बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Internationalपहले भेजा जहाज फिर किया उद्घाटन, Pak-चीन से 5 साल आगे निकला भारत

पहले भेजा जहाज फिर किया उद्घाटन, Pak-चीन से 5 साल आगे निकला भारत

ग्‍वादर पोर्ट से पहले शुरू हो जाने के चलते भारत को चीन पाक पर 5 साल की बढ़त मिल गई है। ग्‍वादर 2022 में शुरू होगा

1 of

 नई दिल्‍ली.  जियो पोलिटिकल मोर्चे पर भारत की एक और कामयाबी चीन-पाक के लिए सिरदर्द बन सकती है। दरअसल भारत-अफगानिस्‍तान और ईरान के संयुक्‍त प्रोजेक्‍ट यानी चाबहार पोर्ट का उद्धाटन हो गया है। वहीं चाबहार से सिर्फ 72 किलोमीटर की दूरी पर बन रही ग्‍वादर पोर्ट परियोजना के लिए पाकिस्‍तान और चीन अभी तैयारियां ही कर रहे हैं।

 

रविवार को इस पोर्ट का उद्धाटन ईरान के राष्‍ट्रपति हसन रोहानी ने किया। इसी के साथ ही चाबहार परियोजना आधिकारिक तौर पर अपने अस्तित्‍व में गई। भारत ने पिछले महीने में ही चाबहार पोर्ट के जरिए अफगानिस्‍तार में गेहूं की अपनी शिपमेंट भेजी थी। इसके चलते भारत को इस पूरे इलाके में चीन पाक के खिलाफ एक मानोवैज्ञानिक बढ़त मिल गई है। 

 

पाकिस्तान को बाईपास करते हुए चाबहार पोर्ट के अधिकारिक तौर पर शुरू होने को ऐतिहासिक माना जा रहा है। भारत इस पोर्ट के जरिए गेहूं की 6 और शिपमेंट भेजने वाला है। मई 2016 में पीएम मोदी की मौजूदगी में ट्राईलेटरल एग्रीमेंट हुआ था। इसी के तहत बने इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट एंड ट्रांजिट कॉरिडोर के जरिए पहला शिपमेंट भेजा जाएगा।  भारत ने ईरान से पिछले साल मई में इस काम के लिए एक समझौता किया था। इसके तहत भारत ने पहले चरण के विकास में करीब 85.21 मिलियन डालर का निवेश किया है। इसके अलावा भारत फीस के रूप में ईरान को दस साल में 22.95 मिलियन डालर देगा। 

 

भारत को मिलेगा मैनेजमेंट 
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान भारत को चाबहार पोर्ट का मैनेजमेंट भी देने को राजी हो गया है। इसका मतलब यह हुआ कि भारत इस पोर्ट का अपने जरूरतों के लिहाज से इस्‍तेमाल कल सकेगा। इसके चलते उसे ग्‍वादर में चीन पाक पर स्‍ट्रैजेजिक रूप से बढ़त भी मिल सकेगी।  

 

आगे पढ़ें- पाक चीन से कैसे 5 साल आगे निकला भारत 

2021 में शुरू होगा ऑपरेशन 
- ग्‍वादर के जरिए चीन जाने वाला इकोनॉमिक रूट अब भी शुरू नहीं हो सका है। 
- इसके चलते ग्‍वादर परियोजना आंशिक तौर पर शुरू है। 
- पाकिस्‍तान सरकार की वेबसाइट के मुताबिक, इस पूरे प्रोजेक्‍ट का कॉमर्शियल ऑपरेशन 2021 या 22 में ही शुरू हो पाएगा। 
- चाबहार परियोजना भी लेट है, लेकिन उद्घाटन के बाद माना जा रहा है कि पाक चीन से 4-5 साल आगे निकल गया है। 
 
 

भारत कर रहा है 78 हजार करोड़ का निवेश
- चाबहार पोर्ट के लिए भारत 12.2 करोड़ डॉलर यानी 78 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेगा।
- इसके अलावा 8.5 करोड़ डॉलर पोर्ट के उपकरण पर भी खर्च किए जाएंगे।
- भारत चाबहार पोर्ट के निर्माण के लिए ईरान को 15 करोड़ डॉलर का लोन भी देने वाला है ।
- भारत 6 अरब डॉलर की राशि रिलीज भी कर चुका है। 

 

 

 

भारत और चीन की अपनी चाल
 ग्‍वादर को लेकर चीन और पाकिस्‍तान के बीच हुए गठजोड़ को टक्‍कर देने के लिए भारत ने ईरान और अफगानिस्‍तान के साथ मिलकर चाबहार परियोजना शुरू की थी। ग्‍वादर से चीन के आर्थिक और जियोपॉलिटिकल हित जुड़े हैं। अभी उसका ज्‍यादातर पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट हिंद महासागर में भारत के सामने से गुजरता है। यही नहीं अरब देशों की ओर जाने वाली उसकी हर शिपमेंट को भी भारत के सामने से गुजरना होता है। चीन की योजना ग्‍वादर के जरिए भारत की आंखों से बचते हुए सीधा अरब सागर तक पहुंच बनाने की है। इसके तहत उसका शिंजिंयांग प्रांत पीओके के जरिए ग्‍वादर से जुड़ेगा। चीन शिंजिंयांग से पाकिस्‍तान के ग्‍वादर तक सड़क और रेल मार्ग बिछाएगा। 

