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क्‍या नीरव मोदी हांगकांग में है? सरकार ने भेजा प्रोविजनल गिरफ्तारी का अनुरोध

यदि मोदी सरकार के नए एक्‍शन पर अटकलें लगाई जाए तो नीरव मोदी शायद हांगकांग में है।

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नई दिल्‍ली. यदि मोदी सरकार के नए एक्‍शन पर अटकलें लगाई जाए तो नीरव मोदी शायद हांगकांग में है। विदेश मंत्रालय ने नीरव मोदी की प्रोविजनल गिरफ्तारी के लिए हांगकांग अथॉरिटी को अनुरोध भेजा है। नीरव मोदी करीब 13 हजार करोड़ रुपए के पीएनबी घोटाले में वांक्षित है। 

 

राज्‍य सभा में एक सवाल के लिखित जवाब में विदेश राज्‍य मंत्री वीके सिंह ने बताया कि सरकार ने हांगकांग अथॉरिटी से नीरव मोदी के प्रोविजनल गिरफ्तारी मांगी है। इस संबंध में अनुरोध 23 मार्च 2018 को सौंप दिया गया है। उनसे यह पूछा गया था कि क्‍या मिनिस्‍ट्री के पास नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के बारे में कोई सुराग है। 

 

 

दोनों के पासपोर्ट हैं रद्द 
वीके सिंह ने बताया कि एमईए ने दोनों हीरा कारोबारियों के पासपोर्ट सस्‍पेंड कर दिए हैं। यह एक्‍शन सीबीआई की ओर से एफआईआर दर्ज करने के बाद किया गया। पीएनबी घोटाला सामने आने के बाद नीरव मोदी और मेहुल चौकसी देश छोड़कर भाग निकले। विदेश मंत्रालय ने 16 फरवरी को मोदी और चौकसी को कारण बताओ नोटिस भेजा था। चूंकि वह तय समय में जवाब देने में फेल रहे इसलिए 23 फरवरी 2018 को उनके पासपोर्ट रद्द कर दिए गए। 

 

LoU के जरिए की धोखाधड़ी 

हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चौकसी ने भारत के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक में धोखाधड़ी वाले लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए 12,968 करोड़ रुपए का घोटाला किया। पीएनबी के मुंबई स्थित ब्रैडी हाउस ब्रान्च के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर इसे अंजाम दिया। पीएनबी की इस ब्रांच से मार्च 2011 से नीरव की कंपनियों को गलत तरीके से एलओयू जारी किए ग्‍ए थे। सीबीआई और ईडी सहित कई एजेंसियां देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले की जांच में जुटी हैं। 

 

1590 LoU जारी हुए थे
पीएनबी से नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और उनके एसोसिएट्स को 1,590 एलओयू जारी हुए थे। नीरम मोदी की कंपनियों, उनके संबंधिमयों और नीरव मोदी ग्रुप को 1213 एलओयू जारी किए। वहीं, मेहुल चौकसी, उसके संबंधियों और गीतांजलि ग्रुप को 377 एलओयू जारी किए थे। वित्‍त मंत्रालय ने संसद को बताया कि प्रत्‍येक एलओयू की एवज में कंपनियों की ओर से रिपेमेंट अभी तक निश्चित नहीं कहा जा सकता है क्‍योंकि इस मामले की जांच जारी है। बता दें, इस घोटाले के बाद रिजर्व बैंक ने बैंकों को एलओयू और लेटर ऑफ कम्‍फर्ट जारी करने से रोक दिया है। 

 

कैसे सामने आया PNB फ्रॉड?
- पंजाब नेशनल बैंक ने स्‍टॉक एक्‍सचेंज बीएसई को बताया कि उसने 1.8 अरब डॉलर (करीब 11,356 करोड़ रुपए) का संदिग्‍ध ट्रांजैक्‍शन पकड़ा है।
- इस घोटाले की शुरुआत 2011 से हुई। 7 साल में हजारों करोड़ की रकम फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स (LoUs) के जरिए विदेशी अकाउंट्स में ट्रांसफर की गई।
- बैंक के अनुसार, ऐसा लगता है कि इन ट्रांजैक्‍शन के आधार पर विदेश में कुछ बैंकों ने उन्हें (चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को) कर्ज दिया है। ये अकाउंट्स कितने थे, कितने लोगों को फायदा हुआ? इस बारे में अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। 
- इस पूरे फ्रॉड को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए अंजाम दिया गया। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्डर को पैसा मुहैया करा देते हैं। अब यदि अकाउंटहोल्डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाये का भुगतान करे।

 

 

आगे पढ़ें... कौन-कौन हैं घोटाले के आरोपी

 

घोटाले में कौन-कौन हैं आरोपी?
- हीरा कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि ग्रुप्स के मालिक मेहुल चौकसी इस घोटाले के मुख्‍य आरोपी हैं। इन दोनों ने गोकुलनाथ शेट्टी के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया।
- 280 करोड़ के फ्रॉड केस में ED ने नीरव मोदी की पत्नी आमी, भाई निशाल, मेहुल चीनूभाई चौकसी, डायमंड कंपनी के सभी पार्टनर्स, सोलर एक्सपर्ट्स, स्टेलर डायमंड और बैंक के दो अफसरों गोकुलनाथ शेट्टी (अब रिटायर्ड) और मनोज खरात के खिलाफ केस दर्ज किया है।
 
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