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आखिर क्‍यों इराक जैसे अरब देशों में फंस जाते हैं भारतीय, ये हैं 6 वजह

इराक में 2014 से फंसे 39 भारतीयों को आतंकी संगठन ISIS ने मार दिया है। इसकी पुष्टि विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने की है

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नई दिल्‍ली. इराक में मारे गए भारतीयों का पार्थिव अवशेष भारत आ चुका है। सोमवार को 39 मृतकों में से 38 शवों के साथ विशेष विमान अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरा। मृतकों में से 27 पंजाब, चार हिमाचल प्रदेश, दो पश्चिम बंगाल और छह बिहार के रहने वाले थे। बीते दिनों ही विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद को बताया था कि इराक में 2014 से फंसे 39 भारतीयों को आतंकी संगठन ISIS ने मार दिया है। 

भारतीयों के अरब देशों में फंस जाने का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें कई भारतीयों की या तो अरब देशों में मौत हो गई है या वे जिंदगी भर के लिए वहां की जेलों में फंसे हुए हैं। कई लोग वहां पर बेहद ही कठिन परिस्थितियों और यहां तक कि शारीरिक हिंसा का भी सामना कर रहे हैं। 

 
देश से हर साल कई लोग रोजगार की तलाश में इराक, सऊदी अरब, बहरीन, कतर जैसे अरब देशों में जाते हैं। वहां कम पढ़े-लिखे लोगों को भी आसानी से मिलने वाले मौके और अच्‍छा वेतन लोगों को आकर्षित करता है। लेकिन कभी-कभी नौकरी पाने की इस ख्‍वाहिश की लोगों को बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ती है। कई भारतीय गलत तरीकों से अरब देश जाते हैं, जिसके चलते भारत सरकार के पास उनके बारे में जानकारी नहीं होती है। ऐसे में उनकी मदद करना सरकार के लिए मुश्किल हो जाता है। 

 

आगे पढ़ें- पहली वजह 

इलीगल एजेंट्स

भारतीयों के अरब देशों में फंसने की एक बड़ी और प्रमुख वजह है कि कई लोग विदेश जाने के लिए इलीगल एजेंट्स की मदद लेते हैं। ये एजेंट्स लोकल इंडियन एंबेसीज पर रजिस्‍टर्ड नहीं होते हैं और जरूरतमंद लोगों को झूठे वादे और प्रलोभन देकर उन्‍हें फंसा लेते हैं। ऐसे कई मामले हैं, जिनमें एजेंटों ने कई भारतीयों को टूरिस्‍ट वीजा पर वहां भेजा और अब वहां उनसे जबरन घरों में काम कराया जा रहा है। जहां उन्‍हें शोषण का शिकार होना पड़ रहा है। 

 

आगे पढ़ें- दूसरी वजह

अरब देशों में भारतीय एंबेसी पर रजिस्‍ट्रेशन न कराना

अरब देशों में काम करने वाले कई भारतीय रजिस्‍टर्ड वर्कर नहीं हैं। वे वहां की इंडियन एंबेसी में अपना रजिस्‍ट्रेशन नहीं कराते, जिससे भारत के विदेश मामलों के मंत्रालय (MEA) के लिए मुसीबत के वक्‍त उनकी मदद करना मुश्किल हो जाता है। 

 

आगे पढ़ें- पासपोर्ट, वीजा दे देना 


पासपोर्ट या वीजा अपने इम्‍प्‍लॉयर को सौंप देना

कई लोग जो ज्‍यादा पढ़े लिखे नहीं हैं या फिर जिन्‍हें ज्‍यादा जानकारी नहीं है, वे नौकरी की अत्‍यधिक जरूरत के कारण या वहां का नियम समझकर अपने पासपोर्ट और वीजा को अपने इम्‍प्‍लॉयर को सौंप देते हैं। बाद में जब वे काम छोड़ना चाहते हैं तो इम्‍प्‍लॉयर उनके पासपोर्ट को लौटाने से इंकार कर के उन्‍हें अपने यहां ही काम करने पर मजबूर कर देता है। कई बार वर्कर काम न छोड़ें इसके लिए इम्‍प्‍लॉयर धोखे से या जबरन उनका पासपोर्ट अपने कब्‍जे में ले लेते हैं या फिर उनकी कई महीनों की सैलरी रोक लेते हैं। 

 

आगे पढ़ें- झूठे केस

झूठे केसों में फंसाया जाना

कई बार जबरन काम कराने वाले इम्‍प्‍लॉयर भारतीयों को झूठे मामलों में फंसाकर जेल पहुंचा देते हैं। कई बार उनके डॉक्‍यूमेंट्स रिन्‍यू नहीं होने की वजह से भी उन्‍हें जेल जाना पड़ता है। उसके बाद अरब देशों के नियम-कानूनों के चलते उनका जेल से बाहर आना मुश्किल हो जाता है। यहां तक कि कई लोग जीवन भर के लिए जेल में फंस जाते हैं। 
 
अगली स्‍लाइड में- जानकारी का अभाव 

जानकारी न होना 

कई भारतीयों को अरब देशों के कायदे कानून और वहां काम करने वालों के अधिकारों के बारे में पता नहीं होता है, जिसके चलते वे कॉन्‍ट्रैक्‍ट में लिखी बातों को 
वहां के नियम मान लेते हैं। जबकि कई बार कॉन्‍ट्रैक्‍ट में जो लिखा है, वो वहां के नियमों और कानूनों के मुताबिक नहीं होता है। ऐसे में उनकी सहमति से उस कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर साइन हो जाने के बाद वे इम्‍प्‍लॉयर की सभी बातें मानने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इसके अलावा उन्‍हें वहां पर विदेशी वर्कर्स को मिलने वाले अधिकारों की भी जानकारी नहीं होती।
 
अगली स्‍लाइड में- नौकरी जाने का डर 

शिकायत न करना

कई वर्कर्स अपने इम्‍प्‍लॉयर द्वारा शो‍षण किए जाने के बावजूद उनकी शिकायत नहीं करते हैं। इसके पीछे वजह है कि वे अपनी नौकरी नहीं खोना चाहते। कई बार वहां के कायदे कानून का पता न होना भी इसकी वजह होता है। 

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