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अमेरिका-ईरान की लड़ाई में पिस रहा भारत, मोदी को लेना होगा बड़ा फैसला

इराक और सऊदी अरब के बाद ईरान से भारत सबसे ज्‍यादा क्रूड का आयात करता है।

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नई दिल्‍ली. कच्‍चे तेल (क्रूड) का बड़ा आयातक भारत अब इसी तेल की वजह से एक नई मुसीबत में फंसता नजर आ रहा है। दरअसल, ईरान पर अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्‍प ने मई में दोबारा आर्थिक प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है, जो अगले छह महीने में प्रभावी हो जाएगा। इसमें भारत के लिए दिक्‍कत यह हो गई है अमेरिकी प्रतिबंध से क्रूड के बदले ईरान को पेमेंट करना मुश्किल हो जाएगा। भारत अगले 3 नवंबर से क्रूड ऑयल का भुगतान करने के लिए यूरोपीय बैंकों के रूट का इस्‍तेमाल नहीं कर पाएगा। 

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के डायरेक्‍टर (फाइनेंस) एके शर्मा की मानेंं तो ईरान से तेल खरीदने की एवज में एसबीआई हमारे लिए यूरो में पेमेंट करता है। यह पेमेंट रूट अब 3 नवंबर के बाद उपलब्‍ध नहीं होगा। भारत के लिए ईरान क्रूड का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक है, ऐसे में पेमेंट का यूरो रूट ब्‍लॉक होने से क्‍या भारत वहां से तेल मंगाना बंद कर देगा। 

 

दूसरे विकल्‍पों पर भी विचार करेगा भारत 

कच्‍चे तेल का आयात करने वाली भारतीय रिफाइनरी भारत पेट्रोलियम कार्प लिमिटेड (बीपीसीएल) के डायरेक्‍टर (फाइनेंस) आर रामचंद्रन का कहना है कि अमेरिका के इस फैसले से हालांकि, भारतीय रिफाइनरीज के लिए कोई बड़ी आफत नहीं आने वाली है क्‍योंकि मध्‍य एशिया, अमेरिका और रूस जैसे क्रूड के वैकल्पिक स्रोत हैं। यदि भुगतान संकट के चलते ईरान से सप्‍लाई बाधित होती है तो इन रूट पर विचार किया जा सकता है।

 

वहीं, एके शर्मा ने कहा कि एक बार पेमेंट चैनल ब्‍लॉक हो गया तो ईरान को यह फैसला करना होगा कि क्‍या वह हमारे साथ रुपए में ट्रेड करना चाहता है या भविष्‍य में दोबारा से पेमेंट चैनल शुरू होने की उम्‍मीद पर हमें क्रेडिट पर तेल बेचेगा।  

 

 

आगे पढ़ें... क्‍या ईरान से तेल मंगाना फायदे का सौदा है?

 

क्‍या ईरान से तेल मंगाना फायदे का सौदा है? 

ईरान दरअसल भारतीय रिफाइनरीज को कच्‍चा तेल आकर्षक ऑफर के साथ देता है। मसलन, ईरान खरीददारी के लिए 60 दिन का क्रेडिट देता है। यह दूसरे तेल निर्यातकों की तुलना में मिलना वाली दोगुनी क्रेडिट अवधि है। दूसरी ओर, ईरान से तेल मंगाना किफायती है। ईरान से क्रूड मंगाने का भाड़ा (फ्रेट फॉर शिपिंग ऑयल) दूसरे तेल निर्यातकों के मुकाबले कम है। यानी, ईरान से तेल खरीदना और मंगाना दोनों ही भारत के फेवर में है। 

 

 

अब क्‍या है ऑप्‍शन?  
बीपीसीएल के डायरेक्‍टर (फाइनेंस) आर रामचंद्रन का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंध के लागू होने पर भारतीय रिफाइनरीज के लिए कोई बड़ी आफत नहीं आने वाली है क्‍योंकि मध्‍य एशिया, अमेरिका और रूस जैसे क्रूड के वैकल्पिक स्रोत उपलब्‍ध हैं। यदि भुगतान संकट के चलते ईरान से सप्‍लाई बाधित होती है तो इन रूट से क्रूड मंगाया जा सकता है। वहीं, आईओसी के एके शर्मा कहते हैं कि एक बार पेमेंट चैनल ब्‍लॉक हो गया तो ईरान को यह फैसला करना होगा कि क्‍या वह हमारे साथ रुपए में ट्रेड करना चाहता है या भविष्‍य में दोबारा से पेमेंट चैनल शुरू होने की उम्‍मीद पर हमें क्रेडिट पर तेल बेचेगा।

 

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मोदी क्‍या कर सकते हैं फैसला?  
ईरान से क्रूड मंगाना सस्‍ता है और वह हमारा तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक है, इसे देखते हुए अब क्‍या मोदी सरकार अमेरिका से इस प्रतिबंध से छूट के लिए कह सकती है। आईओसी के एके शर्मा का कहना है कि ईरान पर लगे प्रतिबंध से छूट के लिए अमेरिका से बातचीत का फैसला सरकार को करना है। पिछली बार की तरह भारत अमेरिका से सशर्त अमेरिकी प्रतिबंध से छूट की मांग कर सकता है। पिछली बार शर्त यह थी कि वह ईरान से तेल आयात में कटौती करेगा। इराक और सउदी अरब के बाद ईरान से भारत सबसे ज्‍यादा क्रूड का आयात करता है।

 

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अभी कैसे पेमेंट करता है भारत?  
भारतीय तेल कंपनियां फिलहाल ईरान को यूरोपीय बैंकिंग के जरिए यूरो में भुगतान करती हैं। तेल कंपनियां पहले एसबीआई फंड ट्रांसफर करती हैं, जो ईरान को यूरोप में भुगतान करने के लिए जर्मनी स्थित यूरोपाइश-ईरानिस हैंडल्सबैंक एजी (ईआईएच) का इस्‍तेमाल करता है। 2012 में पहले दौर के प्रतिबंध के समय, जब यूरोपीय बैंकों ने अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध का साथ दिया था, भारत ने तुर्की के बैंक का इस्‍तेमाल ईरान के तेल भुगतान के लिए किया था लेकिन फरवरी 2013 से करीब आधे तेल का भुगतान रुपए में किया गया और शेष भुगतान पेमेंट रूट दोबारा खुलने पर करना तय हुआ। 2015 में जब ईरान पर प्रतिबंधों में ढील दी गई तो पेमेंट क्लियर करना शुरू हुआ।  

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