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भारत में बनेगा वह प्लेन, चीन भी खाता है जिससे खौफ

अगर सबकुछ ठीक रहा तो जल्‍द ही भारत में वह फाइटर प्‍लेन बनेगा, जिससे चीन भी खौफ खाता है....

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नई दिल्ली। अगर सबकुछ ठीक रहा तो जल्‍द ही भारत में वह फाइटर प्‍लेन बनेगा, जिससे चीन भी खौफ खाता है। चेन्‍नई में चल रह डिफेंस एक्‍सपो में इसे प्‍लेन को लेकर बड़ा समझौता हुआ है। अपनी तरह का यह दुनिया का मात्र ऐसे फाइलटर प्‍लेन है, जो पानी के साथ ही जमीर पर भी लैंड कर सकता है। यही कारण है कि इस समझौते की सबसे ज्‍यादा चर्चा हो रही है। आइए जानते हैं इस प्‍लेन और समझौते के बारे में... 

 

ये है शिनमेवा US-2 फाइटर प्‍लेन 
डिफेंस एक्‍सपो में जिस फाइटर प्‍लेन के बनने को लेकर समझौता हुआ है, वो है जापान का एम्फीबियस एयरक्राफ्ट यूएस-2। यह दुनिया का एक मात्र ऐसे एयरक्राफ्ट है जो जमीन और पानी दोनों पर एक ही एफीसिएंसी से लैंडिंग और टेक ऑफ कर सकता है। इस एयरक्राफ्ट को लेकर भारत सरकार और जापान सरकार के बीच 2 साल से ज्‍यादा समय तक बातचीत चल रही थी। 

 

महिंद्रा ने किया जापानी कंपनी के साथ करार 
भारतीय कंपनी महिंद्रा डिफेंस ने जापान की कंपनी शिनमेवा इंडस्ट्रीज के साथ करार किया है। महिंद्रा डिफेंस की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, करार के तहत US-2 प्‍लेन के मुख्य हिस्सों की असेंबलिंग, उनकी मैन्युफैक्चरिंग और एमआरओ सर्विस भारत में होगी। बता दें कि US-2 जहाज का प्रोडक्‍शन जापान में शिनमेवा इंडस्ट्रीज ही करती है। 

 

 

जापान नेवी यूज करती है यह प्‍लेन 
फिलहाल यह प्‍लेन जापानी नेवी यूज करती है। महींद्रा डिफेंस के मुताबिक भारत और जापान इस जहाज को भारतीय नेवी में शामिल करने के लिए संभावनाएं तलाश रहे हैं। इसपर बातचीत हो रही है। यह अपनी तरह का खास प्‍लेन है जो खोज और बचाव के लिए पूरी दुनिया में बेस्‍ट माना जाता है। यह किसी भी स्थिति में ज़मीन और पानी दोनों पर उतर सकता है. यह पानी पर उतरने के साथ पानी से उड़ान भी भर सकता है। 

 

 


हिंद महासागर में बन सकता है नेवी की ढाल 
फिलहाल इस एम्‍फीबियन विमान पर अभी आखिरी मुहर नहीं लग पाई है, लेकिन अगर यह नेवी में शामिल हुआ तो हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की ढाल बन सकता है। यूस-2 विमान लंबी दूरी तक जा सकता है। इसकी रेंज लगभग 4700 किमी है। अगर भारत का कोई जहाज हिंद महासागर में है और भारत से वह तीन-चार दिन दूर है। इसमें कुछ गड़बड़ी आने पर ये विमान फटाफट स्पेयर पार्ट पहुंचा सकते हैं। जापान के इस एम्फीबियन विमान में आक्रमण करने की क्षमता वाले कई उपकरण और मशीनरी हैं।  

 

 

चीन जता चुका है आपत्ति 
2 साल पहले जब इस विमान को लेकर भारत और जापान के बीच बातचीज शुरू हुई थी, तभी चीन ने आपत्ति जताई थी। चीन ने कहा था कि अगर इस सौदे का मकसद विवादित दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर बीजिंग को दबाव डालने का है तो वह ऐसे कदम को ‘शर्मनाक’ मानेगा। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा था कि उनके देश को भारत जापान के बीच रक्षा सहयोग पर कोई ऐतराज नहीं है। लेकिन अगर चीन पर इससे दबाव डालने की कोशिश की गई, तो यह शर्मनाक है। चीन के पास अब भी इस तरह का कोई विमान नहीं है। 

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