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लैपटॉप-मोबाइल बेचकर लगाया था पैसा, अब दुनिया को देता है बिटक्‍वाइन का ज्ञान

आडवाणी दुनिया भर के नामी संस्‍थानों में लोगों को बिटक्‍वाइन और इससे जुड़ी ब्‍लॉकचेन जानकारी पर लेक्‍चर देते हैं....

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नई दिल्‍ली। जिस उम्र में लोग यह तय नहीं कर पाते हैं कि उन्‍हें लाइफ में क्‍या करना है, उस उम्र में करोड़ों की दौलत कमाने के बाद किंग्‍सले आडवाणी दुनिया को बिटक्‍वॉइन  का ज्ञान दे रहे हैं। इसके लिए कभी उन्‍हें अपना लैपटॉप और महंगा हेडफोन तक बेचना पड़ा था। हालांकि आज उनके कदमों के नीचे जमाना है।  वह दुनिया भर के नामी संस्‍थानों में लोगों को बिटक्‍वाइन और इससे जुड़ी ब्‍लॉकचेन जानकारी पर लेक्‍चर देते हैं। वह अपनी पुरानी जॉब छोड़ चके हैं। आइए जानते हैं कि आखिर उन्‍होंने यह सब कैसे हासिल किया ... 

 

पिछले साल गर्मियों में शुरू हुई थी कहानी 
यह कहानी पिछले साल की गर्मियों में शुरू हुई थी। उन्‍हें बिटक्‍वाइन में निवेश करना था। इसके लिए उन्‍होंने अपना महंगा लैपटॉप और ईयरफोन तक बेच डाला। उनके खाते में जितने पैसे थे, सब खाली कर दिए। किसी को भरोसा हो या न हो, लेकिन  किंग्‍सले आडवाणी को जरूर पता था कि यह निवेश उनकी दुनिया बदलने जा रहा है।  आडवाणी ने सारी पूंजी बेचकर बिटक्‍वाइन में 34 हजार डॉलर (21 लाख रुपए) लगाए। अगले 6 महीने में दुनिया बदल गई। उनके निवेश में 7 गुना की बढ़ातरी हुई। 

 

 

3 साल के रिसर्च के बाद लगाया पैसा 
ऐसा कि  किंग्‍सले आडवाणी ने किसी से सुना और पैसा लगा दिया। वह बिटक्‍वॉइन की टेक्‍नोलॉजी पर पिछले 3 साल से काम कर रहे थे। यही कारण है कि उनकी सफलता दुनिया के लिए मिसाइल बन गई। वह लंदन, न्‍यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्‍को और बेंगलुरू जैसे शहरों में लोगों को टिप्‍स देते हैं। वह ऐसे स्‍टार्टअप्‍स को टिप्‍स देते हैं जो ब्‍लॉकचेन टेक्‍नोलॉजी के नेक्‍स्‍ट स्‍टेप पर काम कर रहे हैं।    


 

2012 में पहली बार सुना था नाम 
बता दें कि बिटक्‍वॉइन एक  पेमेंट सिस्‍टम है। जिसे 2008 में शुरू किया था। यह  ब्‍लॉकचेन टेक्‍नोलॉजी पर काम करता है। इसके जरिए लोग अपनी पहचान उजागर किए बिना यहां से वहां पैसे भेज सकते हैं। इसमें किसी भी बैंक की कोई भूमिका नहीं होती है। अआडवाणी के मुताबिक, उन्‍हें 2012 में किसी दोस्‍त ने बिटक्‍वॉइन के बारे में बताया था। इसी के बाद आडवाणी का इस टेक्‍नोलॉजी के प्रति रुझान बढ़ा। हालांकि 2012 तक बिटक्‍वॉइन का यूज ब्‍लैक वर्ड ही करता था। जहां इसके जरिए पोर्न और नशीली दवाओं को धंधा होता था। 

 

नहीं लिया दूसरा चांस 
इसके बाद उन्‍होंने बिटक्‍वॉइन और अन्‍य क्रिप्‍टोकरंसी से जुड़े से व्हाइट पेपर पढ़ने शुरू किए और 2017 की गर्मियों के दौरान इसमें इन्‍वेस्‍टमेंट शुरू किया। यह उनका आत्‍वविश्‍वास ही था, कि  उन्‍होंने दूसरा चांस लेने की भी नहीं सोची और पहली ही बार में  ही जीवन भर की पूंजी बिटक्‍वॉइन और दूसरी क्रिप्‍टोकरंसी में लगा दी। 

 

 

कमा लिया 7 गुना प्रॉफिट 
आडवाणी के मुताबिक, उन्‍हें इस बात का इंजतार रहता था कि आखिर उनके निवेश पर कितना रिटर्न मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, जब आडवाणी ने क्रिप्‍टोकरंसी में निवेश किया था, उस वक्‍त बिटक्‍वाइन की एक यूनिट करीब 4000 डॉलर की थी, वहीं 1 फरवरी को यह कीमत दो गुनी हो चुकी है। लेकिन इस दौरान उनका निवेश सात गुना बड़ा हो चुका है। पिछले साल अक्‍टूबर में ही वह अपनी डाटा साइंटिस्‍ट की जॉब छोड़ चुके हैं। अब वह दुनिया भर के लोगों को यह बताते हैं कि आखिर बिटक्‍वाइन के पीछे की ब्‍लॉकचेन टेक्‍नोलॉजी को कैसे यूज करें। वह  स्‍टैनफोर्ड, कार्नेल, मैस्‍साचुसेट्स इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी जैसी दुनिया भर की यूनिवर्सिटी में लेक्‍चर देते हैं। साथ ही इन इंस्‍टीट्स से जुड़ी और ब्‍लैकचेन टेकनोलॉजी पर काम करने वाले स्‍टार्टअप्‍स के लिए फंडिंग भी करते हैं।   
  

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