Home » Economy » Internationalमालदीव कैसे फंस चीन के चंगुल में/know how china griped Maldive

पहले की दोस्‍ती फिर बनाया कर्जदार, चीन के पंजे में ऐसे फंसा मालदीव

बिजनेस इकोनॉमी के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह द्वीपीय देश चीन के चंगुल में बुरी तरह से फंस चुका है___

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नई दिल्‍ली. मालदीव का राजनीति संकट एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच चुका है। राष्‍ट्रपति यामीन ने देश में 15 दिनों के लिए आपातकाल लगा दिया है।  सभी राजनीतिक कैदियों को जेल से रिहा करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं मानने के बाद फैले गतिरोध का हवाला देते हुए राष्‍ट्रपति ने यह कदम उठाया है। स्थिति यह है कि मालदीव के सुप्रीम कोर्ट तक ने भारत से मदद तक की अपील की है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्‍ली की मोदी सरकार फिलहाल पूरे मामले में हाथ डालने से कतरा रही है। उसे लगता है कि उसका एक सख्‍त कदम मालदीव को चीन के और नजदीक ले जाएगा। 


चीन के चंगुल में फंसा मालदीव 
बिजनेस और इकोनॉमी के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत की सीमा से मात्र 770 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद यह द्वीपीय देश चीन के चंगुल में बुरी तरह से फंस चुका है। चीन ने पहले मालदीव को दोस्‍ती की और फिर अपना कर्जदार बना दिया। चीन ने मालदीव के खिलाफ वही पुरानी चाल चली है, जो अक्‍सर वह छोटे देशों के साथ करता है। आइए जानते हैं कि आखिर चीन ने ये सब कैसे किया और इससे पहले वह और किन देशों के साथ यह चाल चल चुका है। 

 

इनपुट: द डिप्‍लोमेट 

भारतीय कंपनी का रद्द करवाया कॉन्‍ट्रैक्‍ट 
मालदीव में चीन का खेल कुछ साल पहले शुरु हुआ। भारत की कंपनी GMR राजधानी माले के इंटरनेशनल एयरपोर्ट का मॉर्डनाइजेशन कर रही थी। लेकिन वहां की सरकार ने इस कॉन्‍ट्रैक्‍ट को कैंसिल कर दिया। GMR के पास एयरपोर्ट के 25 साल तक ऑपरेट करने का भी ठेका दिया गया था। कहा जाता है कि इस कॉन्‍ट्रैक को चीन के इशारे पर कैसिंल किया गया। दरअसल एयरपोर्ट का अगला ठेका चीन का दिया गया। यही नहीं मालदीव सरकार के इस फैसले के खिलाफ  GMR इंटरनेशन कोर्ट गई, जहां कोर्ट ने मालदीव सरकार को 27 करोड़ डॉलर का हर्जाना देने को कहा। यूं तो यह हर्जाना मालदीव सरकार ने भरा, लेकिन कुछ रिपोर्ट में दावा किया गया कि हर्जाने की रकम चीन ने मुहैया कराई। 

 

 

चीन बना रहा पुल रोज और बंदरगाह 
फिलहाल चीन मालदीव में पुल, रोड औ बंदरगाह बना रहा है। हुलहुमाले में मौजूद एयरपोर्ट को राजधानी माले से जोड़ने वाला पुल चीन बना रहा है। इसे चाइना मालदीव फ्रैंडशिप कोरिडोर का नाम दिया गया है। वह अटलोल में अपना बेस भी बना रहा है। इसे वह मिडिल ईस्‍ट और साउथ ईस्‍ट एशिया क ट्रांजिट प्‍वाइंट के तौर पर यूज करेगा। 

 

 

मालदीव बन गया कर्जदार 
चीन के भारी इन्‍वेस्‍टमेंट के चक्‍कर में मालदीव चीन का कर्जदार बच चुका है। पूर्व राष्‍ट्रपति मोहम्‍मद नाशीद का आरोप है कि मालदीव बुरी तरह से चीन के चंगुल में फंस चुका है। मौजूदा समय में देश पर जितना कर्ज का उसका 70 फीसदी चीन का दिया हुआ है। वही भी ऊंची ब्‍याजदर पर। इस कर्ज की ब्‍याज ही मालदीव के कुल बजट का 20 फीसदी है। 

 

 

कर्ज देकर फंसाना चीन की पुरानी चाल 
कर्ज देकर छोटे देशों को अपने चंगुल में फंसना चीन की मनी डिप्‍लोमेसी का बड़ा हिस्‍सा रहा है। चीन ऐसे देशों को टारगेट करता रहा है। यहां वह ऊंची ब्‍याज दर पहले कर्ज देता है। कई बार उस देशो की इकोनॉमी में ग्रोथ पेटेंशियल नहीं होने के बाद भी चीन की ओर से कर्ज का ऑफर दिया जाता है। इसके बाद अगर कोई देश कर्ज का रीपेंमेट नहीं कर पाता तो चीन अपनी शर्तें थोपता है। जैसा उसने श्रीलंका, कंबोडिया, नाइजीरिया और लैटिन अमेरिकी देशों में किया। कर्ज नहीं लौटा पाने पर श्रीलंका को  चाहते हुए भी चीन को बंदरगाह का मालिकाना हक देना पड़ा। नाइजीरिया को ताइवान से डिप्‍लोमेटिक रिलेशन तोड़ने पड़े और कंबोडिया को कई और ठेके देने पड़े।  

  

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