थ्री इडियट की तरह IBM Boss का Indians को संदेश, डिग्रीहोल्डर्स नहीं काबिल लोग चाहिए

आपने थ्री इडियट फिल्म देखी होगी। इसमें वालीवुड अभिनेता मिर खान काबिल बनने का फेमस डायलाग बोलते हैं। अब कुछ ऐसा ही बयान दुनिया की दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी आईबीएम (IBM) की प्रमुख गिन्नी रोमेट्टी का आया है। उन्होंने भारत में बढ़ रही बेरोजगारी की चर्चा के बीच कहा है कि भारतीयों में नए जमाने की नौकरियों के  हिसाब से  स्किल (Skil) की कमी है।  इस कारण उन्हें नौकरियां नहीं मिल रही हैं।

 


 

money bhaskar

Mar 14,2019 04:05:00 PM IST

नई दिल्ली. आपने थ्री इडियट फिल्म देखी होगी। इसमें वालीवुड अभिनेता मिर खान काबिल बनने का फेमस डायलाग बोलते हैं। अब कुछ ऐसा ही बयान दुनिया की दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी आईबीएम (IBM) की प्रमुख गिन्नी रोमेट्टी का आया है। उन्होंने भारत में बढ़ रही बेरोजगारी की चर्चा के बीच कहा है कि भारतीयों में नए जमाने की नौकरियों के हिसाब से स्किल (Skil) की कमी है। इस कारण उन्हें नौकरियां नहीं मिल रही हैं। यह भी तब जबकि रोजगार प्रचुर मात्रा में हैं। उन्होंने बताया कि कुल 180 अरब डॉलर के घरेलू सॉफ्टवेयर उद्योग में 40 लाख डायरेक्ट रोजगार मिला हुआ है। आईबीएम की चेयरमैन, अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालक अधिकारी रोमेट्टी ने कहा कि यह सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया की समस्या है। कंपनी के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कि नई नौकरियों का सृजन हो रहा है, लेकिन उनके अनुरूप काबिलियत या कौशल नहीं है।

डिग्री से ज्यादा जरूरी है स्किल

रोमेट्टी ने कहा कि आप अतीत में विश्वास करने की तुलना में कुछ अलग चीजों में विश्वास करते हैं। आपको यह भरोसा करना होगा कि डिग्री के मुकाबले काबिलियत ज्यादा जरूरी है। उन्होंने यह बात ऐसे समय कही है, जबकि यह कहा जाता है कि इंजीनियरिंग की डिग्री वाले लाखों युवाओं के पास नौकरी नहीं है। उन्हें अगर शुरुआती स्तर पर नौकरी मिलती भी है तो अनुभव रखने वाले अर्ध-कुशल कामगारों से बहुत कम वेतन मिलता है।


तीन चौथाई लोग नौकरी के काबिल नहीं

लाखों इंजीनियरों और बिजनेस स्कूल से डिग्री लेने वाले युवाओं में करीब तीन चौथाई नौकरी के काबिल नहीं हैं। यह देश की शिक्षा व्यवस्था के साथ दाखिला प्रक्रिया की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है। निजी आर्थिक शोध संस्थान सीएमआईई के आंकड़े का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि फरवरी तक 3.12 करोड़ युवा पूरी सक्रियता के साथ नौकरियां तलाश रहे हैं। कुल 1.35 करोड़ की आबादी में 60 फीसदी से अधिक 35 साल से कम के हैं।

मिलकर करना होगा काम

रोमेट्टी के मुताबिक, ऐसा हो सकता है आपके पास किसी विश्वविद्यालय की डिग्री न हो, लेकिन इसके बावजूद आप बेहतर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि धारणा के विपरीत पर्याप्त मात्रा में नौकरियां हैं और समान संख्या में ही युवा नौकरी तलाश रहे हैं। लेकिन कौशल की कमी नौकरी मिलने की उनकी राह में रोड़ा है और यही वास्तविक समस्या है। इस समस्या के समाधान के लिए कंपनियों और सरकारों को साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि हम ऐसी दुनिया नहीं चाहेंगे, जहां कुछ लोग नई प्रौद्योगिकी में काम करना जानते हैं, जबकि बहुसंख्यकों के साथ ऐसा नहीं है।


तकनीक ने सिर्फ नौकरी का स्वरूप बदला

क्या तकनीक से नौकरियों को खतरा है, इस सवाल के जवाब में आईबीएम प्रमुख ने कहा कि इससे नौकरियों की प्रकृति में बदलाव आएगा। उनके मुताबिक, दो साल पहले दिग्गज यूरोपीय टेक कंपनी के मुखिया ने भी समान चिंताएं जताई थी। उन्होंने कहा था कि 65 फीसदी से अधिक भारतीय आईटी कर्मचारी दोबारा प्रशिक्षित करने के काबिल नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि इसके लिए भारतीय शिक्षा प्रणाली के साथ प्रौद्योगिकी कंपनियां भी जिम्मेदार हैं।

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