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इस इंडियन लेडी ने विदेशियों की समझी प्रॉब्लम, जुटा लिए 159 करोड़ रु.

रितु कहने को तो इंजीनियर हैं लेकिन अब वे एक सक्‍सेसफुल एंटरप्रेन्‍योर बन चुकी हैं।

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नई दिल्‍ली. विदेश में ऐसे कई भारतीय हैं, जो वहां पर भारत का नाम रौशन कर रहे हैं। ऐसी ही एक और शख्‍स हैं रितु नारायण। रितु कहने को तो इंजीनियर हैं लेकिन अब वे एक सक्‍सेसफुल एंटरप्रेन्‍योर बन चुकी हैं। उनकी इस सफलता के पीछे रोजमर्रा की एक नॉर्मल प्रॉब्‍लम का हाथ रहा, जो हर वर्किंग पेरेंट्स या यूं कहें ज्‍यादातर वर्किंग मदर के हिस्‍से में आती है और वह है- बच्‍चों को स्‍कूल से पिक करने की प्रॉब्‍लम। काम को बीच में छोड़कर बच्‍चों को स्‍कूल से लाना और फिर ऑफिस पहुंचना, यह हर कामकाजी इन्‍सान के लिए काफी मुश्किल होता है। साथ ही आने-जाने में वक्‍त भी बर्बाद होता है। 

 

अमेरिका की वर्किंग मदर्स की इसी मुश्किल को हल करने के लिए रितु ने 2016 में शुरुआत की जुम की। बच्‍चों की राइड एंड केयर कंपनी जुम बच्‍चों को स्‍कूल से पिक करने की सुविधा देती है। इसके अलावा स्‍कूलों के लिए भी वह अपनी पिक अप एंड ड्रॉप सुविधा उपलब्‍ध कराती है। इससे अमेरिका के कई पेरेंट्स और स्‍कूलों को काफी फायदा हो रहा है। जुम का हेडक्‍वार्टर कैलिफोर्निया के रेडवुड शहर में है और इसकी साल दर साल ग्रोथ का आंकड़ा 340 फीसदी का है। 

 

सोर्स: फोर्ब्‍स, राइडजुम डॉट कॉम 

 

आगे पढ़ें- कैसे आया आइडिया 

 

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कैसे आया आइडिया 

रितु नारायण वैसे तो एस्‍ट्रोनॉट बनना चाहती थीं। लेकिन जब वह भारत से अमेरिका शिफ्ट हुईं तो वह अपने परिवार की पहली इंजीनियर थीं। शादी के बाद जब नारायण की खुद की फैमिली शुरू हुई तो उन्‍होंने अनुभव किया कि अमेरिका में वर्किंग मदर की जिंदगी काफी जद्दोजहद भरी है। नारायण के मुताबिक, उनकी बच्‍ची ने जब स्‍कूल जाना शुरू किया, उस वक्‍त वह ईबे में काम करती थीं। उनके लिए दिन में काम से वक्‍त निकालकर अपनी बच्‍ची को स्‍कूल से पिक करना मुश्किल होता था। किसी ऐसे भरोसेमंद इंसान को तलाशना जो उनकी बच्‍ची को पिक कर सके काफी मुश्किल था। इसी मुश्किल ने नारायण को जुम शुरू करने का आइडिया दिया। 

 

आगे पढ़ें- भाइयों के साथ की शुरुआत 

भाइयों के साथ मिलकर शुरू की जुम 

जो परेशानी उनकी है, वही अमेरिका की बाकी वर्किंग मदर की भी होगी। इस बात को अनुभव करते ही नारायण ने वर्किंग मदर की परेशानी को कम करने के लिए बच्‍चों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद पिक अप सर्विस शुरू करने का फैसला किया। नारायण ने अपने दो भाइयों अभिषेक गर्ग और विवेक गर्ग के साथ इसे शुरू किया। शुरुआत में जुम के पास बहुत ज्यादा डिमांड नहीं आती थी। नारायण की इस सर्विस को रफ्तार मिली उलू वेंचर्स द्वारा किए गए इन्‍वेस्‍टमेंट से। यह जुम में इन्‍वेस्‍ट करने वाली पहली कंपनी थी। 

 

आगे पढ़ें- अब तक कुल कितना इन्‍वेस्‍टमेंट 

अब तक कुल 159 करोड़ जुटा चुकी है जुम 

2017 में जुम की सीरीज ए ने 35.79 (55 लाख डॉलर) करोड़ रुपए का फंड जुटाया था। सबसे ज्‍यादा फंड सेक्‍युओइया कैपिटल की ओर से था। हाल ही में जुम ने 123 करोड़ रुपए (1.9 करोड़ डॉलर) वाली सीरीज बी की घोषणा की है। इसमें सबसे ज्‍यादा फंडिंग स्‍पार्क कैपिटल की है। लगातार आगे बढ़ रहे बिजनेस के चलते अब जुम की योजना कैलिफोर्निया जैसे चुनिंदा बड़े शहरों में अपनी पेशकश बढ़ाने की है। इसके अलावा कंपनी 2019 में अमेरिकी शहरों में और 20 जगहों पर अपनी सर्विस शुरू करेगी।   

 

आगे पढ़ें- स्‍पार्क कैपिटल ने पहले ली सर्विस, फिर किया इन्‍वेस्‍ट

पहले ली सर्विस, फिर किया इन्‍वेस्‍टमेंट: स्‍पार्क कैपिटल 

स्‍पार्क कैपिटल के जनरल पार्टनर नाबील हयात को किसी से जुम के बारे में पता चला। उनके बच्‍चे दो अलग स्‍कूल में पढ़ते थे। बच्‍चों को पिक करने के लिए उन्‍होंने जुम की सर्विस लेनी शुरू की। वह सर्विस से इतना ज्‍यादा प्रभावित हुए कि उन्‍होंने जल्‍दी ही नारायण से मुलाकात की और जुम में इन्‍वेस्‍ट करने की इच्‍छा जताई। आज स्‍पार्क कैपिटल जुम की लीड इन्‍वेस्‍टर है। हयात के मुताबिक, जुम उन स्‍टार्टअप्‍स में से है, जो मां-बाप, बच्‍चों, स्‍कूल, ड्राइवर सभी को फायदा पहुंचा रहा है। स्‍कूलों को भी जुम की बच्‍चों के पिक अप और ड्रॉप सुविधा उपलब्‍ध कराती है। इस पार्टनरशिप से कैलिफोर्निया के 1000 प्राइवेट, पब्लिक और चार्टर स्‍कूलों की 65 करोड़ रुपए की बचत हुई है। इसके अलावा पेरेंट्स के 1 लाख घंटों की बचत हुई है। 

 

आगे पढ़ें- जुम में 90 फीसदी ड्राइवर महिलाएं

90 फीसदी ड्राइवर महिलाएं 

जुम में 90 फीसदी ड्राइवर महिलाएं हैं। उन्‍हें आया, स्‍टे एट होम मदर्स, नर्स और टीचर के तौर पर चाइल्‍डकेयर का एक्‍सपीरियंस है। नारायण का कहना है कि जुम के जरिए महिलाएं ही महिलाओं को काम करने मे मदद कर रही हैं। 

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