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थाईलैंड बचाव अभियान में दो भारतीय इंजीनियर्स ने भी किया कमाल, पानी निकालने में की मदद

कुलकर्णी और शुक्ला दोनों इंजीनियर हैं जो इंडियन पंप मैन्युफैक्चरिंग कंपनी किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड में काम करते हैं।

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नई दिल्ली। थाईलैंड की गुफा में 12 बच्चे और उनके कोच को बचाने में महाराष्ट्र के सांगली जिले के प्रसाद कुलकर्णी और पुणे के इंजीनियर श्याम शुक्ला का भी हाथ है। जब गुफा से बच्चे बाहर आ रहे थे तो चीयर करने वाले लोगों में श्याम शुक्ला भी शामिल थे। कुलकर्णी और शुक्ला दोनों इंजीनियर हैं जो इंडियन पंप मैन्युफैक्चरिंग कंपनी किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड में काम करते हैं। वह दोनों थाईलैंड रेस्क्यू मिशन की सात सदस्य वाली टीम में शामिल थे।


 

किर्सोल्कर कंपनी ने की डि-वाटरिंग में मदद

 

इंडियन एंबेसी ने थाई अथॉरिटी को सलाह दी थी कि वह किर्लोस्कर ब्रदर्स की कंपनी की डि-वाटरिंग की विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर सकते हैं। तब किर्लोस्कर ब्रदर्स ने अपनी टीम इंडिया, इंग्लैंड और थाईलैंड से साइट पर भेजी। ये एक्सपर्ट 5 जुलाई से वहां है। वह वहां डिवाटरिंग पर सलाह और पंप से पानी निकालने में मदद कर रहे थे।


 

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किर्लोस्कर की है बैंकॉक में ब्रांच

 

बैंकॉक में किर्लोस्कर कंपनी की एक ब्रांच है, जंहा से पानी निकालने के लिए पंप मुहैया कराए गए थे। वह पंप सही तरीके से काम काम करे इसके लिए कुलकर्णी और प्रसाद को बुलाया गया था। थाईलैंड सरकार ने प्रसाद, कुलकर्णी और उनकी टीम का शुक्रिया अदा किया है। शुक्रवार को यह टीम भारत वापस आने वाली है। इससे पहले भी किर्लोस्कर कंपनी ने डिवाटरिंग ऑपरेशन में थाईलैंड की रॉयल सरकार के साथ प्रोजेक्ट पर काम किया है। कंपनी का काम गुफा से पानी निकालना था खासकर वहां जहां 90 डिग्री का टर्न था।

 

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सही सलामत वापस आए बच्चें

 

थाईलैंड की गुफा में फंसे 12 फुटबॉलर बच्चों औप उनके कोच को सुरक्षित बचा लिया गया है। लंबी जद्दोजहद के बाद मंगलवार को स्पेशल रेस्क्यू टीम ने ऑपरेशन पूरा कर लिया। इस घटना पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई थी और हर जगह सभी लोग बच्चों और कोच को सही सलामत बाहर आते देखना चाहते थे। अभी सभी बच्चें और कोच डॉक्टर की देखरेख में हैं।

 

23 जून से फंसे थे बच्चे

 

गुफा में फुटबॉल टीम और उनके कोच 23 जून से फंसे हुए थे। उसी वक्त शुरू हुई तेज बारिश के कारण गुफा से बाहर आने के रास्ता बंद हो गया और सभी लोग गुफा में फंस गए। कई देशों की टीम्स इनको बचाने के लिए रवाना हुई।


 


 

 

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