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गुप्‍ता फैमि‍ली की नहीं चलेगी धौंस, बड़ा सौदेबाज है नया राष्‍ट्रपति

सिरिल रैंफोसा देश की सत्‍ता धारी अफ्रीकन नेशरल पार्टी के अध्‍यक्ष भी हैं....

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नई दिल्‍ली। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन पर भारतीय करोबारी और भ्रष्‍टाचार की आरोपी गुप्‍ता फैमिली को बढ़ावा देने के आरोप थे। दरअसल सत्ताधारी अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस (ANP) पार्टी ने सोमवार को उन्हें अपने पद से इस्तीफा देने को कहा था। जुमा ने तब पार्टी की बात मानने से इनकार किया था। शुरुआत में ANC ने इस्तीफे के लिए कोई समयसीमा नहीं तय की थी, लेकिन बाद में पार्टी ने दो टूक कहा था कि अगर जुमा इस्तीफा नहीं देते हैं तो संसद में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उन्हें पद से हटाया जाएगा। 


साइरिल रैम्‍पोसा होंगे देश के नए राष्‍ट्रपति 
जुमा के पद से इस्‍तीफा देने के बाद सिरिल रैंपोसा देश के अगले राष्‍ट्रपति होंगे। वह देश की सत्‍ता धारी अफ्रीकन नेशरल पार्टी के अध्‍यक्ष भी हैं। मौजूदा समय में वह देश के उपराष्‍ट्रपति थे। उन्‍होंने पहले ही जुमा का उत्‍तराधिकारी माना जाता रहा है। रैम्‍पोसा रंगभेद के खिलाफ संघर्ष के बड़े नेता रहे हैं। गार्जियन की रिपोर्ट की  मुताबिक, देश के पहले राष्‍ट्रपति और रंगभेद के खिलाफ संघर्ष नेता नेल्‍सन मंडेला ने उन्‍हें देश के चौथा राष्‍ट्रपति बनाने की भी सिफारिश की थी। 

 

 

 

गुप्‍ता फैमि‍ली की नहीं चलेगी धौंस
माना जा रहा है कि साइरिल रैम्‍पोसा के देश के राष्‍ट्रपति बनने के बाद गुप्‍ता फैमिली की दखल दक्षिण अफ्रीकी सरकार में कम होगा। दरअसल बीते कुछ सालों में गुप्‍ता फैमिली और रैम्‍पोसा के बीच 36 का आंकड़ा रहा है। रैम्‍पोसा ने हाल में गुप्‍ता फैमिली पर जनता के पैसे का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था। इसपर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए अतुल गुप्‍ता ने दावा किया था कि रैम्‍पोसा के उनके परिवार के बारे में सही जानकारी नहीं है। बता दें कि गुप्‍ता फैमिली से नजदीकी के चलते ही जुमा को अपने पद से इस्‍तीफा देना पड़ा है। 

 

 

रैंपोसा को माना जाता है बड़ा सौदेबाज 
रैंपोसा को बड़ा सौदेबाज भी माना जाता है। कहा जाता है कि रंगभेद को संघर्ष खत्‍म कराने में रैम्‍पोसा ने अहम भूमिका निभाई थी। वह 1994 में अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस और गोरी सरकार के बीच सुलह कराने वाले नेता थे। वह इस संघर्ष में कई बार जेल भी गए थे। पुरानी रंगभेदी सरकार ने उनपर भी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के आरोप में मुकदमा चलाया था। 

 

 

देश के सामने होंगे ये चैलेंज 

माना जा रहा है कि राष्‍ट्रपति बनने के बाद रैम्‍पोसा के लिए चुनौतियां आसान नहीं होंगी। नैचुरल रिर्सोसेज से रिच देश की बड़ी आबादी अब भी बिजली के बिना जीने को मजबूर है। स्‍वच्‍छता के मोर्चे पर भी देश की स्थिति कमोबेश वैसी ही है। 9 साल तक के 80 फीसदी बच्‍चे अब भी स्‍कूल नहीं जा रहे हैं। देश में हिंसा की घटनाएं सबसे ज्‍यादा यहां होती हैं। माना जाता है कि साउथ अफ्रीका की इकोनामी में बड़ा पोटेंशियल है, लेकिन हाल में इसकी विकास दर घटकर 2 फीसदी पर आ गई है। 

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