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दोस्‍त ट्रम्‍प ने मोदी को फिर दे दिया झटका, लाखों भारतीयों की जाएगी जॉब

ट्रम्‍प प्रशासन ने एक बार फिर से अपने नियमों में बदलाव किया है, इसके चलते लाखों भारतीयों की नौकरी पर संकट आ सकता है। दरअसल ट्रम्‍प प्रशासन ने एक नई पॉलिसी का एलान किया है, जिससे H1-B वीजा जारी करने की प्रक्रिया काफी को पहले से और सख्‍त कर दिया गया है। नई पॉलिसी के तहत एक या एक से ज्‍यादा थर्ड पार्टी वर्कसाइट्स के लिए काम कर रहे इम्‍प्‍लॉइज के लिए अब वीजा लेना मुश्किल हो गया है।

Money bhaskar

Feb 24,2018 06:08:00 PM IST

नई दिल्‍ली। 21वीं सदी का सबसे बड़ा दोस्‍त होने का दावा करने वाले अमेरिका के ट्रम्‍प प्रशासन ने एक बार फिर से भारत का झटका दिया है। ट्रम्‍प प्रशासन ने एक बार फिर से अपने नियमों में बदलाव किया है, इसके चलते लाखों भारतीयों की नौकरी पर संकट आ सकता है। दरअसल ट्रम्‍प प्रशासन ने एक नई पॉलिसी का एलान किया है, जिससे H1-B वीजा जारी करने की प्रक्रिया काफी को पहले से और सख्‍त कर दिया गया है। नई पॉलिसी के तहत एक या एक से ज्‍यादा थर्ड पार्टी वर्कसाइट्स के लिए काम कर रहे इम्‍प्‍लॉइज के लिए अब वीजा लेना मुश्किल हो गया है।


कंपनियों को होगी मुसीबत
ट्रम्‍प प्रशासन की नई पॉलिसी के तहत कंपनियों को यह साबित करने के लिए अधिक मशक्‍कत करनी होगी कि थर्ड पार्टी वर्कसाइट पर कार्यरत उसके एच1 बी इम्‍प्‍लॉई के पास खास पेशेवर योज्ञता है जो किसी अमेरिकी कामगार के पास नहीं है। बता दें कि एच1 बी प्रोग्राम कंपनियों को टेम्‍परेरी अमेरिका वीजा ऑफर करता है जिसके तहत कंपनियों को अधिक स्किल्‍ड विदेशी प्रोफेशन्‍स की नियुक्ति की अनुमति देता है। यह नियुक्ति उन क्षेत्रों में की जाती हैं, जहां कुशल अमेरिकी कामगारों की कमी है।

भारतीय आईटी कंपनियों को लगेगा झटका H-1B वीजा का सबसे ज्यादा लाभ उठाने वाले भारतीय आईटी कंपनियों के पास थर्ड पार्टी वर्कसाइट्स पर नियुक्त इम्प्लॉइज की अच्छी-खासी संख्या है। अमेरिका की बैंकिंग, ट्रैवल और कॉमर्शियल सर्विसेज को अपना काम करवाने के लिए भारत के ऑनसाइट आईटी वर्कर्स पर निर्भर हैं। करीब 7.5 लाख भारतीय यूज कर रहे यह वीजा अगर H1-B वीजा की बात करें तो मौजूदा समय में करीब 7.5 लाख भारतीय इस वीजा के तहत अमेरिका में काम कर रहे हैं। इसमें ज्यादातर भारतीय आईटी पेशेवर ही शामिल हैं। बता दें कि अमेरिका में काम करने वाले कोई भी कंपनी अपने यहां एक अनुपातिक आधार पर ही H1-B वीजा धारकों को जॉब दे सकती है। ट्रम्प के नए फैसले से भारतीयों की जॉब जाने का खतरा बढ़ गया है।नई पॉलिसी से क्या होगा? ट्रम्प प्रशासन की ओर से गुरुवार को जारी नई पॉलिसी के बाद यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) किसी इम्प्लॉई को एच1बी वीजा केवल उस समय अवधि के लिए जारी करेगा, जिसमें वह थर्ड पार्टी वर्कसाइट पर नियुक्त रहेगा। अब यह तीन साल से भी कम के लिए भी हो सकता है। मसलन, अबतक यह वीजा एक बार में तीन साल के लिए जारी किया जाता था, जो कि अब नहीं होगा। ट्रम्प प्रशासन की यह नई पॉलिसी 7 पेज की है। तत्काल प्रभाव से लागू यह नई पॉलिसी वित्त वर्ष 2019 के लिए H-1B वीजा के शुरू होने वाले सीजन से कुछ हफ्ते पहले जारी हुई है। H-1B वीजा का फाइलिंग सीजन 2 अप्रैल से शुरू हो सकता है। अमेरिका में वित्त वर्ष की शुरुआत 1 अक्टूबर 2018 से शुरू होता है।
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