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पीएम मोदी की कूटनीति का असर, चीन से नाता तोड़ भारत से व्यापार बढ़ा रहा ये मुस्लिम देश

दोनों देश के बीच हुआ ये समझौता 11 मार्च 2019 से होगा प्रभावी

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नई दिल्ली. भारत और मालदीव ने दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए वीजा सुविधा समझौते को लागू करने के लिए मंगलवार को राजनयिक संवाद (डिप्लोमैटिक नोट्स) का आदान-प्रदान किया। मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम सोलीह की पिछले साल दिसंबर में भारत यात्रा के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता 11 मार्च, 2019 से प्रभावी होगा। 

 

दोनों देशों के बीच आसान होंगे व्यापारिक रिश्ते

बता दें कि दोनों देशों के संबंधों में अब्दुल्ला यामीन के राष्ट्रपति रहने के दौरान खिंचाव आ गया था। यामीन को चीन का करीबी माना जाता था। यामीन के शासनकाल में कई भारतीयों को वीजा देने से इनकार कर दिया था। यह समझौता मालदीव के नागरिकों को पर्यटन, व्यवसाय, शिक्षा और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए भारत आने के लिए एक उदार वीजा व्यवस्था प्रदान करेगा। यह भारतीयों के लिए व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए मालदीव की यात्रा करना भी आसान बनाएगा।

 

भारत ने चुकाया था चीनी कर्ज 

मालदीव, चीन के कर्ज के जाल में बुरी तरह फंस चुका था। ऐसे में पीएम मोदी की अगुआई वाली भारत सरकार ने उसे बचाने के लिए 1.40 अरब डॉलर यानी 10 हजार करोड़ रुपए का पैकेज दिया था। इससे मालदीव की तात्कालिक आर्थिक जरूरतें पूरी होने की उम्मीद है। वहीं जब मालदीव में पिछले साल नवंबर में नई सरकार की ताजपोशी हुई थी, उस वक्त पीएम नरेंद्र मोदी रातों-रात वहां पहुंच गए थे। प्रधानमंत्री के तौर पर यह मोदी का पहला मालदीव दौरा था।

पिछली सरकार पर लगे थे चीन से भारी कर्ज लेने के आरोप

हाल में सोलिह की अगुआई वाली सरकार ने कहा था कि उसे अभी तक चीन के वास्तविक कर्ज के बारे में नहीं पता है। दरअसल सोलिह चीन की ओर झुकाव रखने वाली पूर्ववर्ती अब्दुल्ला यमीन सरकार पर सरकारी खजाने को जमकर लूटने और चीन से भारी कर्ज लेने का आरोप लगाते रहे हैं। माना जाता है कि चीन ने यहां पर सड़क और हाउसिंग निर्माण के नाम पर करोड़ों डॉलर का निवेश किया है। 

 

मालदीव पर है 21 हजार करोड़ का कर्ज

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मालदीव पर चीन का 3 अरब डॉलर या 21 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। मुस्लिम बाहुल्य आबादी वाला यह देश मदद के लिए भारत, सऊदी अरब और अन्य देशों की ओर देख रहा है। गौरतलब है कि मालदीव ने अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए यह कर्ज लिया था और इन प्रोजेक्ट्स को चीन की कंस्ट्रक्शन कंपनियां ही पूरा कर रही हैं। पिछले महीने ही भारत ने मालदीव के नए विदेश मंत्री अब्दुल्लाह शाहिद की भारत यात्रा के दौरान 2.5 करोड़ डॉलर के कर्ज की पेशकश की थी।

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