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श्रीलंकाई पोर्ट हथिया कर भी कामयाब नहीं होगा चीन, भारत ने चली है ये चाल

चीन इस बंदरगाह का सैन्‍य इस्‍तेमाल करेगा। इससे भारत की राष्‍ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो गया है

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नई दिल्‍ली। श्रीलंका की कैबिनेट ने एक समझौते के तहत देश के दक्षिणी हिस्से में मौजूद हम्बनटोटा बंदरगाह  का नियंत्रण चीन को सौंप दिया है। चीन का दावा है कि वह इस बंदरगाह का व्यवसायिक यूज करेगा। श्रीलंका के आधिकारियों का कहना है कि बंदरगाह का नियंत्रण उसी के पास रहेगा। हालांकि इस खबर ने भारतीय मीडिया और लोगों को चिंता को डाल दिया है।

 

भारत की राष्‍ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा 
कुछ एनालिस्‍ट का दावा है कि चीन इस बंदरगाह का सैन्‍य इस्‍तेमाल करेगा। इससे भारत की राष्‍ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो गया है। साथ ही हिंद महासागर में भी भारत को भविष्‍य में बड़ी चुनौती मिलेगी। साल 2014 में चीन की एक पनडुब्बी कोलंबो के पास हम्बनटोटा बंदरगाह के पास आ गई थी. इस पर भारत सरकार ने चिंता जताई थी। श्रीलंका भारत का करीबी पड़ोसी है। इस इलाके में चीनी नौसेना की बढ़ती मौजूदगी का विरोध करता आया है। 

 

 

भारत ने भी चली है चाल 

 चीन के बढ़ते दखल को देखने हुए भारत ने भी श्रीलंका में  अपना अधिग्रहत तेज किया है। अक्‍टूबर में आई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने हम्‍बनटोटा पर चीन को जवाब देने की पूरी तैयारी कर ली है। इसके तहत वह हम्‍बनटोटा से मात्र 18 किलोमीटर की दूरी पर मथाला एयरपोर्ट का अधिग्रहण करेगा। मतलब साफ है कि बंदरगाह से मात्र 18 किलोमीटर की दूरी पर भारत की मौजूदगी हमेशा रहेगी। ऐसे में वह किसी भी परिस्थिति में चीन की हरकत पर नजर रख सकेगा। 

 

 

भारत करेगा बड़ा निवेश 
 दरअसल मथाला एयरपोर्ट को भी श्रीलंकाई कंपनी ने 25 करोड़ डॉलर में विकासित किया था और हम्‍बनटोटा की तरह ही श्रीलंका की सरकार इस एयरपोर्ट का भी कर्ज उतारने में नाकाम रही है। भारत सरकार की योजना श्रीलंकाई लोन का रीपेमेंट करने की है। भारत 30 करोड़ डॉलर के जरिए श्रीलंका के चीनी कर्ज को 40 साल में अदा करेगा। भारत यहां फ्लाइंग स्‍कूल खोलेगा।  

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