हो जाएंगे। महंगाई का यह स्तर अप्रैल 2014 के बाद का सर्वाधिक है। उस समय महंगाई 9.2 प्रतिशत आंकी गई थी। मार्च महीने में ही महंगाई एक माह पहले की तुलना में 1.42 प्रतिशत बढ़ गई है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई दहाई अंक में पहुंचने और आर्थिक विकास की गति तीन प्रतिशत से नीचे रहने से देश मुद्रास्फीति जनित मंदी की जाल में फंस सकता है। मुद्रस्फीति जनित मंदी में वस्तुओं और सेवाओं के दाम में तो बढ़ोतरी होती ही है। इस स्थिति में आर्थिक विकास गति मंद पड़ जाती हैं और बेरोजगारी की दर बढ़ जाती है। 

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