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पुराने दोस्‍त से मोदी कर आए नई डील, पाक-चीन दोनों को होगा दर्द

रणनीतिकारों की मानें तो इसके चलते भारत ग्‍वादर पर चीन की हर हरकत पर नजर रख सकेगा...

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नई दिल्‍ली। पीएम मोदी का हालिया ओमान दौरा भारत के लिए बड़ी रणनीतिक बढ़त लेकर आया है। दरअसल इस दौरे में भारत और ओमान के बीच एक डिफेंस डील भी हुई है। इसके तहत ओमान के दुक्‍म पोर्ट का यूज भारतीय नौसेना अपनी जरूरतों के लिए कर सकेगी। सैन्‍य रणनीतिकारों की मानें तो इसके चलते भारत ग्‍वादर पर चीन की हर हरकत पर नजर रख सकेगा। साथ युद्ध या किसी विपरीत परिस्थिति में वह चीन को यहां रोक भी सकेगा।

 

भारत का पारंपरिक साथी है ओमान 
बता दें कि ओबाम भारत का पारंपरिक मित्र रहा है। ओमान के नौसैनिकों का भारत में प्रशिक्षण दिया जाता है। अदन की खाड़ी से गुजरते वक्‍त ओमान ही भारत के जहाजों को सुरक्षा मुहैया कराता है। ओमान के सुल्‍तान कबूस बिन सैद अल-सैद ने कभी भारत में ही रह कर पढ़ाई की थी। पुणे में कबूस जहां पढ़ाई करते थे वहीं देश के पूर्व राष्‍ट्रपति डॉक्‍टर शंकर दयाल शर्मा पढ़ाया करते थे। बांग्‍लादेश युद्ध के समय अरब समेत दुनिया के ज्‍यादातर मुस्लिम देश भारत के खिलाफ थे, जब भी ओबामा भारत के साथ खड़ा था।  

 

 

चीन और पाकिस्‍तान को एक साथ होगा दर्द 
चीन जिस तरह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को विकसित कर रहा है, उसे देखते हुए दुक्म में भारत की मौजूदगी रणनीतिक तौर पर काफी अहम है। इसके जरिए भारत चीन को ओमान की खाड़ी में रोकने में सक्षम हो जाएगा। साथ ही ग्‍वादर की निगरानी भी आसान हो जाएगी। युद्ध की स्थिति में वह पाकिस्‍तान को समुद्र में दो तरफ से घेर सकेगा। 

 

 

कभी ग्‍वादर पर था ओमान का हक 
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ग्वादर पर कभी ओमान का हक हुआ करता था। उन्होंने 1950 के दशक में भारत को इससे जुड़ने की पेशकश भी की थी। उस समय भारत ने उस पेशकश को यह कहकर नामंजूर कर दिया था कि वह इसे पाकिस्तान से नहीं बचा पाएगा। ओमान की सेनाओं के साथ भारत की तीनों सेनाएं अभ्यास कर चुकी हैं। हालांकि दुक्म का मामला अलग है। यह कोई प्राकृतिक बंदरगाह नहीं है, बल्कि यह कृत्रिम है जिसे विशुद्ध आर्थिक और रणनीतिक उद्देश्य से बनाया गया है। 

 

 

भारत के लिए अहम है ओमान 
ओमान की भारत के लिए भू-रणनीतिक अहमियत है, क्योंकि वह पर्सियन गल्फ और हिंद महासागर के महत्वपूर्ण जलमार्ग पर स्थित है। इसके अलावा, ओमान उस क्षेत्र में वास्तविक 'गुट-निरपेक्ष' देश है। वह अरब जीसीसी का हिस्सा तो है लेकिन उसके ईरान के साथ भी गहरे संबंध हैं। ईरान के साथ न्यूक्लियर डील पर बातचीत के लिए अमेरिका ने ओमान की मदद ली थी। इसके अलावा ओमान की मदद के बाद ही यमन में ISIS के कब्जे से भारतीय फादर टॉम को सकुशल मुक्त कराया गया था। चूंकि भारत खाड़ी के देशों के साथ रिश्तों को और प्रगाढ़ करने में लगा है। ऐसे में ओमान की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है।

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