बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Internationalइस इंडियन नौकर पर आ गया था महारानी विक्‍टोरिया का दिल, नाम था अब्दुल

इस इंडियन नौकर पर आ गया था महारानी विक्‍टोरिया का दिल, नाम था अब्दुल

महारानी विक्‍टोरिया को ऐसी महारानी के तौर पर याद किया जाता है, जिसके साम्राज्‍य का सूर्य कभी कभी अस्‍त नहीं होता था।

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नई दिल्‍ली. ब्रिटिश महारानी विक्‍टोरिया को इतिहास में एक ऐसी महारानी के तौर पर याद किया जाता है, जिसके साम्राज्‍य का सूर्य कभी अस्‍त नहीं होता था। अपने आन-बान, शान के उलट यह महारानी एक इंडियन नौकर को दिल दे बैठी थी। उसका नाम हाफिज मुहम्‍मद अब्‍दुल करीम उर्फ अब्‍दुल था। अब्‍दुल भारत के लिए भले ही एक अनजाना नाम हो, लेकिन ब्रिटेन के इतिहास में एक जाना-माना नाम है। दोनों के रिश्‍ते एक जमाने में इतने नजदीक पहुंच गए थे कि पूरा ब्रिटिश शाही परिवार इसे लेकर परेशान हो गया था। 

 

आखिर कौन था अब्‍दुल करीम.... 

हाफिज मुहम्‍मद अब्‍दुल करीम उर्फ अब्‍दुल को ब्रिटिश शाही परिवार में ‘द मुंशी' के नाम से जाना जाता था। उसे भारत से ब्रि‍टेन में रानी विक्‍टोरिया के अर्दली के तौर पर भेजा गया था, लेकिन वह क्‍वीन विक्‍टोरिया को इतना पंसद आया कि उसे उन्‍होंने शाही परिवार में एक अहम सदस्‍य बना दिया। एक अर्दली के तौर पर अब्‍दुल से सेवाएं लेते हुए क्‍वीन विक्‍टोरिया उस के बेहद करीब आ गई थीं। 

 

झांसी में पैदाइश, आगरा से रिश्‍ता

अब्‍दुल का जन्‍म 1863 में झांसी के पास ललितपुर में हुआ था। अब्‍दुल करीम के पिता अस्‍पताल में असिस्‍टेंट का काम किया करते थे। पिता की पोस्टिंग आगरा में होने के बाद अब्‍दुल भी झांसी से आगरा आ गया। यहां वह आगरा प्रांत में आने वाले जावरा के नवाब के यहां वकील बन गया। बाद में मन नहीं लगा तो यह काम छोड़कर पिता की सिफारिश पर आगरा जेल में क्‍लर्क हो गया।
 
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अब्‍दुल, ब्रिटेन और क्‍वीन विक्‍टोरिया  

आगरा जेल से कुछ बुनकर कैदियों को ब्रिटेन में उनका काम दिखाने के लिए ले जाया गया था। यहां से बुनकर कैदियों के साथ अब्‍दुल को ब्रिटेन जाने का मौका मिला। बाद में अब्‍दुल को उसके अधिकारियों ने रानी विक्‍टोरिया को सौंप दिया। क्‍वीन विक्‍टोरिया को भारत से लगाव था और इसी के चलते अब्‍दुल को उन्‍होंने अर्दली के तौर पर रख लिया।
 
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पहली नजर में विक्‍टोरिया को भा गया अब्‍दुल

विक्टोरिया को अब्‍दुल करीम पहली नजर में ही भा गया था। यह बात क्‍वीन विक्‍टोरिया ने खुद अपनी डायरी में लिखी है। विक्‍टोरिया ने लिखा है, ‘वह (अब्‍दुल) ज्‍यादा जवान, ज्‍यादा हंसमुख और ज्‍यादा लंबा है।
विक्‍टोरिया ने 3 अगस्‍त के नोट में लिखा कि वह हिंदुस्‍तानी भाषा के कुछ शब्‍द सीख रही हैं ताकि वह अपने सर्वेंट्स से बात कर सकें। 30 अगस्‍त को अब्‍दुल क्‍वीन विक्‍टोरिया को उर्दू सिखा रहा था।  
 
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अर्दली से बना मुंशी

क्‍वीन विक्‍टोरिया की खिदमत के सिर्फ 2 महीने के भीतर अब्‍दुल अर्दली से मुंशी बन चुका था। विक्‍टोरिया ने अपने सबसे पसंदीदा नौकर को अब काम चलाऊ अंग्रेजी सिखाने का आदेश दिया, ताकि दोनों एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझ सकें। 1888 में फरवरी महीने की डायरी में क्‍वीन ने लिखा कि अब्‍दुल अब बेहतर तरीके से अंग्रेजी सीख रहा है।
 
