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चीनी मीडिया में छाए विदेश सचिव विजय गोखले, मोदी-जिनपिंग मुलाकात में निभाई अहम भूमिका

मोदी-जिनपिंग मुलाकात में भूमिका को लेकर भारत में विजय गोखले की भले चर्चा न हुई हो, लेकिन चीन ने उनका लोहा माना है...

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नई दिल्‍ली। भारत और चीन के बीच रिश्‍तों पर जमीं बर्फ एक बार फिर से पिघलती दिख रही है। चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के लिए रवाना हो गए हैं। जल्‍द ही मोदी और जिनपिंग के बीच मुलाकात होने जा रही है। दोनों देशों के सरकार प्रमुखों की मुलाकात का कोई एजेंडा तय नहीं है, लेकिन जानकारों के मुताबिक, डोकलाम गतिरोध के बाद रिश्‍तों में जमीं धूल को साफ करने में यह मुलाकात बड़ी भूमिका अदा करेगी। 

पिछले दिनों शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने जब दोनों नेताओं के बीच मुलाकात की बात कही तो बहुत से लोगों को एक पल के लिए बेहद आश्‍चर्य हुआ। डोकलाम गतिरोध और NSG में भारत का विरोध करने के चलते माना जा रहा था कि एशिया की 2 बड़ी इकोनॉमी के बीच रिश्‍ते इतनी जल्‍दी सामान्‍य नहीं होंगे। हालांकि इस दौरान परदे के पीछे बहुत कुछ घटा। मोदी और जिनपिंग के बीच होने वाली इस मुलाकात कराने में दोनों देशों के अधिकारियों और नेताओं के दौरों का अहम रोल अदा किया। हालांकि एक शख्‍स का रोल और भी खास रहा है। ये शख्‍स हैं विदेश सचिव विजय केशव गोखले। 

 

चीन ने माना लोहा 

मोदी-जिनपिंग मुलाकात में परदे के पीछे से बड़ी भूमिका निभाने को लेकर भारतीय मीडिया में विजय गोखले की भले ही कोई खास चर्चा नहीं हुई हो, लेकिन चीनी मीडिया ने उनका लोहा माना है। चीन के सरकारी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स के मुताबिक, ये गोखले ही थे, जिन्‍होंने डोकलाम गतिरोध के बाद दोनों देशों के रिश्‍ते पटरी पर लाने की दिशा में पहला कदम उठाया। इसी के बाद दोनों देशों के नेताओं और अधिकारियों की मुलाकात का सिलसिला शुरू हुआ। अब मोदी और जिनपिंग के बीच मुलाकात होने जा रही है। 

 

 

विदेश सचिव बनने के तुरंत बाद चीन गए थे गोखले 
ग्‍लोबल टाइम्‍स के मुताबिक, एस जयशंकर के रिटायर होने के बाद जनवरी 2018 में गोखले को भारत का विदेश सचिव बनाया गया। उन्‍होंने 28 जनवरी को अपना काम संभाला। इसके अगले महीने यानी फरवरी में ही उन्‍होंने बीजिंग का दौरा किया। गोखले ने यहां यांग जाइची से मुलाकात की थी। जाइची चीन की विदेश मामलों की सर्वोच कमेटी के प्रमुख हैं। उनका यह दौरा चीन को यह संदेश देने में कामयाब रहा कि भारत के लिए चीन अहम है। साथ ही पुरानी बात को भूलकर वह चीन के साथ नई शुरुआत करना चाहता है। इसके बाद दोनों देशों के अलग-अलग क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने की कोशिशें शुरू हुईं।  

 

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डोकलाम विवाद सुलझाने में रही थी अहम भूमिका 
डोकलाम में 70 दिनों तक भारत और चीन की सेनाएं आमने सामने खड़ी रही थीं।  इस गतिरोध के चलते दुनिया के प्रमुख देशों को जब टेंशन होनी शुरू हुई तो वह गोखले ही थे, जिन्‍होंने इस गतिरोध को खत्‍म करने में अहम भूमिका निभाई थी। ग्‍लोबल टाइम्‍स के मुताबिक, उनको विदेश सचिव बनाकर मोदी सरकार ने यह साफ इशारा दिया कि वह चीन को अहमियत देती है।   
 
 

चीन में राजदूत रह चुके हैं गोखले 
गोखले को चीन मामलों को एक्‍सपर्ट माना जाता है। वह चीन में काफी समय तक भारत के राजदूत रहे हैं। वह  1981 बैच के भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी भी रहे हैं। चीन के अलावा उन्‍हें साउथ ईस्‍ट एशिया के देशों का भी एक्‍सपर्ट माना जाता है। वह हांगकांग और ताइवान में भी तैनात रह चुके हैं। इसके अलावा मलेशिया और वियतनाम में भी उन्‍होंने भारत के राजदूत की भूमिका निभाई थी। विदेश विभाग के सूत्रों के मुताबिक, एक पारंपरिक और कायदे कानूनों को मानने वाले विदेश आधिकारी हैं। जर्मनी में भारत के राजदूत रहते हुए मेकइन इंडिया के लिए किए गए कार्यक्रम के बाद वह प्रधानमंत्री मोदी की नजर में आए थे। जर्मनी में हुए इस प्रोग्राम में पीएम मोदी खुद भी मौजूद थे। 

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