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भारत ने चीन के BRI प्रोजेक्ट का नहीं किया समर्थन, SCO में विरोध करने वाला अकेला देश

भारत ने चीन की महात्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का समर्थन नहीं किया है।

Modi opposes china BRI, says connectivity projects must respect sovereignty

नई दिल्ली। भारत ने चीन की महात्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का समर्थन नहीं किया है। शंघाई सहयोग संगठन के 8 देशों में भारत अकेला ऐसा देश रहा है, जिसने चीन की इस परियोजना का विरोध किया है। इसे लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि किसी भी मेगा कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट में सदस्य देशों की संप्रभुता और अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।

 

 

बता दें कि चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) भी  बीआरआई का ही हिस्सा है जो पीओके से होते हुए गुजरता है। पाकिस्तानी राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने यहां अपने संबोधन में बीआरआई का खुल कर समर्थन किया। साथ ही कहा कि चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा।

 

 

6 देशों ने किया समर्थन 
मोदी ने यह आश्‍वस्त किया कि भारत ऐसी हर परियोजना को पूरी तरह से समर्थन और सहयोग करेगा, जो सभी को मिलाकर चलने वाली हो। मोदी ने सभी सदस्य देशों से एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करने और इकोनॉमिक ग्रोथ, संपर्क सुविधाओं के विस्तार और आपस में एकता के लिए काम करने के लिए कहा। समिट के बाद जारी की गई घोषणा में कहा गया कि रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और तजाकिस्तान ने बीआरआई के समर्थन का आश्वासन दिया।
 
क‍नेक्टिविटी भारत की प्राथमिकता
मोदी ने कहा कि पड़ोसी देशों से क‍नेक्टिविटी भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है। हम ऐसे हर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का स्वागत करते हैं, जो दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान रकता हो। साथ ही सस्टेनेबल और प्रभावी हो। लेकिन भारत ऐसे किसी परियोजना का समर्थन नहीं करेगा, जो हमारी चिंताओं को अनसुना करने वाला होगा। साथ ही संप्रभुता और अखंडता का सम्मान नहीं करेगा। 

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इन प्रोजेक्ट में शामिल है भारत
मोदी ने कहा कि भारत चाबहार बंदरगाह और अशगाबाद (तुर्कमेनिस्तान) समझौते के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा परियोजना में शामिल है। यह कनेक्टिविटी बढ़ाने वाले प्रोजेक्ट के प्रति भारत के कमिटमेंट को दर्शाता है।  अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा एक 7200 किलोमीटर लंबी कई देशों से होकर गुजरने वाली परियोजना है। यह परियोजना भारत, ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबेजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप को एक मालवहन गलियारे के रूप में जोड़ेगी। अशगाबाद समझौता कई खाड़ी और मध्य एशियाई देशों के बीच परिवहन सुविधाओं के विस्तार और निवेश का समझौता है। 

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