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मुंशी बन गया इंडियन सेक्रेटरी

बीतते वक्‍त के साथ क्‍वीन विक्‍टोरिया और अब्‍दुल की नजदीकियां बढ़ रही थीं। इसी के साथ ही अब्‍दुल का ओहदा भी बढ़ रहा था। अब्‍दुल मुंशी से अब इंडियन सेक्रेटरी बन चुका था। इस दौरान विक्‍टोरिया ने कई नोट लिखे, जिससे पता चलता है कि वह अब्‍दुल के नजदीक आ गई थीं। ऑथर श्रावनी बसु के हाथ लगे कुछ खतों में क्‍वीन विक्‍टोरिया ने अब्‍दुल के लिए kisses  (चूमना) भी लिखा है। इससे यह पता चलता है कि दोनों के बीच गहरे संबंध थे।  
 
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एक घटना से तो हद ही हो गई

विक्‍टोरिया और अब्‍दुल के बीच रिश्‍ते होने की खबरें अब धीरे-धीरे बाहर आने लगीं थीं। उसके बाद हुई एक घटना ने पूरे ब्रिटिश शाही परिवार को हिला कर रख दिया। हुआ दरअसल ये कि 1890 में क्‍वीन विक्‍टोरिया अब्‍दुल के साथ बैलमोरल के उस रिमोट हाउस में रात भर अकेली ठहरीं, जहां कभी वह अपने पति और बाद मे ब्‍वॉयफ्रेंड माने जाने वाले ब्रॉन के साथ रूका करतीं थीं। कहा जाता है कि ब्रॉन की मौत के बाद क्‍वीन विक्‍टोरिया उस घर में कभी नहीं गईं और गर्इं भी तो सिर्फ अब्‍दुल के साथ। इस घटना के बाद अब्‍दुल पूरे ब्रिटिश राजपरिवार के निशाने पर आ गया।
 
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विक्‍टोरिया की मौत के बाद अब्‍दुल को भारत भेजा गया

विक्‍टोरिया और अब्‍दुल के संबंधों को लेकर ब्रिटिश शाही परिवार कितना विरोधी था, उसे इस बात से ही समझा जा सकता है कि जैसे ही विक्‍टोरिया की मौत हुई, अब्‍दुल को ब्रिटिश शाही परिवार ने भारत भेज दिया। अब्‍दुल ने बाकी की जिंदगी आगरा में ही काटी। हालांकि उसने अपने और विक्टोरिया के रिश्‍तों पर बेहद सफाई से नोट लिखे।

 

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राज परिवार ने नष्‍ट करवा दिए सारे रिकॉर्ड

क्‍वीन विक्‍टोरिया और अब्‍दुल के रिश्‍ते की चर्चा जहां सारे बिटेन में थी, वहीं शाही राजपरिवार को ये बात पंसद नहीं आ रही थीं। अब्‍दुल के भारत वापस आने के बाद ब्रिटिश शाही परिवार ने विक्टोरिया की ओर से अब्‍दुल को लिखे गए कुछ निजी खतों को नष्‍ट करने का आदेश दे दिया। यह आदेश क्‍वीन विक्‍टोरिया के पुत्र और नए किंग एडवर्ड ने दिए थे। बताया जाता है कि इन खतों में ही विक्‍टोरिया और अब्‍दुल के रिश्‍तों के सारे रिकॉर्ड दर्ज थे।   
 
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ब्रिटेन में अब भी होती है दोनों की चर्चा

क्‍वीन विक्‍टोरिया की मौत को यूं तो करीब 100 साल से ज्‍यादा गुजर चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी उनके और अब्‍दुल के रिश्‍ते की अब भी चर्चा होती है। यही नहीं दोनों के रिश्‍ते पर कई किताबें भी पब्लिश हो चुकी हैं। यूके में रहने वाली भारतीय मूल की लेखिका श्रावनी बसु ने दोनों के रिश्‍ते पर विक्‍टोरिया एंड अब्‍दुल के नाम से किताब भी लिखी है। साथ ही कई मीडिया रिपोर्ट्स में दोनों के रिश्‍ते को लेकर अलग-अलग एंगल से स्‍टोरी भी प्रकाशित हो चुकी हैं।   

 

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बन चुकी है फिल्‍म भी

विक्‍टोरिया और अब्‍दुल के रिश्‍ते पर एक फिल्‍म भी बन चुकी है। इस फिल्‍म का नाम भी श्रावनी बसु के उपन्‍यास के नाम पर विक्‍टोरिया एंड अब्‍दुल ही था। फिल्‍म में अब्‍दुल का रोल अभिनेता अली फजल, जबकि विक्‍टोरिया का रोल जुडी डेंच ने निभाया था। 

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