 

 

भारत करना चाहता है पाक को बाईपास

जिस तरह चीन के ग्‍वादर से आर्थिक और जियोपॉलिटिकल हित जुड़े हैं, ठीक उसी तरह चाबहार से भारत के भी जुड़े हैं। दरअसल पाकिस्‍तान भारत को अफगानिस्‍तान जाने का रास्‍ता नहीं दे रहा है। इसके चलते भारत को मध्‍य अफगानिस्‍तान और मध्‍य एशिया तक पहुंचने का कोई रास्‍ता नहीं मिल पा रहा है। भारत चाबहार पर पोर्ट बनाएगा और फिर वहां से अफगानिस्‍तान तक सड़क और रेल मार्ग बिछाएगा। इससे वह ईरान के जरिए अफगानिस्‍तान तक जुड़ जाएगा।  इसके अलावा यूरोप तक पहुंच बढ़ाने में भी भारत को मदद मिलेगी। चाबहार पोर्ट पाकिस्तान के बलूचिस्तान के निकट ईरान के दक्षिण में स्थित है। 


 

भारत का बड़ा है प्‍लान

चाहबार को लेकर भारत सरकार का बड़ा प्‍लान है। एक तरह इसके जरिए वह जहां अफगानिस्‍तान और मध्‍य एशिया तक अपनी पहुंच बनाना चाहती है, वहीं कई प्रोजेक्ट भी शुरू करने का प्‍लान है।
भारत सरकार यहां से अफगानिस्‍तान तक रेलवे लाइन बिछाएगी। इसके तहत भारत ईरान के बाकी हिस्‍सों से रेलवे के जरिए जुड़ जाएगा। इसके अलावा कई भारतीय कंपनियां यहां अपने प्‍लांट भी लगाने की योजना बना रही हैं।
नाल्‍को यहां एल्‍यूमिनियम प्‍लांट लगाने की योजना बना रही है, जबकि कई प्राइवेट और कोऑपरेटिव संस्‍थाएं यहां उर्वरक के प्‍लांट लगाने की तैयारी में हैं। 

 

 

 भारत दे सकेगा चीन को मुंहतोड़ जवाब

मौजूदा दौर में मध्‍य एशिया में ट्रेड के मामले में भारत चीन से पिछड़ रहा है। उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यह इलाका सीधा भारत से कनेक्‍ट नहीं है।  मध्‍य एशिया तक जाने वाला पुराना रूट पाकिस्‍तान से होकर जाता है।  हालांकि रिश्‍ते खराब होने के चलते भारत को वहां तक जाने का सीधा रास्‍ता नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि मध्‍य एशिया में भारत को चीन के मुकाबले ट्रेड में उतनी सफलता नहीं मिल पाई। चीन यहां शंघाई सहयोग संगठन के जरिए पहले ही मध्‍य एशियाई देशों के साथ पार्टनरिशप कर रहा है। उसे यहां से बड़े पैमाने पर नैचुरल रिर्सोस मिला रहा है, जिसमें कई मिनरल के अलावा नैचुरल गैस भी शामिल है। चाबहार के जरिए भारत को जो रूट मिलेगा उसके जरिए वह मध्‍य एशिय में चीन को टक्‍कर दे पाएगा।

 

 

ऐसे खत्‍म होगी पाकिस्‍तान की दादागीरी

 ग्‍वादर में एयरपोर्ट बन जाने के बाद भारत की पहुंच सीधा अफगानिस्‍तान के साथ  ताजिकिस्‍तान, तुर्कमेनिस्‍तान जैसे मध्‍य एशियाई देशों से हो जाएगी।  अभी तक भारत को इन देशों तक या तो हवाई मार्ग से जाना होता था या फिर पाकिस्‍तान की शर्तों पर।  ताजिकिस्‍तान से भारत आने वाली तापी परियोजना पाकिस्‍तान के चलते ही अभी तक परवान नहीं चढ़ पाई है।  इसके तहत पाइप लाइन के जरिए अफगानिस्‍तान और पाकिस्‍तान होते हुए ताजिकिस्‍तान से भारत के बीच  नैचुरल गैस की पाइप लाइन बिछाई जानी है। यही नहीं पाकिस्‍तान के चलते ही भारत अफगानिस्‍तान के साथ अपने ट्रेड को नहीं बढ़ा पा रहा है। बता दें कि भारत में अफगानिस्‍तान से हाल में आने वाली हींग की खेप को हवाई रास्‍ते से मंगवाता है जिसकी कीमत बहुत ज्‍यादा पड़ती है। 

 

 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट