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अमेरिका में अमेरिकियों से ही कमाते थे ओशो, बनाई 850 करोड़ की रकम

लोग हजारों डॉलर खर्च कर ओशो को सुनने-दखने आते थे। उन्‍होंने मेडिटेशन थैरेपी को एक बड़े बिजनेस में तब्‍दील कर दिया..

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नई दिल्‍ली. ओशो ने जिस तेजी के साथ अमेरिका में फेम पाया वो वहां के किसी भी बड़े सुपर स्‍टार और यहां तक कि बड़े-बड़े पॉलिटीशियन के बस की भी बात नहीं। उस दौर के कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ओशो जब 1980 के दशक में पहुंचे तो उन्‍होंने वहां एक क्रांति कर दी। लोग हजारों डॉलर खर्च करके ओशों को सुनने, दखने आते थे। इससे ओशों ने अपनी मेडिटेशन थैरेपी को एक बड़े बिजनेस में तब्‍दील कर दिया। 

 

ओशों ने अमे‍रिका के ओरेगन को अपना ठिकाना गया था। यहां उनकी पॉपुलैरिटी के साथ उनकी आमदनी भी बढ़ी। ओशो ने यहां तरह तरह के कोर्स शुरू किया। मौजूदा दौर में जिनती दौलत बाबा रामदेव ने पतंलति के प्रोडक्‍ट बेचकर बनाई उतनी दौलत ओशो ने अपनी खास थैरेपी से बनाई। ओशो ने अमेरिका में 1981 से 85 के बीच अपनी थैरेपी से उस दौर में 13 करोड़ डॉलर कमाए, जो आज के हिसाब से करीब 850 करोड़ ठहरते हैं। जबकि पतंजलि की मौजूदा टर्नओवर ही कुल 1 हजार करोड़ का है। 

 

 

 

 

 

 


   

 

 

ऐसे होती थी कमाई 

ओशो की संस्‍था को उस दौर में सबसे बड़ी कमाई अलग अलग तरह के कोर्सेज से होती थी। इसमें रजनीश फ्रेश बिगनिंग कोर्स, रजनीश मूवमेंट थैरेपी, रजनीश डे हाइप्‍नोथैरेपी बेसिक कोर्स, रजनीश रीबैलेंसिंग कोर्स शामिल था 

 

           

 

किस कोर्स से कितनी कमाई 
ओशो के आश्रम की ओर से हर कोर्स के लिए अलग-अलग फीस निर्धारित थी। इसमें रजनीश बिगनिंग कोर्स की फीस 2500 डॉलर (मौजदा रेट के हिसाब से 1 लाख 62 हजार रुपए), रजनीश मूवमेंट थैरेपी की फीस 2,100 डॉलर  या 1 लाख 35 हजार रुपए,  रजनीश डे हाइप्‍नोथैरेपी बेसिक कोर्स की फीस 5500 डॉलर या 3  लाख 75 हजार रुपए तथा रजनीश रीबैलेंसिंग कोर्स की फीस 7,500 डॉलर या 9 लाख 75 हजार रुपए थी। 

 

 

एनुअल फेस्टिवल से अलग कमाई 
 ओशो की संस्‍था इसके अलावा एनुअल वर्ल्‍ड फेस्टिवल से कमाती थी। इसकी शुरुआत 1982 की गर्मियों में शुरू की गई। 7 दिन के इस फेस्टिवल में 4 लोगों के एक टेंट में जगह के लिए फीस 509 डॉलर या 33 हजार रुपए थी। वहीं होटल में रूम पाने के लिए 1804 डॉलर या 1 लाख 17 हजार रुपए लगते थे। वहीं खाने, पीने के लिए अलग से पैसे देने पड़ते थे। 


 

5 साल में 850 करोड़ की कमाई 
1984 के इवेंट में करीब 15000 लोग आए थे। इससे ओशों की संस्‍था को करीब 1 करोड़ डॉलर या 65 करोड़ रुपए की आमदनी हुई थी। वहीं 1981 से 1985 के बीच की बात करें तो यह आमदनी करीब 13 करोड़ डॉलर या करीब 850 करोड़ रुपए की थी।   

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