चीन को मिला इस बड़े यूरोपीय देश का साथ, बौखला सकता है अमेरिका

Italy and China sign memorandum in support of Belt and Road initiative: अफ्रीका, यूरोप और दूसरे देशों को सड़क व रेलमार्ग से जोड़ने के लिए चीन की ओर से बनाए गए बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के लिए इटली का साथ मिल गया है। इस संबंध में इटली और चीन ने शनिवार को रोम एक आपसी समझौता किया है।

Money Bhaskar

Mar 23,2019 06:03:00 PM IST

नई दिल्ली। अफ्रीका, यूरोप और दूसरे देशों को सड़क व रेलमार्ग से जोड़ने के लिए चीन की ओर से बनाए गए बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के लिए इटली का साथ मिल गया है। इस संबंध में इटली और चीन ने शनिवार को रोम एक आपसी समझौता किया है। इस समझौते के तहत दोनों देश मिलकर पोर्ट, पुल और बड़े पावर प्लांट्स का निर्माण करेंगे।

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29 समझौतों पर हुए हस्ताक्षर
इटली के रोम में आयोजित एक समारोह में प्रधानमंत्री गिउसेप कोंटे और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में दोनों देशों के अधिकारियों ने 29 अलग-अलग समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद दोनों देशों के प्रमुखों ने हाथ मिलाकर इस समझौते का स्वागत किया। इस समझौते के साथ इटली बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट से जुड़ने वाला जी-7 देशों में से पहला देश बन गया है। इससे पहले दिसंबर में पुर्तगाल भी बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट से जुड़ गया था।

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अमेरिका को लग सकता है झटका
चीन के बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट से अमेरिका ने दूरी बना रखी है। इस प्रोजेक्ट से दूरी बनाए रखने के लिए अमेरिका लंबे समय से कई देशों पर दबाव भी बनाए हुए है। इटली के इस प्रोजेक्ट से जुड़ने को चीन के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। साथ ही इसे अमेरिका के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि इस समझौते के बाद अमेरिका और चीन में नए सिरे से ट्रेड वॉर शुरू हो सकता है। इटली यूरोप की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था है और इस प्रोजेक्ट के साथ जुड़ने से चीन की यूरोप के देशों तक सीधी पहुंच हो जाएगी।

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भारत शुरू से कर रहा है विरोध
चीन के बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट का भारत शुरू से विरोध कर रहा है। हाल ही में भारतीय राजदूत विक्रम मिश्री ने एक बार फिर चीन के बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट में हिस्सा लेने से इंकार किया है। भारत का कहना है कि इस प्रोजेक्ट में उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को नजरअंदाज किया गया है। बताया जा रहा है कि अप्रैल में बीजिंग में दूसरे बेल्ट एंड रोड फोरम का आयोजन किया जाएगा। एक साक्षात्कार में भारतीय राजदूत विक्रम मिश्री ने चीनी मीडिया को कहा कि नई दिल्ली इस कार्यक्रम का विरोध करते हुए दूसरी बार भी इससे दूर रहेगा।

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