बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Internationalमोदी को नहीं होने पाई खबर, मालदीव ने चीन से कर ली गुपचुप डील

मोदी को नहीं होने पाई खबर, मालदीव ने चीन से कर ली गुपचुप डील

इस एग्रीमेंट के जरिए चीन हिंद महासागर में भारत की सीमा के और नजदीक पहुंच सकता है..

1 of

नई दिल्‍ली। भारत के सबसे पड़ोसी देश मालदीव ने चीन के साथ गुपचुप डील कर ली है। डिप्‍लोमेटिक और जियो पॉलिटिकल लिहाज से इसे भारत और मोदी सरकार के लिए झटका माना जा सकता है। पूर्व राष्ट्रपति नाशीद के नेतृत्व वाली देश की मुख्य विपक्षी मालदीव्स डेमोक्रैटिक पार्टी (MDP) ने मालदीव और चीन के बीच हुए फ्री ट्रेड अग्रीमेंट (FTA) का कड़ा विरोध किया है। पार्टी ने इसे देश के साथ धोखा करार दिया है। दरअसल इस डील को मालदीव की संसद ने महज 10 मिनट के भीतर बिना किसी बहस पास कर दिया। इसी के चलते मालदीव सरकार के मंशा पर शक की सूई उठ रही है।    

 

मालदीव ने किया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 
मालदीव ने चीन के साथ यह गुपचुप एग्रीमेंट फ्री ट्रेड के लिए किया है। बुधवार को यह समझौता बिना किसी बहस के रेकॉर्ड एक घंटे में ही संसद में पारित हो गया। चीन और मालदीव के बीच कारोबार संतुलन हमेशा से चीन के पक्ष में रहा है। अब इस बात की चिंता जताई जा रही है कि FTA से आगे भी घाटा बढ़ता जाएगा और मालदीव में भी श्रीलंका की तरह का कर्ज संकट पैदा हो सकता है। 

 

मालदीव में नौसेना का बेस बनाना चाहता है चीन 

चीन मालदीव में अपनी नौसेना के लिए बेस बनाना चाहता है। मालदीव चीन के समुद्री सिल्क रूट में पार्टनर बनने को राजी हो गया है। चीन की सरकार भी मालदीव में बड़े पैमाने पर निवेश कर उसे लुभा रही है। चीन ने माले और हुलहुमाले द्वीप को जोड़ने वाले एक पुल के लिए 10 करोड़ डॉलर की मदद करने की बात कही है। भविष्य में पड़ोसी देशों में आर्थिक संकट पैदा होने के मसले ने दिल्ली को भी सतर्क कर दिया है। 


भारत की चिंता 
दरअसल चीन का रिकॉर्ड छोटे देशो के खिलाफ खतरनाक रहा है। अकसर रीपेंमेंट में नाकाम देशों पर चीन अपनी शर्तें थोपता है। कई बार न चाहते हुए भी देशों को अपनी इकोनॉमिक पॉलिसी बदलने के साथ ही न चाहते हुए भी चीन को अपने यह टिकने की जमीन देने के लिए मजबूर होना पड़ा है। श्रीलंका इसका सबसे बड़ा उदारण है। कम्‍बोडिया, नाइजीरिया के साथ भी वह ऐसा ही कर चुका है। अगर मालवीद चीन के कर्ज के जाल में फंसता है तो चीन उसपर अपने देश में चीन को बेस बनाने की अनुमति देने का दबाव बना सकता है। जाल में फंसाकर अगर चीन वहां अपना बेस बनाने में कामयाब होता है तो यह भारत के लिए संकट वाली स्थिति होगी। क्‍योंकि चीनी पनडुब्बियां भारत के बेहद पास आ जाएंगी। 


 

मालदीव की विपक्षी पार्टियों का आरोप 
मालदीव की संसद के स्पीकर ने बुधवार शाम को इमर्जेंसी में सत्र आयोजित कर चीन के साथ FTA को पारित कर दिया गया। संसद में पेश होने के तीन मिनट के भीतर ही इस अग्रीमेंट को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों की समिति के पास भेज दिया गया। समिति भी जैसे पहले से तैयार थी और 1 हजार से ज्यादा पन्नों के इस समझौते पर 10 मिनट के भीतर ही मुहर लगा दी गई। विपक्ष के एक बड़े नेता ने पहचान जाहिर नहीं होने की शर्त पर कहा कि समिति ने संसद के नियमों के खिलाफ काम किया है। इस महत्वपूर्ण मसले को जनता से छिपाने के लिए जानबूझकर मीडिया को दूर रखा गया। MDP के सांसदों को मंजूरी से पहले इस दस्तावेज को पढ़ने के लिए नहीं दिया गया। 1000 पन्ने के दस्तावेज को मंजूर करने के लिए सरकार ने एक घंटे से भी कम समय लिया और इस दौरान पूरी संसदीय प्रक्रिया पूरी कर ली गई। विपक्षी नेताओं का कहना है, ‘इस समझौते में कई तकनीकी जानकारियां हैं, जिसकी समीक्षा की जानी चाहिए थी और इसके लिए कारोबारी समुदाय से भी परामर्श करने की जरूरत थी। यह अग्रीमेंट शाम में संसदीय सत्र में मात्र 30 वोटों से पारित कर दिया गया।’

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट