Home » Economy » Internationalनहीं रहे ओल्‍ड मॉन्‍क बनाने वाले कपि‍ल मोहन - Kapil Mohan the man behind old monk dies at the age ot 88

अगर मोहन न होते तो आज न होती Old Monk, छोड़ गए 400 करोड़ का कारोबार

पीने वालों की दुनि‍या में ओल्‍ड मॉन्‍क का जलवा आम भी कायम है।

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नई दि‍ल्‍ली। पीने वालों की दुनि‍या में ओल्‍ड मॉन्‍क का जलवा आज भी कायम है। इसे लॉन्‍च करने वाले ब्रि‍गेडियर (रि‍टायर्ड) कपि‍ल मोहन ने 88 साल की उम्र में दुनि‍या को अलवि‍दा कह दि‍या। वह मोहन मेकइन लिमि‍टेड के चेयरमैन थे।  मोहन बीते कुछ वर्षों से ठीक नहीं थे। उनकी गाजि‍याबाद के मोहन नगर में दि‍ल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। उन्‍हें 2010 में पदमश्री पुरस्‍कार से नवाजा गया था।

 

Dyer Meakin Breweries कंपनी की कमान संभालने के बाद उन्‍होंने इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। बेहद फेमस ओल्‍ड मॉन्‍क (Old Monk) रम को लॉन्‍च करने का श्रेय मोहन को ही जाता है। उन्‍होंने 19 दिसंबर 1954 को इसे लॉन्‍च कि‍या था। उनकी लीडरशि‍प में कंपनी ने अपने कारोबार का बहुत वि‍स्‍तार कि‍या।  


उसके बाद से मोहन ने कई तरह के बि‍जनेस में हाथ आजमाए जि‍नमें माल्‍ट हाउस, ग्‍लास फैक्‍ट्री, ब्रेकफास्‍ट फूड, फ्रूट जूस, कोल्‍ड स्‍टोरेज और इंजीनियरिंग। आज मोहन मेकइन लिमि‍टेड का टर्नओवर 400 करोड़ से ऊपर है।  आगे पढ़ें कंपनी का इति‍हास 

 

1855 में हुई थी स्‍थापना 


इस कंपनी की स्‍थापना एडवर्ड डायर ने 1855 में कसौली में की थी। इसी दौर में एच जी मेकइन ने मेकइन एंड कंपनी लिमिटेड बनाई। इन्‍होंने ओल्‍ड शि‍मला और कसौली बेवरेजेज को खरीदने के साथ ही कई जगह काम शुरू कि‍या। इन दोनों कंपनि‍यों ने आगे चलकर हाथ मि‍लाया और डायर मेकइन एंड कंपनी लिमि‍टेड बनी। 1935 में बर्मा के भारत से अलग होने के बाद कंपनी का नाम बदल कर डायर मेकइन बेवरेजेज कर दि‍या गया। इसके बाद 1966 में एक बार फि‍र कंपनी का नाम बदलकर मोहन मेकइन बेवरेजेज रख दि‍या गया और इसके बाद 1980 में इसका नाम मोहन मेकइन लिमि‍टेड रख दि‍या गया। 

 

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